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Hospitals in UP Jail: जेलों में बने अस्पताल खुद बीमार, बीते चार साल में होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ा

Mon, 10 Apr 2023 07:10 PM IST
ishwar ashish अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ
अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 10 Apr 2023 07:10 PM IST
सार

चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी ने मुश्किल बढ़ा दी है। सुरक्षा गार्ड नहीं मिलने से गंभीर रोग से पीड़ित बंदियों का बाहर इलाज कराने में भी दिक्कत आ रही है।

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conditions of hospitals in jails in Uttar Pradesh.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

विस्तार

जेलों में बने अस्पतालों का बुरा हाल है। इससे बीते चार साल में बंदियों की मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है, जो चिंता का सबब है। बीते वर्ष जेल में महिला बंदियों के साथ रहने वाले आठ बच्चों की मौत ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। इन अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ स्वीकृत पदों का सिर्फ 35 फीसदी ही है। यही नहीं सुरक्षा गार्ड नहीं मिलने से गंभीर रूप से बीमार बंदियों को इलाज के लिए बाहर के अस्पताल भेजने में भी मुश्किल होती है।

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हैरानी की बात यह है कि जेलों में पहले से पैरामेडिकल कर्मियों (नर्स, वार्ड ब्वाय, फिजियोथैरेपी आदि) के सृजित पद जरूरत से बेहद कम हैं। प्रत्येक कारागार में फार्मासिस्ट के तीन पद आवश्यक हैं, ताकि हर वक्त एक फार्मासिस्ट उपलब्ध रहे। पर, कई जेलों में एक भी फार्मासिस्ट नहीं है। पैरामेडिकल के कुल 267 पद हैं, इसमें 170 पद अर्से से खाली हैं।
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चिकित्सकों के कुल 153 पदों में से 36 रिक्त हैं। ऐसे में जब किसी गंभीर रूप से बीमार बंदी को बाहर के अस्पताल ले जाने की नौबत आती है तो पुलिस लाइन से पुलिस गार्ड नहीं मिल पाते। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया है। साथ ही अनुरोध भी किया गया कि पुलिस गार्ड देने के लिए शासन स्तर से पुलिस विभाग को निर्देश दिए जाएं।

जेलों में इस तरह बढ़ा मौतों का आंकड़ा
वर्ष -- सामान्य -- हत्या -- आत्महत्या -- पुलिस अभिरक्षा -- बच्चे -- योग
2019 -- 402 -- 00 -- 20 -- 00 -- 5-- 427
2020 -- 407 -- 00 -- 28-- 00 --  1 -- 436
2021 -- 441 -- 4 -- 30 -- 3  -- 478
2022      -- 479 -00  -- 12    --   2 (हत्या)    --  8    -- 501

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