फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   condolence to police inspector dr. sanjay

नम आंखों से दी इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार को अंतिम विदाई, बिलखती रही पत्नी और तीनों बेटियां

Mon, 07 Mar 2022 01:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 01:26 AM IST
विज्ञापन
condolence to police inspector dr. sanjay
लखनऊ। मड़ियांव के भिठौली तिराहे पर शनिवार देर रात सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सैरपुर इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार को रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद रिजर्व पुलिस लाइंस में अंतिम विदाई दी गई। पुलिस कमिश्नर, डीएम समेत अन्य अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। इसके बाद परिवारीजन शव लेकर अपने पैतृक निवास बिहार के औरंगाबाद चले गए।
विज्ञापन

मड़ियांव के भिठौली तिराहे पर शनिवार देर रात ट्रक में पीछे से एसयूवी घुसने से उसमें सवार सैरपुर इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार की मौत हो गई थी। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद डॉ. संजय का शव रिजर्व पुलिस लाइंस ले जाया गया जहां डीएम अभिषेक प्रकाश, पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर, जेसीपी पीयूष मोर्डिया व नीलाब्जा चौधरी, डीसीपी (मुख्यालय) रईस अख्तर, डीसीपी (उत्तरी) एस चिनप्पा, डीसीपी (पश्चिमी) सोमेन वर्मा, एडीसीपी (उत्तरी) प्राची सिंह समेत अन्य डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी व इंस्पेक्टरों ने डॉ. संजय को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एक तरफ जहां डॉ. संजय की पत्नी, बेटियां व भाई बिलख रहे थे तो दूसरी ओर सैरपुर थाने के कई दरोगा, दीवान व महिला आरक्षी रो रहे थे। ये नजारा देख पुलिस अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं। डीएम, पुलिस कमिश्नर, जेसीपी समेत अन्य अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। फिर राजकीय सम्मान के साथ डॉ. संजय का शव उनकेे परिवारीजनों के साथ पैतृक निवास बिहार के औरंगाबाद जिले के हसनपुर भेज दिया गया।
विज्ञापन

बहादुरी के लिए मिल चुका पुरस्कार
बिहार के औरंगाबाद के हसनपुर निवासी लाल बिहारी सिंह के दो बेटे व चार बेटियों में चौथे नंबर के डॉ. संजय कुमार सिंह वर्ष 2011 में चित्रकूट जिले में तैनात थे। जहां एक इनामी डकैत के एनकाउंटर पर पुलिस टीम को वीरता के लिए पुरस्कृत किया गया था। इसमें डॉ. संजय को भी पुरस्कार मिला था। वर्ष 2016 से 2020 तक उनकी तैनाती सीबीसीआईडी में थी। छठा मील चौकी प्रभारी राधेश्याम मौर्य ने बताया कि शनिवार को शाम सात बजे तक वह डॉ. संजय के साथ ही थे। सोमवार को प्रस्तावित सैरपुर थाने के उद्घाटन की तैयारियों समेत भिठौली पर जाम की समस्या से निपटने को लेकर उनसे बातचीत हुई थी। राधेश्याम ने बताया कि कभी सोचा भी न था कि इस तरह अचानक हम अपने इंस्पेक्टर को खो देंगे। कहा कि डॉ. संजय तेजतर्रार इंस्पेक्टर ही नहीं नेकदिल इंसान भी थे। कोई भी विवेचना या शिकायत लंबित नहीं रखते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

बेटियों को अफसर बनाने का था सपना
लखनऊ। इंस्पेक्टर डॉ. संजय के शव से लिपटकर रो रहीं पत्नी सोनी बिलखते हुए कह रही थीं, आप तो बेटियों को अफसर बनाना चाहते थे। मगर इस तरह अचानक हमें अकेला छोड़कर क्यों चले गए। परिवार के लोग व महिला पुलिसकर्मी उन्हें किसी तरह संभाल रही थीं। डॉ. संजय पत्नी व तीनों बेटियों संग एल्डिको ग्रीन में किराए के मकान में रहते थे। बड़ी बेटी चारू (16) ने इसी साल हाईस्कूल किया है। मंझली बेटी अंशुमालि कक्षा छह में है। जबकि छोटी बेटी अंबे अभी ढाई साल की ही है। डॉ. संजय के बड़े भाई धनंजय कुमार सिंह औरंगाबाद में शिक्षण संस्थान संचालित करते हैं। धनंजय ने बताया कि संजय, अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाना चाहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed