लखनऊः 1.85 करोड़ की डकैती में दरोगा-सिपाही समेत सात पर चार्जशीट, वकील था मास्टरमाइंड
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करीब तीन माह पहले लखनऊ में गोसाईंगंज के ओमेक्स अपार्टमेंट में कोयला कारोबारी के घर 1.85 करोड़ की डकैती में पुलिस ने दो दरोगा, सिपाही और वकील समेत सात लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है।
प्रभारी निरीक्षक विजय कुमार सिंह ने बताया कि कालाधन पकड़ने के बहाने 9 मार्च को अंकित अग्रहरि के फ्लैट पर डकैती डाली गई थी। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को इस मामले की विभागीय जांच सौंपी थी।
जांच में वकील मधुकर मिश्रा, राधाकृष्ण उपाध्याय, उपनिरीक्षक आशीष तिवारी, पवन मिश्रा, बर्खास्त आरक्षी प्रदीप सिंह भदौरिया, उसके निजी वाहन चालक आनंद यादव और यशराज तिवारी के खिलाफ सुबूत मिले हैं। इसके अलावा बाराबंकी में रहने वाले मधुकर के मौसा अनिल कुमार पाठक, मौसी शोभा पाठक, उनकी बेटी मानसी उर्फ सलोनी और प्रदीप की पत्नी बीना सिंह पर डकैती की रकम एवं राज छिपाने का आरोप है।
तीन को किया था निलंबित
एसएसपी ने जांच शुरू होते ही उपनिरीक्षक झांसी के पवन मिश्रा, आशीष तिवारी व बहराइच के प्रदीप को निलंबित कर दिया था।
वकील था डकैती का मास्टरमाइंड, मौसा ने दी थी पनाह
दोनों आरोपी दरोगा, आरक्षी और उसके निजी वाहन चालक से पूछताछ में खुलासा हुआ कि वकील मधुकर मिश्रा वारदात का मास्टरमाइंड था। इलेक्ट्राॅनिक सर्विलांस व अन्य तरीकों से तलाश में जुटी पुलिस ने बाराबंकी में उसके मौसा अनिल कुमार पाठक के घर दबिश दी। पता चला कि मधुकर उनके घर पर छिपा था। डकैती के आरोपी को पनाह देने के आरोप में अनिल की पत्नी शोभा और बेटी सलोनी पाठक को गिरफ्तार किया गया।
9 आरोपियों को गिरफ्तार कर 15.77 लाख किए थे बरामद
पुलिस ने इस मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर 15.77 लाख रुपये बरामद किए थे। आरक्षी प्रदीप की पत्नी बीना के पास डकैती के 27 हजार व आनंद का मोबाइल फोन, कानपुर निवासी आरोपी यशराज तिवारी के कब्जे से 24 हजार और पड़ोस से 12.86 लाख रुपये बरामद हुए थे।
उपनिरीक्षक पवन व आशीष और आरक्षी प्रदीप व उसकी कार के चालक आनंद को पुलिस ने 2.40 लाख रुपये के साथ पकड़ा था।