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Bharat Ratna: यूपी के 12वें भारत रत्न बने चौधरी साहब, मूर्ति को हां करने में मुलायम सिंह ने दो मिनट भी न लगाए
Sat, 10 Feb 2024 10:49 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 Feb 2024 10:49 AM IST
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Chaudhary Charan Singh
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व प्रधानमंत्री, गृह मंत्री व उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह यूपी के 12 वें भारत रत्न हो गए हैं। यूपी से पीएम बनने के बाद भारत रत्न पाने वाले वह छठे नेता हैं। उन्हें यह सम्मान मरणोंपरांत मिला। खास बात ये है कि देश व प्रदेश को नेतृत्व देने वाले चौधरी साहब को भारत रत्न के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
उनके बाद यूपी से प्रतिनिधित्व कर देश के पीएम बने स्वर्गीय राजीव गांधी व स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी को उनसे पहले भारत रत्न दिया जा चुका है। पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव को भी आज उनके साथ ही भारत रत्न देने की घोषणा की गई है। राव अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के समय देश के पीएम थे।
मूल रूप से नूरपुर, हापुड़ निवासी चौधरी चरण सिंह पहली बार छपरौली से 1937 में निर्वाचित हुए थे। वह यहां से छह बार विधायक रहे। 1952 में वह उत्तर प्रदेश के राजस्व मंत्री बने और उन्होंने जमींदारी उन्मूलन व भूमि सुधार एक्ट लागू किया। इससे किसानों को भूस्वामित्व मिला।
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वहीं बिखरी खेती के लिए चकबंदी कानून, भूमि संरक्षण बिल भी उन्होंने लागू कराया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सहकारी खेती के प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने 1967 में कांग्रेस से त्याग पत्र दे दिया।
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उनके बाद यूपी से प्रतिनिधित्व कर देश के पीएम बने स्वर्गीय राजीव गांधी व स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी को उनसे पहले भारत रत्न दिया जा चुका है। पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव को भी आज उनके साथ ही भारत रत्न देने की घोषणा की गई है। राव अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के समय देश के पीएम थे।
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मूल रूप से नूरपुर, हापुड़ निवासी चौधरी चरण सिंह पहली बार छपरौली से 1937 में निर्वाचित हुए थे। वह यहां से छह बार विधायक रहे। 1952 में वह उत्तर प्रदेश के राजस्व मंत्री बने और उन्होंने जमींदारी उन्मूलन व भूमि सुधार एक्ट लागू किया। इससे किसानों को भूस्वामित्व मिला।
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वहीं बिखरी खेती के लिए चकबंदी कानून, भूमि संरक्षण बिल भी उन्होंने लागू कराया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सहकारी खेती के प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने 1967 में कांग्रेस से त्याग पत्र दे दिया।
इसके बाद तीन अप्रैल को 1967 को मुख्यमंत्री बने थे। 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि मध्यावधि चुनाव में उन्हें फिर से सफलता मिली और वह 17 फरवरी 1970 को मुख्यमंत्री बने। इसके बाद केंद्र में गृहमंत्री, वित्त मंत्री, उपप्रधानमंत्री और 28 जुलाई 1979 देश के प्रधानमंत्री भी बने थे।
रालोद लंबे समय से कभी यूपीए तो कभी एनडीए के साथ रही और चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की मांग कर रही थी। किंतु लंबे समय बाद उनकी मांग पूरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोषणा के बाद पार्टी के लोगों में काफी खुशी है।
चौधरी साहब भारत रत्न के सच्चे हकदारः डॉ. अजय कुमार
रालोद के छपरौली से विधायक डॉ. अजय कुमार ने देश के सच्चे नायक चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं। उनके भारत रत्न से अलंकृत होने पर आज देश के करोडों किसानों में खुशी की लहर है।
