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यूपी में आचार संहिता लागू, अब ये नहीं कर पाएंगे राजनीतिक दल व प्रत्याशी

Thu, 05 Jan 2017 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 05 Jan 2017 02:27 AM IST
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code of conduct for political parties.
भारतीय निर्वाचन आयोग

चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम के एलान के साथ ही प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके अनुपालन के लिए राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को कई बातों का ध्यान रखना होगा। इसमें सत्ताधारी दल, मंत्रियों और नौकरशाहों के लिए भी व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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घोषणा पत्र भी आचार संहिता में शामिल
आदर्श आचार संहिता में इस बार राजनैतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्रों को भी शामिल कर लिया गया है। इसके तहत राजनीतिक दलों को यह भी बताना होगा कि घोषणा पत्र में किए जाने वाले वादों को पूरा करने के लिए वे वित्तीय व्यवस्था कैसे करेंगे।
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आचार संहिता के बिंदु इस प्रकार हैं-
- किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाए या घृणा की भावना उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे। नीतियों, कार्यक्रम, पूर्ववृत्त और कार्य तक ही आलोचना सीमित रहनी चाहिए।
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व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिए, जिनका संबंध अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रियाकलाप से न हो। आलोचना ऐसे आरोपों पर, जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो या तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों पर आधारित नहीं होनी चाहिए।

इन जगहों का प्रचार के लिए नहीं हो पाएगा इस्तेमाल

code of conduct for political parties.

- वोट प्राप्त करने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जानी चाहिए। मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों का प्रचार के मंच के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

- ऐसे सभी कार्यों से बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि के अधीन भ्रष्ट आचरण और अपराध है, जैसे मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को अभित्रस्त करना, मतदान केंद्र के 100 मीटर के भीतर वोट मांगना, मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय के 48 घंटे की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभाएं करना और मतदाताओं को सवारी से मतदान केंद्रों तक ले जाना और वहां से वापस लाना।

- दल या अभ्यर्थी को व्यक्तियों के विचारों या कार्यों का विरोध करने के लिए किसी भी हालत में उनके घरों के सामने धरना-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। झंडे टांगने, सूचनाएं चिपकाने, नारे लिखने के लिए किसी की भूमि, भवन, अहाते, दीवार आदि का उपयोग उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरों के दल व जुलूस में बाधा न डालें

code of conduct for political parties.
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) टी. वेंकटेश - फोटो : amar ujala

- दल और अभ्यर्थी यह सुनिश्चित करें कि उनके समर्थक दूसरों की सभाओं, जुलूसों आदि में बाधा न डालें। दूसरों की सभाओं में प्रश्न पूछकर या अपने परचे वितरित करके गड़बड़ी पैदा नहीं करनी चाहिए। जुलूस उन स्थानों से होकर नहीं ले जाना चाहिए, जिन स्थानों पर दूसरे दल की सभा हो रही हो। दूसरों के पोस्टर भी हटाए नहीं जाने चाहिए।

- प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को समय से सूचना दे देनी चाहिए, ताकि वे यातायात को नियंत्रित करने और शांति-व्यवस्था बनाए रखने के जरूरी इंतजाम कर सकें। पहले ही सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सभा के प्रस्तावित स्थान पर कोई प्रतिबंध तो लागू नहीं है।
 
- प्रस्तावित सभा के संबंध में लाउडस्पीकरों या किसी अन्य सुविधा की अनुमति के लिए संबद्ध प्राधिकारी के पास काफी पहले ही आवेदन करना चाहिए।

- सभा आयोजक सभा में विघ्न डालने वाले या अव्यवस्था फैलाने वाले व्यक्तियों से निपटने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस की सहायता लें। खुद कोई कार्रवाई न करें।

- जुलूस की शुरुआत और समापन का समय, स्थान और रास्तों का निर्धारण पहले ही कर लेना चाहिए। इसमें कोई फेरबदल नहीं करना चाहिए। जुलूस के रास्तों पर प्रतिबंध लागू हो तो सक्षम प्राधिकारी से छूट के बाद ही जुलूस निकाला जाए। यातायात नियमों का भी पालन करना चाहिए।

जुलूस से यातायात में न आए कोई रुकावट

code of conduct for political parties.

