दिल्ली उपचुनाव जैसा न हो हाल, यूपी उपचुनाव में बदली BJP की रणनीति
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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दोनों उपमुख्यमंत्री और दो मंत्री विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने बुधवार को सीएम योगी, दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा और परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रजा को विधानपरिषद उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया है।
गौरतलब है कि सीएम योगी ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। हालांकि नेतृत्व ने योगी और मौर्य के इस्तीफे से खाली होने वाली गोरखपुर और फुलपुर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में सारी ताकत झोंकने के लिए सभी को विधान परिषद का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि राज्य में दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार उतारने की संभावना बरकरार है। ऐसे में पार्टी चाहती है कि इन दोनों ही सीटों पर बड़ी जीत हासिल कर यह संदेश देने की कोशिश की जाए कि राज्य में एकजुट विपक्ष भी भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकता।
ऐसा करने के लिए इन दोनों सीटों पर ध्यान केंद्रित के लिए जरूरी था कि पार्टी विधानसभा उपचुनाव की सिरदर्दी नहीं ले। यही कारण है कि सीएम योगी की इच्छा के बावजूद उन्हें विधानपरिषद उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया गया।
मजबूत हुई बालियान की यूपी अध्यक्ष की दावेदारी
उपचुनाव 18 सितंबर को है। जबकि योगी और मौर्य के छह महीने की इस्तीफे की सीमा 19 सितंबर को खत्म हो रही है। ऐसे में योगी और मौर्य 19 सिंतबर को ही लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। गौरतलब है कि विधानपरिषद उपचुनाव में उम्मीदवार बनाए गए शर्मा, स्वतंत्र देव और मोहसिन रजा इस समय किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। जबकि योगी और मौर्य अभी भी लोकसभा के सदस्य हैं।
उत्तर प्रदेश में संगठन की कमान दिए जाने के संदर्भ में जिन नामों की चर्चा थी उनमें स्वतंत्र देव सिंह भी शामिल थे। नेतृत्व इस बार पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसी नेता को संगठन की कमान देना चाहता है।
दावेदारों में जल संसाधन राज्य मंत्री संजीव बालियान का भी नाम है। नेतृत्व ने अब तक कई बार बालियान को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिला कर राज्य संगठन की कमान देने पर चर्चा की है। नेतृत्व की इच्छा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एक मजबूत जाट नेता खड़ा करने की है। दरअसल हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में जाट बिरादरी की संख्या चुनावी दृष्टि से निर्णायक है।
पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में यकीन रखने वाले मुख्यमंत्री योगी को पितृपक्ष में ही शपथ लेनी होगी। पितृपक्ष 6 और 20 अगस्त तक है। जबकि योगी और मौर्य केइस्तीफेकी सीमा 19 को ही खत्म हो रही है।
लिहाजा उन्हें 19 को लोकसभा से इस्तीफा देकर विधान परिषद की शपथ लेनी होगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश से पहले भी उन्होंने बड़े पैमाने पर पूजा पाठ करवाया था और परिसर का शुद्दीकरण करवाया गया था।