{"_id":"cf27b7fe86b030c37223078905a4868b","slug":"congress-leader-fighting-with-each-other","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा को लेकर कांग्रेसी नेताओं में ही घमासान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा को लेकर कांग्रेसी नेताओं में ही घमासान
अखिलेश वाजपेई/लखनऊ
Updated Fri, 15 Nov 2013 08:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनरेगा में गोलमाल पर कांग्रेस के ही एक नेता ने केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
विज्ञापन
गुरुवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिखकर कहा है कि यूपी में मनरेगा के प्रशासनिक मद के धन को व्यय करने में काफी गड़बड़ी की गई।
इसके बारे में मंत्रालय को भी कई बार सुबूतों के साथ जानकारी दी गई, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एआईसीसी व ‘कपार्ट’ (कौंसिल फॉर एडवांसमेंट ऑफ पीपुल्स एक्शन एंड रूरल टेक्नालॉजी) के सदस्य संजय दीक्षित ने इस खत के साथ 50 जिलों में इस धन की गड़बड़ी के प्रमाण भी भेजे हैं।
विज्ञापन
पढ़ें-अब मीडिया से बदसुलूकी पर उतरे आजम
विज्ञापन
लिखा है, ‘मैं आपको फिर प्रमाण भेज रहा हूं। जिसके साथ घोटाला व गड़बड़ी के सुबूत भी हैं। इनके आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई भी हो सकती है और प्रदेश को मनरेगा की मद के धन भी रोका जा सकता है। विश्वास है कि आप कार्रवाई कराएंगे।’
पुलिस में भी की है शिकायत
दीक्षित ने मंत्री को पत्र में बताया है कि उन्होंने इस मामले में 30 अक्तूबर को लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली में शिकायत भी दर्ज कराई है।
जिसके साथ उन्होंने 47 जिलों की एमआईएस रिपोर्ट भी पुलिस को दी है। रिपोर्ट में प्रशासनिक मद के धन के दुरुपयोग का पूरा ब्योरा व उसे साबित करने वाले कागज लगाए गए हैं।
पत्र में लिखा है कि वही दस्तावेज एक बार फिर भेज रहा हूं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय चाहे तो जांच करा लें।
दीक्षित ने लिखा है कि मनरेगा में प्रशासनिक मद में आने वाली धनराशि स्टेशनरी, संविदा कर्मियों के मानदेय भुगतान जैसी मदों पर खर्च होनी चाहिए।
कृषि भवन भी तो नहीं पहुंच रहा है हिस्सा
पत्र में लिखा है, ‘आदरणीय जयराम रमेश जी! मेरी शिकायत पर आपने आश्वस्त किया था कि केंद्रीय अधिकारियों से यूपी को दो वर्षों 2011-12 और 2012-13 में प्रशासनिक मद में दिए गए धन के खर्च की जांच कराई जाएगी।
जिसकी वजह से ज्यादातर संविदा कर्मचारियों का मानदेय दो वर्ष तक लंबित है। पर, कार्रवाई नहीं हुई।
इससे पहले अक्तूबर 2011 में भी मैंने इसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी दी थी। पर, मंत्रालय चुपचाप बैठा रहा।
जिससे कृषि भवन में बैठे उच्चाधिकारियों पर अंगुली उठना स्वाभाविक है। जनता के मन में यह भावना घर करती जा रही है कि केंद्र सरकार मात्र औपचारिकता में राज्य सरकार को पत्र भेजती है।
निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक मद की इस लूट का कुछ हिस्सा कृषि भवन नहीं दिल्ली में भी पहुंच रहा है। विश्वास है कि प्रदेश की जनता का यह भ्रम आप तोड़ेंगे।’
लखनऊ की अन्य खबरों के लिए क्लिक करें यहां