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साथी को डूबते देख मांगी मदद तो चौकीदार बोला, मर जाने दो... और डूब गया मासूम

Sat, 17 Sep 2016 02:19 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 17 Sep 2016 02:19 PM IST
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child died after drowned in ashram pit
अ‌भ‌िषेक - फोटो : amar ujala

सआदतगंज के बिहारीपुर स्थित योगेश्वर ऋषिकुल शिक्षा समिति आश्रम के मैदान में शुक्रवार सुबह पानी से भरे गड्ढे में नहाने उतरा कक्षा एक का छात्र अभिषेक (10) डूब गया।

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 उसके साथी करण ने कुछ दूर स्थित प्लाईवुड फैक्ट्री के चौकीदार व मजदूरों से मदद मांगी, लेकिन चौकीदार ने उसे दुत्कार दिया और बोला कि तुम लोग आश्रम की जमीन पर गंदगी फैलाते हो। 
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मर जाने दो उसको। बदहवास करण भागकर मुहल्ले में पहुंचा और लोगों को जानकारी दी। पड़ोसी सुंदर ने अभिषेक को बाहर निकाला और अस्पताल ले गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिवारीजनों ने आश्रम संचालकों, चौकीदार और मजदूरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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अभिषेक के बड़े भाई अनिकेत ने बताया कि वह स्वामी योगानंद स्कूल में पढ़ता था। सुबह करीब दस बजे वह मुहल्ले के ही दोस्त करण के साथ आश्रम के मैदान में गया था। आश्रम में तीन महीने पहले यज्ञ हुआ था। 

इसके लिए मिट्टी खोदने की वजह से करीब 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया था। तीन दिन से बारिश के दौरान गड्ढे में पानी भर गया। अभिषेक नहाने की बात कहते हुए गड्ढे में उतर गया।

गहराई का अंदाजा न होने से वह डूबने लगा। उसे हाथ-पैर मारते देख करण घबरा गया। चूंकि, उसे भी तैरना नहीं आता था इसलिए वह मदद के लिए चीखने लगा। कुछ दूर एक दीवार बना रहे मजदूरों से उसने साथी को बचाने की गुहार लगाई। 

आश्रम संचालकों पर लगाया लापरवाही का आरोप

child died after drowned in ashram pit
इसी गड्ढे में डूबा छात्र - फोटो : amar ujala

मजदूर अभिषेक को बचाने के बजाए घबराकर भाग गए। करण चीखता हुआ प्लाईवुड फैक्ट्री पहुंचा और वहां काम कर रहे लोगों व चौकीदार को घटना की जानकारी दी। उसने दोस्त को बचाने के लिए हाथ-पैर जोड़े लेकिन, चौकीदार ने दुत्कार दिया। 

इसके बाद करण मुहल्ले की तरफ दौड़ा और वहां लोगों को जानकारी दी। मुहल्ले के लोग दौड़ते-भागते हुए घटनास्थल पहुंचे। सुंदर ने पानी में उतरकर अभिषेक की तलाश की।

कुछ देर बाद उसे बाहर निकाल लिया लेकिन, तब तक अभिषेक दम तोड़ चुका था। हादसे के बाद परिवारीजनों में कोहराम मच गया। सूचना पाकर आई बाजारखाला पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

अनिकेत ने बताया कि पिता रमेश की चार साल पहले हादसे में मौत हो चुकी है। मां मीना ने मजदूरी करके सात भाई-बहन का खर्च उठाया। अभिषेक की मौत आश्रम संचालकों की लापरवाही और चौकीदार के मदद न करने से हुई।

इलाकाई लोगों ने बताया कि 20 दिन पहले एक गाय भी गड्ढे में गिर गई थी। उस वक्त पानी न होने से गाय की जान बच गई। मैदान में और गड्ढे के आसपास दिनभर बच्चे खेलते हैं। आश्रम संचालकों से गड्ढा पाटने अथवा घेराबंदी करने के लिए कहा गया लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई और मासूम हादसे का शिकार हो गया। 

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