लेखनी को खेमे व क्षेत्रीयता में बांधने से भ्रमित होता है समाजः योगी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। सामयिक रचना के अनुसार ही समाज को दिशा मिलती है। जब लेखनी को खेमे, क्षेत्रीयता या जातीयता में बांधने का प्रयास करते हैं तो इससे न केवल साहित्य साधना भंग होती है, बल्कि समाज और राष्ट्र की अपूरणीय क्षति भी होती है।
इससे समाज भ्रमित होता है और भ्रमित समाज कभी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री सोमवार को हिंदी संस्थान के 43वें स्थापना दिवस पर आयोजित पुरस्कार वितरण एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर पटना की डॉ. उषा किरण खान को भारत-भारती सम्मान से नवाजा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का मार्गदर्शक होता है। साहित्य का अर्थ ही है, जिसमें सबका हित हो। साहित्य के माध्यम से ही हम किसी समाज, राष्ट्र व संस्कृति को संबल प्रदान कर सकते हैं। साहित्यकार को समाज की ज्वलंत समस्याओं को रचनात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें व्यापक लोक कल्याण और राष्ट्र कल्याण का भाव निहित हो।
साहित्य साधना अमूल्य है। यह किसी पुरस्कार की मोहताज नहीं है। जब साहित्यिक मंच इस साधना को महत्व देता है तो इससे उनका गौरव बढ़ता है। इस क्षेत्र में कार्य करने वालों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले लेखकों से अपील की कि उन्हें अपनी लेखनी से समाज की ज्वलंत व सामयिक समस्याओं को रचनात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा साहित्य रचें जिससे समाज को नई दिशा और प्रेरणा मिले। समारोह में जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
टंडन, अटल व मोदी जी ने हिंदी को दी नई ऊंचाई
चाहते हैं, देश को जोड़ने का पुल बने हिंदी
मुख्यमंत्री ने कहा, हिंदी भाषा भारत को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा है। हमारा मकसद राजभाषा हिंदी को वैविधतापूर्ण भारत की एकता का सेतु बनाना है। इसलिए यहां हम देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का सम्मान कर रहे हैं।
जो समाज अपनी विभूतियों को संरक्षित व संवर्धित करता है, वही आगे बढ़ता है। उन्होंने यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में हिंदी साहित्य में अच्छा स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के निर्णय की सराहना की।
डॉ. मनोज सिंह ने विशेष उत्तरीय से किया सीएम का सम्मान
कला भूषण सम्मान पाने वाले चर्चित कलाकार और डीडीयू गोरखपुर विवि फाइन आर्ट-म्यूजिक के पूर्व एचओडी रहे डॉ. मनोज सिंह ने सीएम योगी का सम्मान विशेष उत्तरीय से किया। इस उत्तरीय में एक ओर सीएम के गुरु महंत अवेद्यनाथ और दूसरी ओर गुरु गोरखनाथ अंकित हैं।
लखनऊ के डॉ. ओम प्रकाश पांडेय को मिला पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान
मुख्यमंत्री ने पटियाला के डॉ. मनमोहन सहगल को लोहिया साहित्य सम्मान, वाराणसी के डॉ. बदरी नाथ कपूर को हिंदी गौरव सम्मान, भागलपुर के भगवान सिंह को महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, लखनऊ के डॉ. ओम प्रकाश पांडेय को पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, दिल्ली की डॉ. (श्रीमती) कमल कुमार को अवंतीबाई साहित्य सम्मान’, इंफाल के मणिपुर हिंदी परिषद इंफाल के महासचिव डॉ. अरिबम्ब ब्रज कुमार शर्मा को राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन सम्मान, मारीशस डॉ. उदय नारायण गंगू को प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान तथा श्रीलंका की डॉ. बंडार मेणिके विजेतुंग को हिंदी विदेश प्रसार सम्मान से सम्मानित किया।
