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कोऑपरेटिव बैंक की भर्ती निरस्त, 50 सहायक प्रबंधक बर्खास्त, बस एक माह का मिलेगा वेतन
Fri, 31 May 2019 08:51 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 31 May 2019 08:51 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : गूगल
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यूपी कोऑपरेटिव बैंक (यूपीसीबी) प्रबंध समिति ने 50 सहायक प्रबंधकों की बर्खास्त कर दिया है। बृहस्पतिवार को यूपीपीसीबी प्रबंध समिति की बैठक में इस पर मुहर लगा दी। सभी को एक माह का वेतन देकर नौकरी से हटा दिया जाएगा।
ये सभी भर्तियां समाजवादी पार्टी की सरकार केदौरान हुई थी। अरोप लगा था कि चयनित सभी सहायक प्रबंधक अफसरों और नेताओं के करीबी थे। इनके लिए भर्ती के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता में भी फेरबदल किया गया था
यूपी कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष तेजवीर सिंह की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई प्रबंध समिति की बैठक में 2015 में हुई भर्तियों को निरस्त करते हुए सभी सहायक प्रबंधक को बर्खास्त करने का फैसला किया गया।
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यूपीसीबी इम्पलाइज एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री जय सिंह ने इन भर्तियों में हुई गड़बड़ी की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि भर्ती के दौरान नियम-कानून को ताक पर रख रसूखदारों के परिवार के सदस्यों को नौकरियां बांटी गई।
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ये सभी भर्तियां समाजवादी पार्टी की सरकार केदौरान हुई थी। अरोप लगा था कि चयनित सभी सहायक प्रबंधक अफसरों और नेताओं के करीबी थे। इनके लिए भर्ती के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता में भी फेरबदल किया गया था
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यूपी कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष तेजवीर सिंह की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई प्रबंध समिति की बैठक में 2015 में हुई भर्तियों को निरस्त करते हुए सभी सहायक प्रबंधक को बर्खास्त करने का फैसला किया गया।
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यूपीसीबी इम्पलाइज एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री जय सिंह ने इन भर्तियों में हुई गड़बड़ी की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि भर्ती के दौरान नियम-कानून को ताक पर रख रसूखदारों के परिवार के सदस्यों को नौकरियां बांटी गई।
इसके बाद सीएम योगी आदित्य नाथ ने अप्रैल 2018 में भर्ती प्रक्रिया की एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार ने आईएएस अधिकारी पीके उपाध्याय से इस मामले की जांच कराई। जिसमें सभी शिकायतें सही पाई गई।
इसके बाद भर्ती घोटाले और अन्य अनियमितताओं के आरोप में यूपीसीबी के तत्कालीन एमडी को निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में जांच के बाद सरकार ने विधिक राय ली।
इसके बाद बृहस्पतिवार को हुई प्रबंध समिति की बैठक में सहायक प्रबंधकों को बर्खास्त करने का फैसला किया गया। यूपीसीबी के उपाध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि नियुक्तियां निरस्त कर दी गई हैं।
कुल 53 पदों के लिए भर्ती हुई थी। जिसमें से सहायक प्रबंधक कम्प्यूटर के दो पदों की नियुक्तियां सही पाई गई। जबकि एक अभ्यर्थी ने चयन के बाद नियुक्ति नहीं ली थी।
इसके बाद भर्ती घोटाले और अन्य अनियमितताओं के आरोप में यूपीसीबी के तत्कालीन एमडी को निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में जांच के बाद सरकार ने विधिक राय ली।
इसके बाद बृहस्पतिवार को हुई प्रबंध समिति की बैठक में सहायक प्रबंधकों को बर्खास्त करने का फैसला किया गया। यूपीसीबी के उपाध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि नियुक्तियां निरस्त कर दी गई हैं।
कुल 53 पदों के लिए भर्ती हुई थी। जिसमें से सहायक प्रबंधक कम्प्यूटर के दो पदों की नियुक्तियां सही पाई गई। जबकि एक अभ्यर्थी ने चयन के बाद नियुक्ति नहीं ली थी।