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Lucknow News: ठंड में बच्चे हो रहे बीमार, पीआईसीयू में ताला
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रायबरेली। ठंड बढ़ने के साथ ही बच्चों में निमोनिया, बुखार, कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ गया है। रोजाना पांच से 10 बच्चे गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए स्थापित बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई (पीआईसीयू) में ताला लटका हुआ है। ऐसे में बच्चों के इलाज के लिए अभिभावकों को निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्टाफ और डॉक्टर न मिलने के कारण पीआईसीयू का ताला नहीं खोला गया है।
जिला अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए वर्ष 2022 में पीडियाट्रिक आईसीयू स्थापित की गई। यहां 10 वेंटिलेटर लगाए गए हैं। समय से मानदेय न मिलने के कारण पीआईसीयू में लगा स्टाफ काम छोड़कर चला गया। अब चिकित्सक और स्टाफ न होने के कारण पीआईसीयू में ताला लटक रहा है। अस्पताल प्रशासन इसे संचालित नहीं करा पा रहा है।
दिशा की बैठक में सदन के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने यह मामला उठने के बाद भी स्थिति जस की तस है। जिला अस्पताल में रोजाना गंभीर हालत में बच्चे पहुंच रहे हैं, लेकिन पर्याप्त इलाज की सुविधा न होने के बाद बच्चों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। तमाम बच्चों को लेकर अभिभावक निजी अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। बच्चों को जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
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दो डॉक्टरों की भर्ती पर नहीं हुई तैनाती
शासन की मंशा पर सीएमओ के स्तर से जेई/एईएस के लिए दो चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई गई। डॉ. राजवीर सिंह व डॉ. अजय कुमार का चयन होने के बाद पीआईसीयू के संचालित होने की उम्मीद जागी, लेकिन अब तक चयनित चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में बच्चों को जिला अस्पताल में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उधर, सीएमओ ने वेंटिलेटर चलाने के लिए दो चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए लखनऊ भी भेजा है।
पीडियाट्रिक आईसीयू को संचालित कराने का प्रयास किया जा रहा है। सीएमओ के स्तर पर दो चिकित्सकों की भर्ती हुई है। जल्द ही चिकित्सक मिलने पर गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए वर्ष 2022 में पीडियाट्रिक आईसीयू स्थापित की गई। यहां 10 वेंटिलेटर लगाए गए हैं। समय से मानदेय न मिलने के कारण पीआईसीयू में लगा स्टाफ काम छोड़कर चला गया। अब चिकित्सक और स्टाफ न होने के कारण पीआईसीयू में ताला लटक रहा है। अस्पताल प्रशासन इसे संचालित नहीं करा पा रहा है।
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दिशा की बैठक में सदन के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने यह मामला उठने के बाद भी स्थिति जस की तस है। जिला अस्पताल में रोजाना गंभीर हालत में बच्चे पहुंच रहे हैं, लेकिन पर्याप्त इलाज की सुविधा न होने के बाद बच्चों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। तमाम बच्चों को लेकर अभिभावक निजी अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। बच्चों को जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
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दो डॉक्टरों की भर्ती पर नहीं हुई तैनाती
शासन की मंशा पर सीएमओ के स्तर से जेई/एईएस के लिए दो चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई गई। डॉ. राजवीर सिंह व डॉ. अजय कुमार का चयन होने के बाद पीआईसीयू के संचालित होने की उम्मीद जागी, लेकिन अब तक चयनित चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में बच्चों को जिला अस्पताल में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उधर, सीएमओ ने वेंटिलेटर चलाने के लिए दो चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए लखनऊ भी भेजा है।
पीडियाट्रिक आईसीयू को संचालित कराने का प्रयास किया जा रहा है। सीएमओ के स्तर पर दो चिकित्सकों की भर्ती हुई है। जल्द ही चिकित्सक मिलने पर गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल