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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   CM Yogi said: No king of India can be a heretic, by building the Ram temple we have erased a stigma.

सीएम योगी बोले: भारत का राजा कोई विधर्मी नहीं हो सकता, राम मंदिर बनाकर हमने मिटाया है एक कलंक

Tue, 07 Apr 2026 09:33 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 07 Apr 2026 09:33 PM IST
सार

Yogi Adityanath: सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का राजा कोई विधर्मी व्यक्ति नहीं हो सकता। राम मंदिर बनाकर हमने 500 वर्षों का कलंक मिटाया है। 

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CM Yogi said: No king of India can be a heretic, by building the Ram temple we have erased a stigma.
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत तुलसीदास को भी उस समय के शासक अकबर ने लोभ और लालच देने का बहुत प्रयास किया लेकिन तुलसीदास ने एक ही बात कही थी कि बादशाह कौन होता है मैं नहीं जानता। भारत के राजा तो प्रभु राम हैं। इससे स्पष्ट है कि भारत का राजा कोई विधर्मी नहीं हो सकता। भारत के एक ही सनातन राजा भगवान श्रीराम हैं। सीएम मंगलवार को वृंदावन स्थित मलूकपीठ में संत मलूकदास की 452वीं जयंती के अवसर पर बोल रहे थे।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जब संत एक मंच पर आते और बोलते हैं तो 500 वर्ष का अयोध्या का कलंक भी मिटकर भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करता है। संत मलूकदास महाराज ने अपने जीवन काल में चार मुगल बादशाह अकबर, जहांगीर, शाहजहां एवं औरंगजेब का भी कालखंड देखा। उस समय की क्रूरता को भी देखा। भारत के संतों की यह दिव्य परंपरा है। वह कभी भी किसी भी विधर्मी के सामने अपने मूल्यों और आदर्शों से विचलित नहीं हुए। उसी पर आज का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक भारत आधारित है।
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उन्होंने तंज कसा, कहते हैं कि तुलसीदासजी एक गरीब ब्राह्मण थे पर भला उनसे बड़ा धनी कौन था जो सबसे बड़े बादशाह के प्रस्ताव को भी ठुकराकर कहते हों कि वह एक ही राजा को जानते हैं, वह भारत के सनातन राजा श्रीराम हैं। उन्होंने भारत में रामलीला के माध्यम से जन चेतना को जागृत किया। रामलीला के माध्यम से आराध्य की लीला को हर कोई जानता है, क्योंकि यह कथा भारत की कथा है। कथाओं के माध्यम से धर्मावलंबी अपने जीवन में अंगीकार कर मार्ग प्रशस्त करता है।
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उत्तर भारत में रामलीला के माध्यम से भक्तजन प्रभु राम के साथ तारतम्य स्थापित करते हैं। रामलीला के मंच पर जाति, संप्रदाय का कोई भेद नहीं होता है। श्रीरामानंदाचार्य की परंपरा को 22वीं पीढ़ी में संत मलूक दास महाराज ने आगे बढ़ाया। आज से 452 वर्ष पहले भारत का मध्यकाल विदेशी आक्रांताओं की बर्बरता, सनातन धर्म के ऊपर छा रहे अंधकार से ग्रसित था। तब प्रयागराज की धरती पर कड़ा धाम में एक दिव्य ज्योति पुंज के रूप में संत मलूक दास महाराज आए। उन्होंने भक्ति की धारा को लेकर जन चेतना को जागृत करते हुए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को प्रतिस्थापित किया। कहा कि प्रयागराज पावन तीर्थ स्थल ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा अध्यात्म और संस्कृति का केंद्र है, जिसे महाकुंभ के अवसर पर दुनिया ने जन सैलाब के रूप में देखा है। प्रयागराज की धरती का यह सौभाग्य है कि जगदगुरु रामानंदाचार्य की भी जन्मभूमि है।

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