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नखलऊवा पंचः लखनऊ के बच्चों ने छुड़ाए अंग्रेजी हुकूमत के छक्के
Mon, 25 Mar 2019 04:47 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 25 Mar 2019 04:47 PM IST
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- फोटो : डेमो
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आजादी के संघर्ष की लौ तेज होती जा रही थी। अंग्रेजी हुकूमत बौखलाहट में क्रांतिकारियों व आजादी के लिए लड़ने वालों पर लाठियां चलवा रही थी। ब्रिटिश सम्राट जार्ज पंचम का राजतिलक 13 दिसंबर 1939 को तय हुआ।
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उस दिन अंग्रेजी हुकूमत ने देश भर में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस व गुप्तचरों को निर्देश दिया कि इस दिन देश में कहीं भी अंग्रेजों के खिलाफ कोई आंदोलन न होने पाए। उन दिनों लखनऊ में सीआईडी स्पेशल ब्रांच (राजनीतिक शाखा) के ग्रुप अफसर चंद्रभूषण मिश्र थे।
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उन्होंने सुबह 4 बजे से ही अपने अधीन सभी कर्मचारियों को लखनऊ में सक्रिय कर दिया। क्रांति आंदोलन के अधखुले पन्ने के एक संस्मरण से पता चलता है, ‘मिश्र को पता चला कि स्वतंत्रता सेनानियों ने हजरतगंज स्थित बड़े डाकघर के सामने लगी जार्ज पंचम की संगमरमर की मूर्ति पर तारकोल पोतने की योजना बनाई है।
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उन्होंने वहां कई गुप्तचर लगा दिए। तभी क्रांतिकारी समाजवादी दल के सदस्य बाबूराम रस्तोगी अचानक तारकोल का कुल्हड़ लिए मूर्ति के पास न जाने किधर से आ गए। वह तारकोल पोतते उससे पहले ही गुप्तचरों ने दबोच लिया और उन्हें घसीटकर हजरतगंज थाने में ठूंस दिया।
बच्चों ने मूर्ति पर पोता खूब तारकोल
लालबाग के कुछ छोटे-छोटे लड़के जो नरही की ओर जा रहे थे उन्होंने यह दृश्य देखा तो उनका खून खौल उठा। आपस में सलाह की और न जाने कहां से तारकोल ले आए और सीधे पहुंच गए चौक स्थित विक्टोरिया पार्क। इन्होंने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों के साथ विक्टोरिया की मूर्ति पर तारकोल पोतना शुरू कर दिया।
आसपास के लोग भौचक निगाहों से इन बच्चों को देख रहे थे। इन्होंने मूर्ति पर खूब तारकोल पोता और जब तक पुलिस वहां पहुंचती उससे पहले ही वहां से निकलकर गलियों में गुम हो गए। अंग्रेजी हुकूमत माथा पीटती रही। सीआईडी अफसरों पर कार्रवाई हुई। पर, अंग्रेजी हुकूमत लखनऊ के इन नन्हे क्रांतिकारियों का पता नहीं लगा सकी।
आसपास के लोग भौचक निगाहों से इन बच्चों को देख रहे थे। इन्होंने मूर्ति पर खूब तारकोल पोता और जब तक पुलिस वहां पहुंचती उससे पहले ही वहां से निकलकर गलियों में गुम हो गए। अंग्रेजी हुकूमत माथा पीटती रही। सीआईडी अफसरों पर कार्रवाई हुई। पर, अंग्रेजी हुकूमत लखनऊ के इन नन्हे क्रांतिकारियों का पता नहीं लगा सकी।