मुख्यमंत्री योगी ने जिलों के भ्रमण में 883 परियोजनाओं की दी सौगात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के भ्रमण का बड़ा फायदा स्थानीय जनता को मिला है। स्कूल, अस्पताल, इंटर कालेज, डिग्री कालेज, बिजली उपकेंद्र, फायर स्टेशन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे लोगों को रिकार्ड 883 परियोजनाओं की सौगात मिली है। इसमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 5-5 करोड़ रुपये की सड़कों की दी गई सौगात व अन्य तमाम प्रोजेक्ट शामिल नहीं हैं।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में तमाम ऐसे क्षेत्र हैं जहां काफी दूर तक अस्पताल नहीं हैं। लोगों को इलाज में परेशानी होती है और दूरी की वजह से कई बार प्राथमिक उपचार का अमूल्य समय निकल जाता है। इंटर कालेज और डिग्री कालेज न होने से उच्च प्राथमिक से आगे गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई अभी भी अधूरी छूट जाती है। कानून व्यवस्था के लिए नए थाने की मांग अर्से से हो रही थी लेकिन उस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। सब स्टेशन की कमी से लो वोल्टेज बिजली की समस्या लोगों की नीयति बनी हुई थी। मुख्यमंत्री केजिलों के भ्रमण से लोगों की ऐसी जरूरतों पर तेजी से काम का रास्ता साफ हुआ है। मुख्यमंत्री ज्यादातर जिलों की दो से अधिक यात्राएं कर चुके हैं। एक बार की यात्रा से कोई जिला नहीं छूटा है।
इसलिए नियमित भ्रमण की शुरुआत की
अधिकारी ने बताया मुख्यमंत्री जिलों के नियमित भ्रमण में आम लोगों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पूरा समय और महत्व देते हैं। लोगों की स्थानीय आकांक्षाएं समझते हैं और उससे जुड़ी घोषणा कर उस पर अमल सुनिश्चित करा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पिछले 22 महीनों में 800 से अधिक जो घोषणाएं की हैं उसमें इसी तरह की जनाकांक्षाओं की झलक मिलती है। आज प्रदेश भर में मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में आम लोगों की मांग से जुड़े स्कूल, अस्पताल, इंटर व डिग्री कालेज, आईटीआई, नलकूप, उपकेंद्र, वेलनेस सेंटर बन रहे हैं, पर्यटन क्षेत्रों का विकास हो रहा है। इससे लोग मुख्यमंत्री की घोषणा और उसकी पूर्ति में अपनी भागीदारी महसूस कर रहे हैं। मुख्यमंत्री घोषणाओं पर अमल की खुद मोनिटरिंग भी कर रहे हैं।
जिलों के भ्रमण का सबसे बड़ा फायदा
अधिकारी ने बताया कि पिछली कुछ सरकारों में तत्कालीन मुख्यमंत्री इस तरह जिलों का नियमित भ्रमण नहीं करते थे। इसका असर ये होता था कि आए दिन लखनऊ में डटे रहने वाले चुनिंदा प्रभावशाली जनप्रतिनिधि अपने इलाके में तमाम परियोजनाएं मंजूर करा ले जाते थे। सामान्य व पहली बार वाले जनप्रतिनिधि एक-दो प्रोजेक्ट के लिए चक्कर काटते रहते थे। मुख्यमंत्री ने जिलों में नियमित भ्रमण कर इस खास चलन को खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं में स्थानीय आवश्यकताओं को महत्व दिया गया है, आम या खास क्षेत्र को नहीं।