- जुलूस से यातायात में कोई रुकावट या बाधा नहीं आनी चाहिए। बहुत लंबे जुलूस को उपयुक्त लंबाई वाले टुकड़ों में संगठित किया जाना चाहिए, ताकि चौराहों आदि पर रुके हुए यातायात के लिए समय-समय पर रास्ता दिया जा सके। जुलूसों को जहां तक हो सके, सड़क की दाईं ओर रखा जाए।

- यदि दो या अधिक जुलूस लगभग एक ही समय और रास्ते या उसके हिस्से से निकालने का प्रस्ताव है तो आयोजकों को चाहिए कि वे समय से काफी पहले आपस में संपर्क कर ऐसी योजना बनाएं जिससे जुलूसों में टकराव न हो।

जुलूस में शामिल लोगों द्वारा ऐसी चीज लेकर चलने के विषय में जिनका अवांछित तत्वों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता हो, राजनीतिक दलों या अभ्यर्थियों को अधिक से अधिक नियंत्रण रखना चाहिए।

- किसी भी राजनीतिक दल या अभ्यर्थी को अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों या उनके नेताओं के पुतले लेकर चलने, उनको सार्वजनिक स्थानों पर जलाने और ऐसे अन्य प्रदर्शनों का समर्थन नहीं करना चाहिए।

मतदान के दिन प्रत्याशियों और उनके दलों के आचरण के बारे में आचार संहिता

code of conduct for political parties.
- मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से वोट डालने का मौका देने के लिए चुनाव ड्यूटी पर लगे अधिकारियों से सहयोग करें। अपने एजेंटों को उपयुक्त बिल्ले या पहचान पत्र दें। मतदान के दिन और उसके पूर्व के 24 घंटों के दौरान किसी को शराब पेश या वितरित न करें।

- प्रत्याशी मतदान केंद्रों के निकट लगाए गए कैंपों के नजदीक अनावश्यक भीड़ इकट्ठी न होने दें। कैंप पर पोस्टर, झंडे, प्रतीक या कोई अन्य प्रचार सामग्री प्रदर्शित न की जाए। कैंपों में खाद्य पदार्थ पेश न किए जाएं।

- मतदान के दिन चलाए जाने वाले वाहनों के लिए परमिट ले लें और वाहनों पर ऐसे लगा दें, जिससे वे साफ-साफ दिखें।

- मतदाताओं के अलावा कोई भी व्यक्ति निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए विधिमान्य पास के बिना मतदान केंद्रों में प्रवेश नहीं करेगा।

- यदि अभ्यर्थियों या उनके अभिकर्ताओं के कोई शिकायत या समस्या हो तो वे उसकी सूचना प्रेक्षक को दे सकते हैं।

सरकारी पद का न हो इस्तेमाल

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- सत्ताधारी दल चाहे वह केंद्र में हो या संबंधित राज्य या राज्यों में हो, यह शिकायत करने का मौका न दे कि उसने चुनावी हित के लिए सरकारी पद का इस्तेमाल किया है। विशेष रूप से मंत्रियों को अपने शासकीय दौरों को निर्वाचन से संबंधित प्रचार कार्य से नहीं जोड़ना चाहिए। चुनाव प्रचार में शासकीय मशीनरी या कार्मिकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। सरकारी विमानों, गाड़ियों, सरकारी मशीनरी और कार्मिकों का सत्ताधारी दल के हित को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा।

- सत्ताधारी दल को चाहिए कि वह सार्वजनिक स्थान जैसे मैदान इत्यादि पर निर्वाचन सभाएं करने और हेलीपैडों के इस्तेमाल के लिए अपना एकाधिकार न जमाए। इनका प्रयोग दूसरे दलों और अभ्यर्थियों को भी उन्हीं शर्तों पर करने दिया जाएगा, जिन शर्र्तों पर सत्ताधारी दल उनका प्रयोग करता है।

सत्ताधारी दल या उनके अभ्यर्थियों का विश्रामगृहों, डाक बंगलों या अन्य सरकारी आवासों पर एकाधिकार नहीं होगा। अन्य दलों और अभ्यर्थियों को भी इनका प्रयोग करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन कोई भी दल या अभ्यर्थी प्रचार कार्यालय के रूप में या निर्वाचन प्रोपेगंडा के लिए सार्वजनिक सभा के लिए इनका प्रयोग नहीं करेगा।

सरकारी खर्चे से न करें विज्ञापन

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- निर्वाचन अवधि के दौरान सरकारी खर्चे से समाचार-पत्रों में या अन्य माध्यमों से ऐसे विज्ञापन जारी करना तथा सरकारी जनमाध्यमों का दुरुपयोग बिल्कुल बंद रहना चाहिए, जिनमें सत्ताधारी दल के हितों को अग्रसर करने की दृष्टि से उनकी उपलब्धियां दिखाई गई हों।

- मंत्रियों और अन्य प्राधिकारियों को चुनाव की घोषणा के बाद से ही विवेकाधीन कोष से अनुदानों/अदायगियों की स्वीकृति नहीं देनी चाहिए। किसी भी रूप में कोई वित्तीय मंजूरी या वचन देने की घोषणा नहीं करनी चाहिए। परियोजनाओं-योजनाओं की आधारशिलाएं नहीं रखनी चाहिए। सड़कों के निर्माण या पेयजल की सुविधाएं देने का वचन नहीं देना चाहिए। शासन, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में कोई भी तदर्थ नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए।

- केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री, अभ्यर्थी या मतदाता अथवा प्राधिकृत अभिकर्ता की अपनी हैसियत छोड़कर किसी भी मतदान केंद्र या गणना स्थल में प्रवेश न करें।

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