शिव भक्तों की आस्था के आगे नहीं ठहरता आतंकवाद: सीएम योगी आदित्यनाथ
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पंडाल में मौजूद लोगों के हर हर महादेव, जयश्री राम के घोष के बीच मंच पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि सोच ही व्यक्तित्व का आइना होता है। अच्छी सोच महान बनाती है तो बुरी सोच पतन का कारण बनती है। सकारात्मक सोच से व्यक्ति लोककल्याण करता है, जनमानस की आस्था को सम्मान देता है, जबकि नकारात्मक सोच समाज में अव्यवस्था और अराजकता पैदा करती है। कहा कि सात हजार साल से भी अधिक समय की विरासत के आपके बीच है, इसे संवारा गया है। मंदिर का जिक्र पुराणों में भी है, अयोध्या के राजकुमार लक्ष्मण के साथ भी इसका संबंध है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के साथ उसकी साफ-सफाई भी जरूरी होती है, मुझे बताया गया है कि यहां इसका ख्याल रखा गया है।
यहां ज्योतिर्लिंग में जो भी जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक होगा वो भूगर्भ तक जाएगा, भूगर्भ जल स्तर सुधरेगा। ऊर्जा संरक्षण का इंतजाम है। फूल समेत अन्य पूजा सामग्री के अगरबत्ती आदि उचित निस्तारण और प्रसंस्करण की भी व्यवस्था की गई है। अन्य धार्मिक स्थानों पर भी ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए। अगर ऐसी ही साफ-सफाई आदि व्यवस्था का इंतजाम शहरों में वार्ड, मोहल्ला स्तर पर हो जाए तो शहरों की वेस्ट मैनेजमेंट की दिक्कत हल हो जाएगी। जैसा कि हम अक्सर यूपी से दिल्ली या हरियाणा से दिल्ली जाने पर देखते हैं कि वहां बाहर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं। लोकार्पण के बाद सीएम ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ करीब 20 मिनट तक गर्भगृह का जायजा लिया और कोनेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की।
गोपाल जी पर महादेव ने बरसाई कृपा
मुख्यमंत्री ने कहा कि महादेव की शरण मे जाने वालों का कल्याण तुरंत होता है। सबसे बड़ा उदाहरण गोपाल जी को देखिये, इधर मंदिर का विस्तारीकरण शुरू हुआ, उधर वे विधायक से मंत्री बनकर यहां तक पहुंच गये। मंदिर समिति की टीम को बधाई देते हुये कहा कि मंदिर की साफ-सफाई व्यवस्था उन्हें सबसे अच्छी लगी है। मप्र के राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि आज समारोह में योगी आदित्नाथ एक मुख्यमंत्री नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी आध्यात्मिक पीठ के रूप में आये हैं।
भूमा पीठाधीश्वर हरिद्वार के अनंतश्री विभूषित स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि यह देश का सौभाग्य है कि ऐसे प्रधानमंत्री है जो त्रिपुंड शान से लगाते हैं। प्रदेश में मुख्यमंत्री ऐसे हैं जो भगवा धारण करते हैं। ऐसे ही संकल्पों से संस्कृति बढ़ती है। उन्होंने कहा कि जब हर घर में एक चाणक्य होगा, तभी अखंड राष्ट्र का सपना पूरा होगा। उन्होंने मुद्दा उठाया कि सरकारों को छात्रवृत्ति-सुविधाओं का पैमाना तय करना चाहिये कि जो राष्ट्र से प्यार करेगा, संस्कृति से प्यार करेगा उसी को छात्रवृत्ति या अन्य सुविधा मिले।