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कोयले का संकट बरकरार : हरदुआगंज में एक और पारीक्षा में पौन दिन का कोयला बचा, एनटीपीसी में एक और यूनिट ठप

Sun, 10 Oct 2021 08:44 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 10 Oct 2021 08:44 PM IST
सार

ऊंचाहार (रायबरेली) में एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। कोयले की कमी से रविवार को एक और यूनिट को बंद कर दिया गया है। चार दिन पहले छह नंबर यूनिट को बंद किया गया था। अब तक दो यूनिटें बंद हो चुकी हैं।

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Coal crisis continues in power plants: Half a day's coal left in another exam in Harduaganj, another unit stalled in NTPC
कोयला

विस्तार

प्रदेश में भारी बिजली संकट अभी बरकरार है। मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने की वजह से गांवों, तहसील मुख्यालयों के साथ साथ अब शहरों में भी बिजली कटौती शुरू हो गई है। स्थिति यह है कि हरदुआगंज में मात्र एक दिन का और पारीक्षा विद्युत संयंत्र में एक दिन से भी कम का कोयला शेष बचा है। यदि कल तक  कोयले की आपूर्ति नहीं हो पाई तो ये दोनों संयंत्र भी बंद हो सकते हैं।

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पूरा प्रदेश इस समय बिजलीघरों में कोयले के घटते भंडार के कारण हो रही बिजली कटौती से जूझ रहा है। आलम यह है कि अब नगर मुख्यालयों में डेढ़ से चार घंटे की कटौती शुरू हो गई है। हालांकि अघोषित रूप से कटौती की जा रही थी पर अब हालात और विकट हो गए हैं। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अधिकारियों का कहना है कि हरदुआगंज व पारीछा में कोयले का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया है।  हरदुआगंज में 8000, पारीछा में 15000, अनपरा  में 40,000 तथा ओबरा में 16000 मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता है। स्थिति यह है कि हरदुआगंज में मात्र एक दिन और पारीक्षा में एक दिन से भी कम, लगभग पौन दिन का कोयला शेष रह गया है। अनपरा में दो दिन और ओबरा में ढाई दिन का कोयला शेष बचा है। बताया यह जा रहा है कि हरदुआगंज और ओबरा में तो चार चार रैकों की व्यवस्था की जा रही लेकिन अनपरा और ओबरा में इस तरह कोई इंतजाम अभी नहीं किया जा रहा है।
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एनटीपीसी में कोयले का संकट, एक और यूनिट ठप
ऊंचाहार (रायबरेली) में एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। कोयले की कमी से रविवार को एक और यूनिट को बंद कर दिया गया है। चार दिन पहले छह नंबर यूनिट को बंद किया गया था। अब तक दो यूनिटें बंद हो चुकी हैं। यही हाल रहा तो बाकी यूनिटों पर असर पड़ सकता है। यूनिटें पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। हालांकि प्रबंधन दो नंबर यूनिट को मरम्मत के लिए बंद करने का दावा कर रहा है।
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एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार में पांच यूनिटें 210 मेगावाट, जबकि छह नंबर यूनिट 500 मेगावाट बिजली उत्पादन करती है। पिछले माह से मांग के सापेक्ष कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से गुरुवार को परियोजना की सबसे ज्यादा 500 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली यूनिट नंबर छह को बंद कर दिया गया था। परियोजना की 210 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली यूनिट नंबर शनिवार की रात 12 बजे बंद कर दी गई। कोयले की आपूर्ति न होने से परियोजना की सभी यूनिटों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। यदि ऐसा होता है तो आपूर्ति वाले राज्यों में बिजली का संकट और गहरा जाएगा।


 

गांवों के बाद अब शहरों तक पहुंच गया संकट

गांवों को पहले ही 18 घंटे के बजाय करीब 11 घंटे, तहसीलों को 21.30 घंटे के बजाय करीब 17 घंटे और बुंदेलखंड को 20 घंटे के बजाय करीब 14 घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। अब शहरों में घोषित तौर पर कटौती शुरू हो गई है। डेढ़ से साढ़े चार घंटे तक की कटौती शहरों में शुरू हो गई है। कहीं कहीं अघोषित तौर पर इससे ज्यादा कटौती की जा रही है।

खदानों से ही पर्याप्त निकासी नहीं
अत्यधिक वर्षा के कारण कोल खदानों से कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई।, इससे तापीय परियोजनाओं का कोल भंडार तो कम हो ही गया साथ ही खदानों से कोयले की पर्याप्त निकासी नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर उमस और त्योहारी सीजन के कारण बिजली की मांग भी बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की कोल रिपोर्ट के अनुसार भारत में स्थापित 16 पिट हेड (कोयला खदान के  मुहाने पर) की तापीय परियोजनाओं में से 9 के पास चार दिनों से कम का कोल भंडार है एवं 109 नान पिट हेड (1500 किमी से कम की दूरी पर स्थापित) तापीय परियेाजनाओं में से 23 के पास छह दिनों से कम तथा 69 तापीय परियोजनाओं के पास तीन दिन से कम का कोल भंडार बचा है।

पाॅवर कारपोरेशन अध्यक्ष की अपील, सहयोग करें कर्मचारी संगठन
उत्तर प्रदेश पाॅवर कॉरपोरेशन अध्यक्ष एम. देवराज ने आंदोलनरत अभियंताओं, अवर अभियंताओं एवं अन्य कर्मचारी संगठनों  से अपील की है कि वे आंदोलन समाप्त करें। कोयले की समस्या एक नई चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। इस समय प्रमुख त्योहारों का सीजन भी है।  ऐसे में प्रदेश, विद्युत उपभोक्ता एवं विभागीय हित में आंदोलन समाप्त कर वार्ता के माध्यम से समस्याओं का हल निकालने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी आदि कारणों से कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति प्रभावित है। कारपोरेशन का घाटा 90 हजार करोड रुपये तक पहुंच गया है।  ऐसी परिस्थितियों में कॅारपोरेशन कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाकर अतिरिक्त आर्थिक बोझ को सहने की स्थिति में नहीं है। आंदोलन से कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति और विद्युत आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकते हैं । यह प्रदेश, विद्युत उपभोक्ता और कॉरपोरेशन के लिए हितकर नहीं है।

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