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सही साबित हुई सीएम योगी की आशंका, मंत्रियों को पहले ही दी थी चेतावनी
Fri, 28 Dec 2018 01:05 AM IST
MANISH sachan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: MANISH sachan
Updated Fri, 28 Dec 2018 01:05 AM IST
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सीएम योगी
- फोटो : डेमो
तीन निजी सचिवों के स्टिंग ऑपरेशन से मंत्रियों के दफ्तरों में उनके स्टाफ के कारनामों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आशंका सही साबित हुई है। मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के तुरंत बाद ही मंत्रियों को इससे आगाह कर दिया था। बीच-बीच में वह मंत्रियों को चेताते रहे कि स्टाफ में परिचितों, रिश्तेदारों व दागियों से दूरी बनाकर रखें। निजी सचिवों की गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने तो सिफारिशी पत्र लिखने और सिफारिश के लिए टेलीफोन करने में भी एहतियात बरतने की सलाह दी थी।
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मार्च 2017 में मुख्यमंत्री पद संभालने के तुंरत बाद ही योगी आादित्यनाथ ने मंत्रियों के निजी सचिवों व अन्य स्टाफ को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। कहा था कि अपने संबंधियों, परिचितों व खराब छवि के लोगों को स्टाफ में रखने से परहेज बरतें। उन्हें फीडबैक मिल रहा था कि कुछ मंत्रियों के दफ्तरों में गलत लोग बैठे हैं, इसलिए उन्होंने बार-बार मंत्रियों को सचेत किया। मुख्यमंत्री कार्यालय की दखल पर कुछ मंत्रियों के निजी सचिव बदले भी गए।
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करीब महीना भर पहले मुख्यमंत्री ने लोकभवन में राज्यमंत्रियों व स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर सिफारिश करने, पत्र लिखने और टेलीफोन करने तक में खास एहतियात बरतने के निर्देश दिए थे। कहा कि टेलीफोन पर कच्ची-पक्की बात न करें। उन्होंने इशारों ही इशारों में समझा दिया था कि किस तरह कुछ मंत्रियों के दफ्तरों से उनकी मंशा के अनुरूप काम नहीं होने की शिकायतें आ रही हैं।
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यदि मंत्रियों ने उनकी सलाह मानी होती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। कई मंत्रियों के निजी सचिव बेअंदाज हो गए। मंत्री उन पर अंकुश नहीं लगा पाए। उनके पद व प्रतिष्ठा का दुरुपयोग किया जाने लगा। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की डीलिंग करते हुए निजी सचिवों का कैमरों में कैद होना दर्शाता है कि मंत्रियों ने सीएम योगी की हिदायतों व सलाहों को गंभीरता से नहीं लिया।