{"_id":"622511df298a824ae91493a2","slug":"condolence-to-police-inspector-dr-sanjay-lucknow-news-lko6206734101","type":"story","status":"publish","title_hn":"नम आंखों से दी इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार को अंतिम विदाई, बिलखती रही पत्नी और तीनों बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नम आंखों से दी इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार को अंतिम विदाई, बिलखती रही पत्नी और तीनों बेटियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। मड़ियांव के भिठौली तिराहे पर शनिवार देर रात सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सैरपुर इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार को रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद रिजर्व पुलिस लाइंस में अंतिम विदाई दी गई। पुलिस कमिश्नर, डीएम समेत अन्य अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। इसके बाद परिवारीजन शव लेकर अपने पैतृक निवास बिहार के औरंगाबाद चले गए।
मड़ियांव के भिठौली तिराहे पर शनिवार देर रात ट्रक में पीछे से एसयूवी घुसने से उसमें सवार सैरपुर इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार की मौत हो गई थी। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद डॉ. संजय का शव रिजर्व पुलिस लाइंस ले जाया गया जहां डीएम अभिषेक प्रकाश, पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर, जेसीपी पीयूष मोर्डिया व नीलाब्जा चौधरी, डीसीपी (मुख्यालय) रईस अख्तर, डीसीपी (उत्तरी) एस चिनप्पा, डीसीपी (पश्चिमी) सोमेन वर्मा, एडीसीपी (उत्तरी) प्राची सिंह समेत अन्य डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी व इंस्पेक्टरों ने डॉ. संजय को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एक तरफ जहां डॉ. संजय की पत्नी, बेटियां व भाई बिलख रहे थे तो दूसरी ओर सैरपुर थाने के कई दरोगा, दीवान व महिला आरक्षी रो रहे थे। ये नजारा देख पुलिस अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं। डीएम, पुलिस कमिश्नर, जेसीपी समेत अन्य अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। फिर राजकीय सम्मान के साथ डॉ. संजय का शव उनकेे परिवारीजनों के साथ पैतृक निवास बिहार के औरंगाबाद जिले के हसनपुर भेज दिया गया।
बहादुरी के लिए मिल चुका पुरस्कार
बिहार के औरंगाबाद के हसनपुर निवासी लाल बिहारी सिंह के दो बेटे व चार बेटियों में चौथे नंबर के डॉ. संजय कुमार सिंह वर्ष 2011 में चित्रकूट जिले में तैनात थे। जहां एक इनामी डकैत के एनकाउंटर पर पुलिस टीम को वीरता के लिए पुरस्कृत किया गया था। इसमें डॉ. संजय को भी पुरस्कार मिला था। वर्ष 2016 से 2020 तक उनकी तैनाती सीबीसीआईडी में थी। छठा मील चौकी प्रभारी राधेश्याम मौर्य ने बताया कि शनिवार को शाम सात बजे तक वह डॉ. संजय के साथ ही थे। सोमवार को प्रस्तावित सैरपुर थाने के उद्घाटन की तैयारियों समेत भिठौली पर जाम की समस्या से निपटने को लेकर उनसे बातचीत हुई थी। राधेश्याम ने बताया कि कभी सोचा भी न था कि इस तरह अचानक हम अपने इंस्पेक्टर को खो देंगे। कहा कि डॉ. संजय तेजतर्रार इंस्पेक्टर ही नहीं नेकदिल इंसान भी थे। कोई भी विवेचना या शिकायत लंबित नहीं रखते थे।
विज्ञापन
बेटियों को अफसर बनाने का था सपना