हिंदी गौरव सम्मान से सम्मानित डॉ. बदरी नाथ कपूर अस्वस्थ होने के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके। मुख्यमंत्री ने पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान से नवाजे गए डॉ. ओम प्रकाश पांडेय की पुस्तक ‘सांस्कृतिक विचार की अविराम भारतीय यात्रा’ का विमोचन किया। इन्हें 4-4 लाख रुपये, गंगा प्रतिमा, अंगवस्त्र और ताम्रपत्र दिया गया।
लोकभूषण सम्मान पटना की डॉ. शांति जैन, कलाभूषण सम्मान गाजियाबाद के मनोज कुमार सिंह, विज्ञानभूषण मप्र के डॉ. प्रेमचंद्र स्वर्णकार, पत्रकारिता भूषण सम्मान लखनऊ के डॉ. रमेश चंद्र त्रिपाठी को दिया गया। बाल साहित्य भारती सम्मान भीलवाड़ा के डॉ. भैरूलाल गर्ग, लखनऊ के सूर्यकुमार पांडेय, संजीव जायसवाल संजय और मधु लिमये साहित्य सम्मान गोरखपुर के डॉ. वेदप्रकाश पांडेय, पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान गोरखपुर के रणविजय सिंह, विद्याभूषण सम्मान नोएडा के डॉ. जगमोहन सिंह राजपूत और विधि भूषण सम्मान दिल्ली के ब्रजकिशोर शर्मा को दिया गया। इन्हें दो-दो लाख रुपये व ताम्रपत्र दिए गए। एक लाख रुपये का मदन मोहन मालवीय विवि स्तरीय सम्मान लखनऊ के संस्कृत विद्वान डॉ. विजय कर्ण व डॉ. रश्मि कुमार को दिया गया।
20 विभूतियों को साहित्य भूषण
बाल साहित्य सृजन करने वालों का भी सम्मान
लखनऊ की सुषमा श्रीवास्तव को सुभद्रा कुमारी चौहान बाल साहित्य सम्मान और सुशील कुमार सिंह को डॉ. रामकुमार वर्मा को बाल नाटक सम्मान दिया गया। खीरी के रामकुमार गुप्त को सेाहनलाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान, मुरादाबाद के डॉ. राकेश चक्र को अमृतलाल नागर बाल कथा सम्मान, कानपुर के सुखवंत कलसी को शिक्षार्थी बाल चित्रकला सम्मान, दिल्ली की डॉ. क्षमा शर्मा को लल्ली प्रसाद पांडेय बाल साहित्य पत्रकारिता सम्मान, संभल के डॉ. उमेशचंद्र सिरसवारी को कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान, मथुरा के संतोष कुमार सिंह को जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखन सम्मान और गाजीपुर के अखिलेंद्र तिवारी को उमाकांत मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान दिया गया। इन्हें 51 हजार रुपये और प्रमाण पत्र दिए गए।
इन्हें मिले नामित और सर्जना पुरस्कार
वर्ष 2018 में प्रकाशित 35 पुस्तकों के लिए उनके लेखकों को 75-75 हजार रुपये दिए गए। इनमें लखनऊ की प्रो. शीला मिश्र व डॉ. अनिल मिश्र, लखनऊ के राकेश तिवारी, डॉ. ओमप्रकाश दुबे प्रकाश, सुनीता सिंह, अरविंद कुमार सिंह, डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. सुभाषचंद्र गुरुदेव, डॉ. ऊषा बनर्जी, आनंद प्रकाश और डॉ. मंजू शुक्ल शामिल रहीं। वर्ष 2018 में प्रकाशित 30 पुस्तकों के लिए 40-40 हजार रुपये का सर्जना पुरस्कार दिया गया। इनमें लखनऊ के रवींद्र नाथ तिवारी, उषा सिसोदिया, इंद्रजीत कौर, डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव, तरुण निशांत, रामसागर शुक्ल शामिल रहे। हाल ही दिवंगत आचार्य पं. उमाशंकर मिश्र रसेंदु के प्रतिनिधियों ने पुरस्कार ग्रहण किये, जबकि कुछ सम्मानित नहीं पहुंच सके। 25 हजार रुपये का हरिवंश राय बच्चन युवा गीतकार सम्मान गाजीपुर की रश्मि शाक्य को दिया गया।
