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ये है लखनऊ ट्रॉमा का हाल, डॉक्टर तभी करेंगे इलाज जब स्ट्रेचर लाएंगे साथ

Sun, 19 Nov 2017 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 19 Nov 2017 09:30 AM IST
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condition of trauma in Lucknow.
- फोटो : amar ujala

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सक मरीज को इलाज तभी देते हैं, जब वह स्ट्रेचर पर लाया जाता है और फिलहाल ट्रॉमा में हालात ऐसे हैं कि स्ट्रेचर के लिए अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है। कभी-कभार तो घंटेभर की दौड़ लगानी पड़ती है। यानी मरीज की हालत चाहे जितनी गंभीर हो जल्द इलाज चाहते हैं तो स्ट्रेचर जल्द लाना होगा। ऐसे में अब मरीजों के परिवारीजनों का ही सवाल है कि क्या अपनों की जान बचाने के लिए स्ट्रेचर भी घर से ही लाना होगा।

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नया मामला शनिवार का है। शाम करीब चार बजे जानकीपुरम निवासी शिव वर्मा की तबीयत खराब हो गई। उसका भाई सूरज उसे गंभीर हालत में लेकर ट्रॉमा कैजुअल्टी पहुंचा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिसिन विभाग में शिफ्ट किया जाना था।
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भाई का आरोप है कि डॉक्टर व कर्मचारी उसे स्ट्रेचर लेने के लिए पांचवें तल तक दौड़ाया मगर कहीं भी स्ट्रेचर नहीं मिला। वहीं कैजुअल्टी स्टाफ बेड खाली कराने के लिए मरीज को जबरन बाहर किए जाने की धमकी दे रहे थे। ऐसी हालत तब है जब ट्रॉमा सेंटर में 200 से अधिक स्ट्रेचर उपलब्ध हैं।
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हंगामा मचा तो थमा दिया टूटा स्ट्रेचर
जब एक घंटे तक स्ट्रेचर नहीं मिला तो मरीज के भाई ने कैजुअल्टी में हंगामा शुरू कर दिया। मामले की शिकायत ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. हैदर अब्बास से की तो उनके निर्देश के बाद मेडिसिन विभाग के कर्मचारी ने टूटी स्ट्रेचर थमा दी। तीमारदार ने केजीएमयू प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आला अधिकारियों से शिकायत की बात कही है।

पहले भी रेजीडेंट बिना स्ट्रेचर भर्ती से कर चुके हैं इन्कार

condition of trauma in Lucknow.

बगैर स्ट्रेचर इलाज न करने का यह पहला मामला नहीं है। बीते मंगलवार को ही रायबरेली से आए एक गंभीर मरीज को बिना स्ट्रेचर रेजीडेंट डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया था। बेटा रिंकू  ने बताया कि ट्रॉमा में मरीज को भर्ती कराने के लिए वार्ड में ले गए तो रेजीडेंट ने बिना स्ट्रेचर पर आए भर्ती लेने से मना कर दिया। इसे लेकर उनकी नोकझोंक भी हुई। मामला बढ़ता देख रेजीडेंट डॉक्टरों ने उसे भर्ती ले लिया।

ट्रॉमा प्रभारी डॉ. हैदर अब्बास से सीधी बात
सवाल -स्ट्रेचर के बिना मरीज को डॉक्टर इलाज नहीं देते हैं, जबकि स्ट्रेचर मिलता ही नहीं है। तो क्या तीमारदार को घर से स्ट्रेचर लाना चाहिए?
जवाब-
बिना स्ट्रेचर मरीज को भर्ती न लिए जाने का कोई नियम नहीं है। कोई भी रेजीडेंट ऐसा करता है तो शिकायत करें।

सवाल -200 स्ट्रेचर ट्रॉमा के पास हैं, फिर भी मरीज के परिवारीजन भटकते रहते हैं, ऐसा क्यों?
जवाब-
अलग-अलग विभागों में करीब 70 स्ट्रेचर पर मरीज भर्ती हैं। उस पर उनका इलाज हो रहा है। बाकी पर मरीजों की जांच और उनकी शिफ्टिंग होती है। मरीजों को दिक्कत न हो, इसके लिए जल्द ही नई स्ट्रेचर मंगाई जाएंगी।

सवाल -स्ट्रेचर देने के आपके आदेश के बावजूद टूटा हुआ स्ट्रेचर थमा दिया गया। ऐसे में मरीज किसके पास मदद के लिए जाएं?
जवाब-
इस मामले में ऐसा हुआ है तो जांच कराई जाएगी। संबंधित कर्मचारी से भी जवाब मांगा जाएगा।

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