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यूपी सरकार का दावा, आंकड़े अलग-अलग दिनों के, ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई एक भी मौत

Sun, 13 Aug 2017 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 13 Aug 2017 12:20 AM IST
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chief minister yogi adityanath on death in gorakhpur medical college.
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

यूपी सरकार ने शनिवार को माना कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई डेढ़ घंटे के लिए बाधित हुई थी, लेकिन इससे किसी मरीज की जान नहीं गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों से संवेदना जताते हुए कहा कि मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं रही।

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उन्होंने कहा कि मौत के आंकड़े और कारणों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री को गोरखपुर भेजा था। उन्होंने रिपोर्ट दी है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई।
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मुख्यमंत्री शनिवार शाम विभागीय मंत्रियों, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और अधिकारियों के साथ आपात बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि वह नौ अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गए थे। वहां जेई, डेंगू, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों के त्वरित इलाज के बारे में अधिकारियों व डॉक्टरों को निर्देश दिए थे। उस समय ऑक्सीजन की कमी का कोई मामला सामने नहीं आया था। योगी ने दावा किया कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत उन्होंने ही की थी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी काफी चिंतित हैं। प्रधानमंत्री ने उनसे फोन पर बात की है और आश्वस्त किया है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जो भी जरूरत होगी, उसमें केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी। केंद्र व प्रदेश सरकार के अधिकारी गोरखपुर पहुंचे हैं।

सीएम ने बताया कि सात अगस्त को 9, आठ अगस्त को 12, नौ अगस्त को 9, दस अगस्त को 23 और 11 अगस्त को 11 बच्चों की मौत हुई। मौत के आंकड़े अलग-अलग दिनों के हैं और कारण भी अलग-अलग हैं।

इमरजेंसी सेवाओं के लिए धन की कमी नहीं

chief minister yogi adityanath on death in gorakhpur medical college.
बायें से सिद्घार्थ नाथ ‌सिंह, सीएम योगी व अनुप्रिया पटेल

सीएम ने कहा इमरजेंसी सेवाओं के लिए धन की कमी नहीं है। सरकार ने इमरजेंसी सेवाओं से संबंध में पहले से निर्देश दे रखे हैं कि किसी भी हाल में तीन दिन से अधिक फाइल एक टेबल पर नहीं रुकनी चाहिए। जिस ऑक्सीजन सप्लायर कंपनी के पेमेंट की बात की जा रही है, उसने एक अगस्त को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र लिखा था।

प्रिंसिपल ने चार अगस्त को डीजी मेडिकल एजूकेशन को पत्र भेजा। डीजी मेडिकल एजूकेशन ने पांच अगस्त को 68 लाख 65 हजार 596 रुपये के सापेक्ष दो करोड़ रुपये जारी किए। सरकार ने मई में वैक्सीनेशन के लिए विशेष अभियान में जेई के टीके दिए थे। इससे मौत के आंकड़ों में कमी आई है।

दोषी पर होगी कड़ी कार्रवाई : अनुप्रिया
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, प्रधानमंत्री बच्चों की मौत से दुखी हैं। उन्होंने ही मुझे गोरखपुर जाने के निर्देश दिए हैं। बीआरडी कॉलेज में बच्चों की मौत की खबर आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रदेश सरकार के अधिकारियों से संपर्क साधा।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को गोरखपुर भेजा गया। स्वास्थ्य मंत्रालय प्रदेश सरकार को हर जरूरी सहयोग देने के लिए तैयार है। प्रदेश सरकार अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेज रही है। वह प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें सारी जानकारी देंगी।

पैसे दिए जाने के बाद सप्लायर के पत्र का औचित्य नहीं

chief minister yogi adityanath on death in gorakhpur medical college.

ऑक्सीजन सप्लायर द्वारा मंत्री को पत्र लिखे जाने की खबर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पांच अगस्त को पैसे जारी कर दिए गए तो फिर नौ अगस्त को मंत्री को पत्र लिखने का क्या मतलब? नौ अगस्त को अगर पत्र लिखा भी तो उसी दिन मंत्री को पत्र पहुंच नहीं जाएगा?

क्या सप्लायर ने किसी के हाथ में पत्र दिया? सप्लायर के पास कोई सुबूत है? लखनऊ से पैसे भेजे जाने के बाद भी प्रधानाचार्य राजीव मिश्रा ने सप्लायर को पेमेंट नहीं किया, इसके लिए उन्हें निलंबित कर दिया गया।

ऐसे संवेदनशील मामले में किसी को खिलवाड़ की छूट नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा, मैं 1998 से इंसेफेलाइटिस से लड़ रहा हूं। मामले की जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संवेदनशील मामलों में खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं दी जाएगी।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बारे में जब मुख्यमंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल को पहले ही निलंबित किया जा चुका था। मुख्यमंत्री ने पूछा -क्या आप प्रिंसिपल के पैरोकार हो? उन्होंने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए पैसों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। शासन ने दवा के मद में डीजी स्वास्थ्य को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए 3.86 करोड़ रुपये दिए।

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