डॉ. शशि तिवारी को मिला 130 वां सम्मान
साहित्य भूषण सम्मान पाने वाली आगरा की साहित्य-संगीत लेखिका डॉ. शशि तिवारी का यह 130 वां पुरस्कार है। इससे पूर्व वह देश में 102 और विदेश में 27 सम्मान पा चुकी हैं। काव्य, संगीत, लेखन से जुड़ीं डॉ. शशि कई हिंदी गीत संग्रह, गजल संग्रह के अलावा संगीत शास्त्र और नाट्यशास्त्र की पुस्तकें लिख चुकी है।
साहित्य करता है संस्कृति का निर्माण और नेतृत्व : दीक्षित
यूपी बोर्ड परीक्षाओं में हिंदी में उच्च अंक पाने वाले विद्यार्थियों को पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के पिता के नाम पर पं. कृष्ण वाजपेयी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसमें इंटर के बाराबंकी के सूरजभान और वाराणसी की कोमल को 35-35 हजार रुपये दिए गए। हाईस्कूल में प्रतापगढ़ के आरिफ शमीम को 25 हजार और कानपुर नगर की मणि पांडेय व आजमगढ़ की प्रीति सरोज को संयुक्त रूप से 12,500- 12,500 रुपये दिए गए।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि साहित्य ने ही संस्कृति का निर्माण व नेतृत्व किया है। साहित्य ने समाज के सृजन हित को प्रेरित किया। पाश्चात्य साहित्य लोकरंजन रहा है जबकि हमारे यहां साहित्य सृजन का उद्देश्य लोकमंगल ही रहा है। हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सदानंद प्रसाद गुप्त ने बताया कि सरकार ने संस्थान के यशपाल, निराला तथा प्रेमचंद सभागारों के पुनर्नवीकरण की अनुमति दी है। संस्थान की ओर से दिए गए पुरस्कारों की संख्या 147 है। इस वर्ष 136 सम्मान पुरस्कार दिए गए। संस्थान के निदेशक श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि आने वाले दिनों में भी हिंदी संस्थान अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से साहित्य के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं की वृद्धि के लिए कार्य करेगा।
अपने मुद्दों को लेखन में समेट रही हैं स्त्रियां
साहित्य को सम्मान से मिलती है लिखने की प्रेरणा
साहित्यकार को मिलने वाले सम्मान उसका मोल नहीं होते, वे उसके लिये प्रेरणा का काम करते हैं। हिंदी संस्थान से इस स्तर के सम्मान एक साहित्यकार के लिए जिम्मेदारी बढ़ाते हैं कि वह समाज के लिये फिर कुछ बेहतर लाएं। साहित्यकार को प्रेरित करते हैं कि वे कुछ और लिखे, पिछला उसका पसंद किया गया तो अब आगे भी कुछ ऐसा लिखें कि पढ़ा और सराहा जाए। -डॉ. मनमोहन सहगल, लोहिया साहित्य सम्मान से सम्मानित
स्त्री लेखन को बदलते समय में मिल रहे नये आयाम
साहित्य में स्त्री लेखन मुखर होता जा रहा है। बात दलित साहित्य की हो या आदिवासी की, लेखन में वे अपना पक्ष मजबूती से रख ही रही हैं। एक लेखिका के तौर पर मानना है कि जब वह खुद लिखती है तो स्वयं से जुड़े सारे मुद्दों को वह प्रमुखता से उठाती है। इन दिनों आई डिजिटल क्रांति से जुड़ने वाले कई मुद्दों पर वह बेरोकटोक लिख रही हैं। समय बदलने के साथ वे नई चुनौतियों को टक्कर दे रही हैं। -डॉ. कमल कुमार, अवंतीबाई साहित्य सम्मान