यूपी : राज्यपाल और सीएम ने किया चौथे राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, बोले-देश से कुपोषण खत्म करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके तहत प्रदेश के बच्चों, किशोरियों व महिलाओं के पोषण के स्तर में सुधार के लिए कार्य किए जाएंगे।
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को यहां चौथे राष्ट्रीय पोषण मिशन-2021 का शुभारंभ किया। इस मौके पर राज्यपाल ने जहां कुपोषण मुक्त यूपी बनाने के अभियना में अधिकारियों से जुड़ने अपील की, वहीं मुख्यमंत्री ने पोषण के खिलाफ सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान को एक जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश से कुपोषण मिटाना एक बड़ी चुनौती है। इसलिए सभी को मिलकर इस चुनौती से पार पाना होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक समृद्ध नहीं हो सकता जब तक उस राष्ट्रीय अधारशिला मजबूत नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां कुपोषित है तो बच्चा कभी सुपोषित नही हो सकता। इसलिए मां के साथ बच्चों केस्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा।
लोकभवन में आयोजित पोषण माह के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पोषण मुक्त भारत के अभियान से सभी से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि देश के लिए कुपोषण मिटाना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में बाल विकास एवं पुष्ठाहार विभाग की योजनाओं के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसलिए पोषण माह को चार श्रेणियों में बाटकर संचालित करने का फैसला किया गया है। पहले सप्ताह में पोषण वाटिका पर पौधाकरण, दूसरे सप्ताह में आंगनबाड़ी लाभार्थियों को पोषण किट वितरण, तीसरे सप्ताह में योग और आयुष और चौथे सप्ताह में सैम बच्चों की पहचान और उनके लिए सामुदायिक रसोई का निर्माण का विशेष अभियान प्रदेश में चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको जोड़कर इस अभियान को सफल बना सकते हैं। 529 नये आंगनबाड़ी केन्द्रों के उदघाटन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किराए के भवनों में आंगनबाड़ी केन्द्र चलते थे, लेकिन अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिकता पर आंगनबाड़ी केन्द्रों का निर्माण कराया गया है। मिशन मोड पर शुरु हुए अभियान में और भी आंगनबाड़ी केन्द्र जल्द शुरु होंगे। उन्होंने कहा कि 2020 में हमने आंगनबाड़ी को बेसिक शिक्षा के विद्यालयों से जोड़कर प्री-प्राइमरी के रूप में स्थापित करने की कार्ययोजना बनाई थी जो कोरोना के कारण मूर्तरूप नहीं ले पाई है। उन्होंने कहा कि जल्द इसको भी शुरू कराया जाएगा। जहां तीन से पांच आयु वर्ग के बच्चे पोषण के साथ शिक्षा भी प्राप्त कर सकेंगे।
महिला सशक्तीकरण के लिए शुरू किए गए मिशन शक्ति की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षियों को बीट की जिम्मेदारी दी गयी है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आशा कार्यकर्ता और एएनएम द्वारा स्क्रीनिंग और मेडिसिन किट वितरण का कार्य किया गया। इससे प्रदेश में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में बड़ी सहायता मिली। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों तथा आशा वर्कर्स के मानदेय की वृद्धि के सम्बन्ध में कार्यवाही संचालित है। इनके बकाया भुगतान के निर्देश भी दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सितंबर माह साग-सब्जियों और फलों के पौधरोपण के लिए उचित समय है। इस दौरान बेसिक शिक्षा परिषद तथा माध्यमिक स्कूलों में किचन गार्डेन स्थापित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में छह लाख गोवंश हैं, इनमें से बहुत सी गाय दूध देने वाली हैं। 50 ग्राम दूध सुबह और 50 ग्राम दूध शाम को मिल जाए तो कृपोषित मां और बच्चों के लिए अमृत हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी निराश्रित गौ-आश्रय स्थलों से 25000 कुपोषित मां को गाय उपलबध कराई है। गाय के पालन पोषण के लिए हर माह उस परिवार को 900 रुपये भी दिये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत में भूमि के छोटे.छोटे पट्टे देकर और गाय देने की योजना जो पहले संचालित है उसको बढ़ाकर अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं।
इस मौके पर अतिथियों का स्वागत करते हुए महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाती सिंह ने प्रदेश सरकार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को सशक्त और स्वावलम्बी बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। देश व प्रदेश की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति के लिए कुपोषण से मुक्ति जरूरी है। प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह अभियान का प्रभावी ढंग से संचालन किया जा रहा है। प्रमुख सचिव महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार वी हेकाली झिमोमी ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
एक कुपोषित बच्चे को गोंद ले अधिकारी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता : आनंदीबेन
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कहा कि देश व प्रदेश को सशक्त, सक्षम एवं समृद्ध बनाने के लिए महिलाओं, बालिकाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण दूर करने सम्बन्धी कार्यक्रमों के परिणामों का अध्ययन कराकर उन्हें और बेहतर बनाया जा सकता है। कुपोषण से छुटकारा दिलाने में जनसहभागिता की उपयोगी भूमिका है। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एक-एक कुपोषित बच्चे को गोद ले सकती हैं।
यही काम अधिकारी भी कर सकते हैं। इससे बड़ा परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि अभियान में मुख्यमंत्री के साथ अधिकारियों को भी जुटना होगा। उन्होंने अधिकारियों से सरकार के साथ मिलकर पूरी ताकत से काम करने और प्रत्येक गांव को कोरोना से मुक्त, कुपोषण से मुक्त बनाने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने अपने फर्रूखाबाद दौरे के साथ ही गोशालाओं से जुड़ी महिलाओं और उससे जनता को मिल रहे लाभ की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि नए ग्राम प्रधानों को इस बात के लिए प्रेरित करने की जरूरत है कि वह अपने गांव को कुपोषण और कोरोना मुक्त बनाएं। उन्होंने कहा कि अधिकारी जब तक जिलों और ब्लाकों में प्रवास नहीं करेंगे। वहां की आंगनबाड़ी में औचक निरीक्षण नहीं करेंगे तब तक परिणाम सामने नहीं आएगा।
गोद भराई कार्ड ‘शगुन’ का किया विमोचन
इस मौके पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने गोद भराई कार्ड ‘शगुन’ का विमोचन किया। 5 गर्भवती महिलाओं को मंच पर यह कार्ड भेंट कर इस रस्म को निभाकर अभियान का शुभारम्भ किया। चुनरी पहनाई और पोषण के लिए उपयोगी वस्तुओं की टोकरी भेंट किया और पोषण माह पर बनाई गई फ़िल्म प्रदर्शित की गई। इसके अलावा मैस्कॉट ‘आंचल’ का शुभारम्भ किया गया।
529 नवनिर्मित आंगनबाड़ी केन्द्रों का हुआ लोकार्पण
इस अवसर पर प्रदेश के 24 जिलों में 4,142 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित 529 आंगनबाड़ी केन्द्रों का लोकार्पण किया गया। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मुख्य सेविकाओं एवं बाल विकास परियोजना अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही उप्र लोक सेवा आयोग द्वारा नवचयनित 91 बाल विकास परियोजना अधिकारियों में से प्रतीकात्मक तौर पर 10 को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया।