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योगी ने शुरू की 'दस्तक', बोले- दिमागी बुखार को हौवा न बनाएं, जागरूकता फैलाएं

Mon, 05 Feb 2018 03:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 05 Feb 2018 03:24 PM IST
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cm inaugrated dastak campaign against japani inseflitis
दस्तक अभियान का शुभारंभ करते सीएम योगी। - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल की महामारी बने दिमागी बुखार एईएस और जेई को हौवा न बनाते हुए लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि एईएस-जेई के अभियान से किसी भी हालत में झोलाछाप डॉक्टरों को न जोड़ें। जैसे ही झोलाछाप का तंत्र इस अभियान से जुड़ेगा सरकार की पूरी कवायद परास्त हो जाएगी।

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वह सोमवार को गोमती नगर के एक होटल में प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ के सहयोग से शुरू हुए ‘दस्तक’ अभियान का शुभारंभ कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दस्तक अभियान के माध्यम से पूर्वांचल में लोगों के घरों तक पहुंचकर एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस)-जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के बारे में जानकारी देनी होगी।
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लोगों को बताना होगा कि वह किसी भी तरह का बुखार होने पर लापरवाही न करें, तुरंत किसी सरकारी चिकित्सालय प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचें क्योंकि ये इंसेफेलाइटिस के कारण भी हो सकता है।
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सीएम ने कहा कि अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को एईएस-जेई के लक्षणों की पहचान नहीं है, इसलिए सभी गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बलरामपुर, महाराजगंज, कुशीनगर के जिला अस्पतालों के चिकित्सकों का उदाहरण देते हुए ये बात कही।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर मरीज को भर्ती करके अज्ञात बुखार बताते हैं और बच्चे का इलाज किए बगैर उसकी रिपोर्ट का आने का इंतजार करते रहते हैं। यदि इलाज नहीं आता है तो उसे मेडिकल कॉलेज रेफर करना चाहिए, जिससे बच्चे को समय पर इलाज मिले और उसे विकलांग होने से या मृत्यु से बचाया जा सके।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोगों को बिना डराए इस अभियान से जोड़ना होगा। इसके लिए नोडल स्वास्थ्य विभाग को बनाया गया है। वह पंचायती राज, नगर विकास, ग्राम्य विभाग, शिक्षा, महिला कल्याण, जल निगम जैसे विभागों के साथ मिलकर 1 से 15 अप्रैल तक अभियान चलाएगा। जिससे लोगों को स्वच्छता, शुद्ध पानी पीने और बुखार होने पर सरकारी अस्पताल तक जाने की जानकारी दी जाएगी।

कार्यक्रम में चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, चिकित्सा स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, यूनिसेफ उप्र प्रमुख रूथ एल लियानो, संचार विशेषज्ञ श्रीभाई शेली ने भी एईस-जेई अभियान के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी भी मौजूद थे। दस्तक अभियान के बारे में 5 व 6 फरवरी तक चिकित्साधिकारियों की कार्यशाला चलेगी।

चिह्नित करें विभागों के लापरवाही अधिकारियों को

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मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दशक से दिमागी बुखार का प्रकोप है। कई सरकारें आईं लेकिन सकारात्मक सोच से काम नहीं हुआ। बच्चों में कुपोषण की वजह से एईएस-जेई की चपेट में बच्चे जल्दी आ रहे हैं। गर्भवती महिलाएं भी कुपोषित हैं। साफ-सफाई नहीं है। योजनाएं होने के बावजूद लोगों को फायदा नहीं मिला। इसके लिए विभाग और उनके अधिकारी दोषी हैं।

बच्चों की मौतों केदोषी अधिकारियों को चिह्वित करना होगा। पीएचसी-सीएचसी हैं लेकिन वहां चिकित्सक पैरामेडिकल स्टाफ नहीं था। जिला अस्पतालों में पीडियाट्रिक आईसीयू था लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं होता था। इसलिए गोरखपुर-बस्ती जिलों के पीडियाट्रीशियन और पीएचसी के चिकित्सकों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कम से कम एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे वह बीमारी को समय पर पहचान इलाज शुरू कर सकें।

अन्य जनपद के चिकित्सकों को केजीएमयू में प्रशिक्षण दिया जाए। सरकार के प्रयासों से पिछले वर्ष बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले एईएस-जेई मरीजों की संख्या आधी हो गई है। पीएचसी-सीएचसी पर इलाज देकर इसे और भी कम किया जाएगा।

मार्च-अप्रैल में होगा जेई टीकाकरण

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सीएम ने कहा कि पहले जेई का प्रकोप था उसे टीकाकरण से कम किया गया है। अब एईएस बच्चों की जान ले रहा है। जेई मध्य जुलाई से मध्य नवंबर तक फैलता है जो मच्छर काटने से होता है लेकिन एईएस का कोई समय नहीं हैं। इसकी चपेट में आने से साल भर बच्चों की मौतें होती हैं।

गंदगी और शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण बच्चे ही नहीं बड़े भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसलिए स्वच्छता अभियान को भी इस बीमारी के उन्मूलन से जोड़ा गया है। पिछले साल 92 लाख बच्चों को टीकाकरण किया गया था। इस बार मार्च-अप्रैल में टीकाकरण कराया जाएगा। समय पर टीकाकरण होने से इसका असर अच्छा होता है क्योंकि टीके को प्रतिरक्षण तंत्र पैदा करने में समय लगता है।

सीएम के सुझाव
- शिक्षा विभाग के साथ मिलकर स्कूल-कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को जागरूक करें
- स्कूल की प्रार्थना सभा में बच्चों को एईस-जेई बीमारी और स्वच्छ रहने के तरीके बताएं
- उन्हें शुद्ध पानी पीने के लिए जागरूक करें
- प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाएं
- भोजपुर, अवधी, हिंदी भाषा में लोगों को समझाया जाए
- बीमारी होने पर सरकारी अस्पताल ले जाने की ही सलाह दें
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