रालोद के छपरौली से विधायक डॉ. अजय कुमार ने देश के सच्चे नायक चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं। उनके भारत रत्न से अलंकृत होने पर आज देश के करोडों किसानों में खुशी की लहर है।
विधायक ने कहा कि चौधरी साहब ने शहर बनाम गांव की राजनीति को सशक्त बनाया। सभी दलों और नेताओं को किसानों, गांवों की बात करने के लिए विवश किया। उनका कहना था कि देश तभी समृद्धशाली हो सकता है जब ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन में वृद्धि हो, गांव के रहने वाले की क्रय शक्ति में वृद्धि हो।
गांव, गरीब और किसान हित में नीतियों को आगे बढ़ाया
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा ने किसानों के मसीहा, गरीब, पिछड़े व दलितों के नायक चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसके लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के ईमानदार व आदर्श व्यक्तित्व के साथ ही चौधरी चरण सिंह ने गांव, गरीब और किसान हित में नीतियों को आगे बढाया। देश की जनभावनाओं के मद्देनजर उनको भारत रत्न बहुत पहले ही दिया जाना चाहिए था। किंतु देर से ही सही इसकी घोषणा से किसानों, गरीब मजदूरों में खुशी की लहर है।
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा ने किसानों के मसीहा, गरीब, पिछड़े व दलितों के नायक चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसके लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के ईमानदार व आदर्श व्यक्तित्व के साथ ही चौधरी चरण सिंह ने गांव, गरीब और किसान हित में नीतियों को आगे बढाया। देश की जनभावनाओं के मद्देनजर उनको भारत रत्न बहुत पहले ही दिया जाना चाहिए था। किंतु देर से ही सही इसकी घोषणा से किसानों, गरीब मजदूरों में खुशी की लहर है।
मूर्ति के लिए हां करने में मुलायम सिंह ने दो मिनट भी नहीं लगाए
पूर्व मंत्री शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि 1990 में मुलायम सिंह यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने और मैं उनके साथ मंत्री। मैंने उनसे कहा कि सब जगह सिर्फ कांग्रेसी नेताओं की ही मूर्ति लगी है। किसी अन्य नेता की नहीं है, जबकि उनका योगदान काफी प्रशंसनीय है। मैंने उन्हें सुझाव दिया कि विधान सभा के सामने गोविंद वल्लभ पंत जी की मूर्ति है। क्यों न विधान सभा प्रांगण में चौधरी चरण सिंह की मूर्ति लगवाई जाए। वह मान गए और उन्होंने इस पर सहमति दी।
पूर्व मंत्री शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि 1990 में मुलायम सिंह यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने और मैं उनके साथ मंत्री। मैंने उनसे कहा कि सब जगह सिर्फ कांग्रेसी नेताओं की ही मूर्ति लगी है। किसी अन्य नेता की नहीं है, जबकि उनका योगदान काफी प्रशंसनीय है। मैंने उन्हें सुझाव दिया कि विधान सभा के सामने गोविंद वल्लभ पंत जी की मूर्ति है। क्यों न विधान सभा प्रांगण में चौधरी चरण सिंह की मूर्ति लगवाई जाए। वह मान गए और उन्होंने इस पर सहमति दी।
मैंने लखनऊ में एक मूर्तिकार से संपर्क किया तो उसने काफी कम समय में मूर्ति बनाने में असमर्थता जताई। इसके बाद प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बनवाई। 29 मई 1990 को भव्य कार्यक्रम में उनकी मूर्ति का अनावरण किया गया। इसके मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह के पुत्र और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अजित सिंह थे। बाद में इसी स्थान पर चौधरी जी की कांस्य की मूर्ति लगवाई गई।
यूपी से अब तक इन्हें मिला है भारत रत्न
जवाहर लाल नेहरू
लाल बहादुर शास्त्री
इंदिरा गांधी
राजीव गांधी
अटल बिहारी बाजपेई
चौधरी चरण सिंह
पंडित मदन मोहन मालवीय
बिस्मिल्लाह खान
पंडित रवि शंकर
पुरुषोत्तम दास टंडन
गोविंद वल्लभ पंत
डा. भगवान दास
लाल बहादुर शास्त्री
इंदिरा गांधी
राजीव गांधी
अटल बिहारी बाजपेई
चौधरी चरण सिंह
पंडित मदन मोहन मालवीय
बिस्मिल्लाह खान
पंडित रवि शंकर
पुरुषोत्तम दास टंडन
गोविंद वल्लभ पंत
डा. भगवान दास