लखनऊ। इंस्पेक्टर डॉ. संजय के शव से लिपटकर रो रहीं पत्नी सोनी बिलखते हुए कह रही थीं, आप तो बेटियों को अफसर बनाना चाहते थे। मगर इस तरह अचानक हमें अकेला छोड़कर क्यों चले गए। परिवार के लोग व महिला पुलिसकर्मी उन्हें किसी तरह संभाल रही थीं। डॉ. संजय पत्नी व तीनों बेटियों संग एल्डिको ग्रीन में किराए के मकान में रहते थे। बड़ी बेटी चारू (16) ने इसी साल हाईस्कूल किया है। मंझली बेटी अंशुमालि कक्षा छह में है। जबकि छोटी बेटी अंबे अभी ढाई साल की ही है। डॉ. संजय के बड़े भाई धनंजय कुमार सिंह औरंगाबाद में शिक्षण संस्थान संचालित करते हैं। धनंजय ने बताया कि संजय, अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाना चाहते थे।
विज्ञापन
मड़ियांव के भिठौली तिराहे पर शनिवार देर रात ट्रक में पीछे से एसयूवी घुसने से उसमें सवार सैरपुर इंस्पेक्टर डॉ. संजय कुमार की मौत हो गई थी। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद डॉ. संजय का शव रिजर्व पुलिस लाइंस ले जाया गया जहां डीएम अभिषेक प्रकाश, पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर, जेसीपी पीयूष मोर्डिया व नीलाब्जा चौधरी, डीसीपी (मुख्यालय) रईस अख्तर, डीसीपी (उत्तरी) एस चिनप्पा, डीसीपी (पश्चिमी) सोमेन वर्मा, एडीसीपी (उत्तरी) प्राची सिंह समेत अन्य डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी व इंस्पेक्टरों ने डॉ. संजय को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एक तरफ जहां डॉ. संजय की पत्नी, बेटियां व भाई बिलख रहे थे तो दूसरी ओर सैरपुर थाने के कई दरोगा, दीवान व महिला आरक्षी रो रहे थे। ये नजारा देख पुलिस अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं। डीएम, पुलिस कमिश्नर, जेसीपी समेत अन्य अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। फिर राजकीय सम्मान के साथ डॉ. संजय का शव उनकेे परिवारीजनों के साथ पैतृक निवास बिहार के औरंगाबाद जिले के हसनपुर भेज दिया गया।
विज्ञापन
बहादुरी के लिए मिल चुका पुरस्कार
बिहार के औरंगाबाद के हसनपुर निवासी लाल बिहारी सिंह के दो बेटे व चार बेटियों में चौथे नंबर के डॉ. संजय कुमार सिंह वर्ष 2011 में चित्रकूट जिले में तैनात थे। जहां एक इनामी डकैत के एनकाउंटर पर पुलिस टीम को वीरता के लिए पुरस्कृत किया गया था। इसमें डॉ. संजय को भी पुरस्कार मिला था। वर्ष 2016 से 2020 तक उनकी तैनाती सीबीसीआईडी में थी। छठा मील चौकी प्रभारी राधेश्याम मौर्य ने बताया कि शनिवार को शाम सात बजे तक वह डॉ. संजय के साथ ही थे। सोमवार को प्रस्तावित सैरपुर थाने के उद्घाटन की तैयारियों समेत भिठौली पर जाम की समस्या से निपटने को लेकर उनसे बातचीत हुई थी। राधेश्याम ने बताया कि कभी सोचा भी न था कि इस तरह अचानक हम अपने इंस्पेक्टर को खो देंगे। कहा कि डॉ. संजय तेजतर्रार इंस्पेक्टर ही नहीं नेकदिल इंसान भी थे। कोई भी विवेचना या शिकायत लंबित नहीं रखते थे।
विज्ञापन
बेटियों को अफसर बनाने का था सपना
लखनऊ। इंस्पेक्टर डॉ. संजय के शव से लिपटकर रो रहीं पत्नी सोनी बिलखते हुए कह रही थीं, आप तो बेटियों को अफसर बनाना चाहते थे। मगर इस तरह अचानक हमें अकेला छोड़कर क्यों चले गए। परिवार के लोग व महिला पुलिसकर्मी उन्हें किसी तरह संभाल रही थीं। डॉ. संजय पत्नी व तीनों बेटियों संग एल्डिको ग्रीन में किराए के मकान में रहते थे। बड़ी बेटी चारू (16) ने इसी साल हाईस्कूल किया है। मंझली बेटी अंशुमालि कक्षा छह में है। जबकि छोटी बेटी अंबे अभी ढाई साल की ही है। डॉ. संजय के बड़े भाई धनंजय कुमार सिंह औरंगाबाद में शिक्षण संस्थान संचालित करते हैं। धनंजय ने बताया कि संजय, अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाना चाहते थे।