गोवंश संरक्षण के लिए आबकारी पर दो व टोल पर लगेगा .5 फीसदी सेस, यूपी कैबिनेट ने लिया फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोवंश संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार आबकारी पर 2 फीसदी और टोल टैक्स पर आधा फीसदी उपकर लगाएगी। फायदे वाली एजेंसियों व प्राधिकरणों से भी .5 फीसदी वसूला जाएगा। इस पैसे से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पालिका, नगर पंचायत व नगर निगमों में एक-एक हजार की क्षमता वाले अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना एवं संचालन नीति को मंजूरी दे दी। प्रदेश में निराश्रित गोवंश से होने वाले नुकसान को लेकर किसानों में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए फैसला अहम है। हाल ही में अस्पतालों-स्कूलों में निराश्रित गोवंश को बंद किए जाने की घटनाएं सामने आई थीं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सरकार बेसहारा गोवंश की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने प्रभावी नीति बनाई है। इसमें आठ विभाग संयुक्त रूप से काम करेंगे। पशुपालन विभाग इस कार्य के लिए नोडल विभाग होगा। गोवंश आश्रय स्थलों की स्थापना व संचालन के लिए वित्तीय व्यवस्था भी तय हो गई है। आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश को पशुपालन विभाग से आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी। वहां से उत्पादित दूध, गोबर, कंपोस्ट की विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाया जाएगा।
इस तरह होगी पैसे की व्यवस्था
- मंडी परिषद अभी मंडी शुल्क (सेस) से प्राप्त होने वाली आय का एक प्रतिशत गोवंश के भरण-पोषण के लिए देते हैं। अब उसे इसके लिए दो फीसदी देना होगा।
- आबकारी पर अतिरिक्त दो प्रतिशत गौ कल्याण सेस लगेगा।
- फायदे वाली निर्माण एजेंसियों व प्राधिकरणों को अपने फायदे में से 0.5 प्रतिशत देना होगा। इनमें राजकीय निर्माण निगम, सेतु निगम, यूपीएसआईडीसी आदि शामिल हैं।
- टोल टैक्स में 0.5 फीसदी गो कल्याण सेस के रूप में अलग से वसूला जाएगा।
सड़क, सार्वजनिक या आम आदमी की जमीन पर पशु छोड़ने पर पुलिस, जिला व नगरीय प्रशासन आर्थिक दंड लगा सकेगा।
दूसरा फैसला: ड्यूटी के दौरान घायल पुलिस कर्मियों काें 20 लाख तक की मदद
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि ड्यूटी के समय प्रदेश या बाहर हुई आतंकवादी घटना, अराजक तत्वों की गतिविधियों में हुई हिंसा, मुठभेड़ व अग्निशमन सेवा के कर्मियों के राहत एवं बचाव कार्य के दौरान अपंग या दिव्यांग होने पर यह अनुग्रह राशि दी जाएगी। अभी तक इसके लिए कोई नीति नहीं थी। उन्होंने बताया कि यह राशि तीन शर्तों पर दी जाएगी।
पहला- घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज हो, दूसरा अपंग या दिव्यांग होने के संबंध में चिकित्सा अधिकारी से निर्गत प्रमाणपत्र जिसमें दिव्यांगता का प्रतिशत स्पष्ट रूप से हो। इसके अलावा ड्यूटी के दौरान अपंग होने की स्थिति में अगर रिटायर किया जाता है तो भी संबंधित को धनराशि देय होगी। इसके लिए निर्धारित सीमाओं में विशेष परिस्थितियों में आवश्यकतानुसार छूट दी जा सकती है। इसके लिए शासन से अनुमति लेनी जरूरी होगी।
तीसरा फैसला: सभी जिलों में होगी मोटर दुर्घटना प्रतिकर अधिकरण की स्थापना
वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में पीड़ित पक्ष को मुआवजा दिए जाने के मामलों की सुनवाई में हो रही देरी के संबंध में कुछ लोगों द्वारा हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण की अलग से व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था।
इसी क्रम में परिवहन विभाग ने ‘मोटर व्हीकल एक्ट-1988’ की धारा-165 के अंतर्गत दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित विवादों का त्वरित निस्तारण जिला स्तर पर करने का फैसला किया है। इसी कड़ी में विभाग की ओर से यह प्रस्ताव तैयार किया गया है कि सभी जिलों में ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए विशेष तौर पर मोटर दुर्घटना प्रतिकर अधिकरण स्थापित किया जाए।
चौथा फैसला: विजिलेंस के 10 सेक्टर को अब थाने का दर्जा
शासन ने विजिलेंस के सभी 10 सेक्टर को थाने का दर्जा दे दिया है। अब विजिलेंस को भ्रष्टाचार से संबंधित मुकदमे जिलों के थानों में दर्ज नहीं कराना पड़ेगा। मंगलवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण व उन्मूलन के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इसके तहत सभी सेक्टर व इकाइयों के पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों को थाना घोषित किया गया है।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि कई बार किसी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होने पर गोपनीयता भंग होने की आशंका रहती है। गोपनीयता भंग न हो इसलिए यह व्यवस्था की गई है। विजिलेंस का अपना थाना होने से साक्ष्य संकलन, थाने के दस्तावेज लेने जैसे कार्यों में तेजी आएगी। इसके लिए कोई भी अतिरिक्त भार सरकार पर नहीं आएगा और न ही अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले आर्थिक अपराध शाखा के भी चार थाने खोलने की मंजूरी दी जा चुकी है।
पांचवा फैसला: अब 15 वर्ष के कार्य अनुभव वाले बन सकेंगे यूपीआईडी के निदेशक या सचिव
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) के निदेशक/सचिव पद पर भर्ती के लिए निर्धारित अर्हता में संशोधन के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके तहत इन पदों पर नियुक्ति के लिए किसी विश्वविद्यालय या संस्थान से डिजाइन, शिल्प या कला क्षेत्र में 20 वर्ष के कार्य अनुभव को संशोधित करके 15 वर्ष निर्धारित किया गया है। इसी तरह से विज्ञापन की तारीख को आवेदक की अधिकतम आयु 57 वर्ष के नियम को भी संशोधित कर 55 वर्ष किया गया है।
पूर्ववर्ती चयन समिति कोे यथावत बनाए रखते हुए चयन समिति में महानिदेशक, निफ्ट, नई दिल्ली या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि को भी विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नामित किया गया है। यह नामित सदस्य प्रोफेसर स्तर से कम स्तर का नहीं होगा।
यहां बता दें कि यूपीआईडी के निदेशक/सचिव के एक पद पर सीधी भर्ती के माध्यम से चयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने 10 मार्च 2017 को साक्षात्कार आयोजित किया था। इसमें वांछित अनुभव के केवल एक अभ्यर्थी के उपस्थित होने के कारण समिति ने इस साक्षात्कार को निरस्त करते हुए नियमों में संशोधन का फैसला किया है।