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सेतु निगम में भ्रष्टाचार: मुख्य परियोजना प्रबंधक ने खोली पोल, कहा-बिना मंजूरी खर्च किए 10 करोड़ रुपये
Sun, 31 Jan 2021 11:36 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 31 Jan 2021 11:36 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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सेतु निगम में पुलों के निर्माण पर बिना मंजूरी ही खर्च करने का मामला सामने आया है। यही नहीं, अधिकारियों-कर्मचारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कुछ खास लोग ही बार-बार ठेका पा रहे हैं। इसका खुलासा निगम के ही मुख्य परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने अपने चार्ज मेमो में किया है।
गुप्ता का हाल ही लखनऊ अंचल से गोरखपुर अंचल में तबादला हुआ है। कार्यभार छोड़ते समय उन्होंने चार्ज मेमो लिखा है। इस पर चार्ज ग्रहण करने वाले अधिकारी सुनील कुमार का भी हस्ताक्षर है।
चार्ज मेमो में बताया गया है कि लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह सेतु और किसान पथ सेतुओं पर 10 करोड़ रुपये बिना सक्षम स्तर के मंजूरी के खर्च दिखाए गए हैं। इसी तरह सीतापुर में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज पर भी बिना मंजूरी अधिक राशि खर्च हो गई है। नियमानुसार बिना मंजूरी अधिक धनराशि खर्च करना अनियमितता की श्रेणी में आता है।
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इन मामलों में संबंधित परियोजना प्रबंधक, सहायक अभियंताओं व लेखा प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। साथ ही लेखा प्रभारी का प्रशासनिक आधार पर तबादला संदीप गुप्ता के स्तर से प्रस्तावित किया गया है।
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गुप्ता का हाल ही लखनऊ अंचल से गोरखपुर अंचल में तबादला हुआ है। कार्यभार छोड़ते समय उन्होंने चार्ज मेमो लिखा है। इस पर चार्ज ग्रहण करने वाले अधिकारी सुनील कुमार का भी हस्ताक्षर है।
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चार्ज मेमो में बताया गया है कि लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह सेतु और किसान पथ सेतुओं पर 10 करोड़ रुपये बिना सक्षम स्तर के मंजूरी के खर्च दिखाए गए हैं। इसी तरह सीतापुर में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज पर भी बिना मंजूरी अधिक राशि खर्च हो गई है। नियमानुसार बिना मंजूरी अधिक धनराशि खर्च करना अनियमितता की श्रेणी में आता है।
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इन मामलों में संबंधित परियोजना प्रबंधक, सहायक अभियंताओं व लेखा प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। साथ ही लेखा प्रभारी का प्रशासनिक आधार पर तबादला संदीप गुप्ता के स्तर से प्रस्तावित किया गया है।
चार्ज मेमो में गुप्ता ने यह भी बताया है कि लखनऊ में तैनाती के दौरान उन्होंने इन मामलों में कार्रवाई के लिए कब-कब पत्र लिखे, पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने निर्माणाधीन कार्यों में विभागीय कार्मिकों और ठेकेदारों की मिलीभगत के संबंध में निगम के शिकायत प्रकोष्ठ को भी पत्र भेजा था।
इन मामलों की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई है। किसान पथ परियोजना पर बीम नंबर 1 में आए क्रैक की जांच आईआईटी, कानपुर के विशेषज्ञों से कराने की सिफारिश भी की है। गुप्ता ने इसमें बड़े घपले की आशंका जताई है।
मुख्य परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता की गतिविधियां सेतु निगम हित में नहीं थी। इसलिए उनका ट्रांसफर किया गया है। प्रत्येक कॉन्ट्रैक्ट ई-टेंडरिंग के माध्यम से होता है। अगर किसी परियोजना पर अधिक धन खर्च होता है तो बाद में शासन से उसकी मंजूरी ले ली जाती है, पर काम नहीं रोका जाता। उनके आरोप बेबुनियाद हैं।
- एके श्रीवास्तव, एमडी, सेतु निगम
इन मामलों की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई है। किसान पथ परियोजना पर बीम नंबर 1 में आए क्रैक की जांच आईआईटी, कानपुर के विशेषज्ञों से कराने की सिफारिश भी की है। गुप्ता ने इसमें बड़े घपले की आशंका जताई है।
मुख्य परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता की गतिविधियां सेतु निगम हित में नहीं थी। इसलिए उनका ट्रांसफर किया गया है। प्रत्येक कॉन्ट्रैक्ट ई-टेंडरिंग के माध्यम से होता है। अगर किसी परियोजना पर अधिक धन खर्च होता है तो बाद में शासन से उसकी मंजूरी ले ली जाती है, पर काम नहीं रोका जाता। उनके आरोप बेबुनियाद हैं।
- एके श्रीवास्तव, एमडी, सेतु निगम