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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Cmap to clean Varanasi.

खत्म होगी काशी में मोदी की बड़ी दिक्कत

Sat, 30 Aug 2014 11:04 AM IST
पुनीत कुमार गुप्ता/अमर उजाला, लखनऊ
पुनीत कुमार गुप्ता/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 30 Aug 2014 11:04 AM IST
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Cmap to clean Varanasi.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी के शिवालयों में चढ़ने वाले बेलपत्र को वैज्ञानिक विधि से निस्तारित किया जाएगा। श्रद्धा के इन अवशेषों को कूड़े में फेंके जाने की जगह उनसे अगरबत्ती या दूसरे उपयोगी पदार्थ बनाए जाने का काम सीमैप करेगा।

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बेलपत्र के वृहद उपयोग की तलाश का काम अब लखनऊ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स (सीमैप) के वैज्ञानिक कर रहे हैं।

सीमैप के निदेशक और पूर्व में बीएचयू में बायोटेक्नोलॉजी में वैज्ञानिक रहे प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बनारस के शिवालयों की समस्या वहां अधिक मात्रा में चढ़ने वाले बेलपत्र हैं।

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इन जगहों पर किया जा रहा काम

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उन्होंने कहा कि बेलपत्र का वैज्ञानिक समाधान सीमैप के वैज्ञानिक तलाश रहे हैं। वैज्ञानिक देख रहे हैं कि बेलपत्र के गुणों के अनुसार उसका क्या उपयोग हो सकता है। हमारा अनुमान है कि हर दिन क्विंटल्स में बेलपत्र शिवालयों से मिलेगा।

फूलों से गुलाबजल और अगरबत्ती बनाने की तकनीक विकसित करने के बाद अब बारी बेलपत्र की है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि बेलपत्र से भी इसी तरह के बाइ-प्रोडक्ट बनाने के अलावा चिकित्सकीय उपयोग को भी आंका जाएगा।

सीमैप इससे पहले अजमेर शरीफ में चढ़ने वाले फूलों से गुलाबजल और अगरबत्ती बनाने का काम कर चुका है। शिरडी साईं मंदिर में भी इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर प्रयास चल रहे हैं।

लखनऊ के भी चंद्रिका देवी मंदिर में चढ़ावे में आने वाले फूलों से अगरबत्ती और गुलाबजल बनाया जाता है। यहां महिलाओं का स्वयं सहायता समूह इस काम को करता है।

उत्तराखंड सरकार से सीमैप ने मिलाया हाथ

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निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि 26 अगस्त को उत्तराखंड सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ एक बैठक हुई। इसमें सीमैप के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह की मौजूदगी में लेमन घास के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।

इसके अलावा उत्तराखंड में औषधीय पौधों के उत्पादन की संभावना को तलाशने का काम किया जाएगा। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सुगंधित पौधों के उत्पादन में दिलचस्पी दिखाई। हालांकि हमने उन्हें उत्तराखंड की विशेषता को देखते हुए औषधीय पौधों के उत्पादन की सलाह दी है।

उत्तराखंड सरकार को सीमैप तकनीक उपलब्ध कराएगा। वहीं उनकी संस्था सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट्स (कैप) स्थानीय लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने का काम करेगी। यह काम जोशीमठ, मुंशियारी, ग्वालदाम और गढ़वाल में होगा।

डॉ. सिंह ने बताया कि तबाही के बाद स्थानीय सरकार और लोगों की मदद के लिए एक छोटा प्रयास सीमैप की तरफ से है।

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