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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›     Champat Rai said let Ram Mandir be built hospital and school will all be built

राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने कहा, राममंदिर बन जाने दीजिए, अस्पताल, स्कूल सब बनेगा

Fri, 14 Aug 2020 08:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 14 Aug 2020 08:10 AM IST
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  Champat Rai said let Ram Mandir be built hospital and school will all be built
चंपत राय - फोटो : file photo

70 एकड़ में मंदिर समेत अन्य सुविधाएं विकसित करने में जनता जो कुछ सहयोग देगी, सब लगाया जाएगा। अगर वह मदद देना बंद कर देगी तो काम भी बंद हो जाएगा। मंदिर का आधार समाज है, हमारा कोई संकल्प नहीं है। हमारी अपील के दायरे में उद्योगपति भी आते हैं, लेकिन वे क्या सहयोग करेंगे, खुद जानें। ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने कहीं। वह राममंदिर के निर्माण से लेकर सरकार व ट्रस्ट की ओर से अयोध्या में जनसुविधाओं के विकास पर ‘अमर उजाला’ से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि सोमनाथ, वैष्णोदेवी आदि मंदिर ट्रस्ट सेवा के कार्य कर रहे हैं, आपकी क्या योजना है। इस पर उन्होंने कहा, अभी मंदिर बन जाने दीजिए, अस्पताल और स्कूल सब बन जाएगा। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश।

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क्या मंदिर निर्माण को पूरा करने की समयसीमा तय हुई है? 
राममंदिर निर्माण की कोई जल्दी नहीं है। मंदिर एक हजार साल तक अक्षुण्ण रहे, इसके लिए सारे मानक पूरे किए जाएंगे। अब सारे काम इंजीनियरिंग के हैं। कागज पर काम करने के गणित और हकीकत में अंतर होता है। मंदिर बनने में तीन साल से कम समय का कोई सवाल नहीं है। हम लोग चार साल सोचकर चल रहे हैं। 
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ट्रस्ट को 70 एकड़ जमीन मिली है, वहां क्या-क्या बनेगा? 
यहां मुख्यतया श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनेगा। इसमें प्रथम तल पर गर्भगृह में सिर्फ रामलला बालरूप में भाइयों के विग्रह के साथ विराजेंगे तो दूसरे तल पर रामदरबार होगा। यहां मर्यादा पुरुषोत्तम राजा रामचंद्र पत्नी जानकी संग भव्य सिंहासन पर विराजमान होंगे। पास में तीनों भाई भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के साथ हनुमानजी होंगे। जैसा आप जानते हैं कि देश के हर बड़े मंदिर में मुख्य मंदिर के साथ ही परिसर में कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर होते हैं। ऐसा ही यहां भी होगा पर, अभी सिर्फ राममंदिर बनाने पर फोकस है। 

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राममंदिर आर्थिक दृष्टिकोण से अन्य मंदिरों से कितना आगे होगा?

मैं अर्थशात्री नहीं हूं। राममंदिर आर्थिक दृष्टिकोण से देश-विदेश में क्या स्थान रखेगा, हमारी कोई कल्पना नहीं है। आप चाहते हैं कि हम तिरुपति से आगे हों, लेकिन हमारी प्रतिस्पर्धा किसी मंदिर से नहीं होगी।

राममंदिर के लिए राजस्थान में पर्याप्त गुलाबी पत्थर उपलब्ध है?
सब भगवान करेंगे। भगवान के काम में हर कदम पर बाधाएं आईं, लेकिन अब मंदिर बन रहा है। इसी तरह सब उपलब्ध होगा, दुनिया बहुत बड़ी है। सभी अड़चनों को पार करके भव्य राममंदिर बनेगा।

मंदिर बनने के साथ भक्त बढ़ेंगे तो सुविधाओं को लेकर क्या अपेक्षा रखते हैं?
सरकारी विभाग प्राथमिकता के आधार पर काम करें। बिजली, सड़क, नाली, पेयजल, रेलवे, विमानन आदि हर क्षेत्र को अपना-अपना काम करना होगा। हम सरकार के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते। भक्तों के रहने-खाने के लिए देश का कोई भी मंदिर इंतजाम नहीं कर सकता। यात्री बढ़ेंगे तो ट्रेनें बढ़ेंगी और प्लेटफॉर्म बढ़ेगा। सरकार काम कर रही है। भक्त आएंगे तो निवेश बढ़ेगा और बेहतर इंतजाम होंगे।

तमाम धर्मार्थ ट्रस्टों में राजनेता हैं। मगर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नहीं।सरकार को तय करना था कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का स्वरूप क्या होगा और इसमें कोन-कौन रहेगा। राजनेता को ट्रस्ट में न रखना, सरकार की पवित्र सोच को दर्शाता है। यह सात्विक सोच है।

क्या ट्रस्ट ने अयोध्या के जर्जर मठ-मंदिरों के पुनरुद्धार का संकल्प लिया है?

ट्रस्ट ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। जिसका मंदिर है, वह उसका पुनरुद्धार कराएगा। जिनके बाप-दादों ने बनाया है, उसकी वंशावली करेगी। जो महंत मठ-मंदिरों में रहते हैं, वे करेंगे। हम कहेंगे कि भक्तों को प्ररेणा दो और उनके जरिए अपने मंदिर बनाओ।

मंदिर निर्माण को लेकर 20 अगस्त को दिल्ली में होने वाली बैठक का क्या एजेंडा है?
हमारे यहां कोई संसद की मीटिंग तो है नहीं, जब मिलते हैं तब कोई न कोई बात करते हैं। अयोध्या में रहते हैं तो हम पांच ट्रस्टी मिलते रहते हैं। यह किसी काम के लिए सहज रूप से मिलना है। यह कोई ट्रस्ट की बैठक नहीं है और न ही इसका कोई पूर्व घोषित एजेंडा है। मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो यह उसकी ही मीटिंग होगी।

आडवाणी-जोशी-कल्याण समेत अन्य के आने का अभी वक्त नहीं
पांच अगस्त को भूमि पूजन के मौके पर राममंदिर आंदोलन में सर्वाधिक चर्चित रहे चेहरे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह आदि के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम मंत्री और भाजपा-विहिप व संघ के नेता नहीं पहुंच पाए थे। अब ये नेता अयोध्या कब आएंगे के सवाल पर चंपत राय कहते हैं कि अभी इनके आने का वक्त नहीं है। यहां की स्थिति सामान्य नहीं है। यहां आएं और बीमार होकर जाएं, हम ऐसा नहीं कर सकते।

बड़े औद्योगिक घराने से अभी तक नहीं मिला कोई सहयोग
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनने के बाद राममंदिर निर्माण के लिए लगभग साढ़े चार महीने में 43 करोड़ रुपये दान में आया है। आम जनता हर दिन बैंक खाते में ऑनलाइन दान दे रही है। लेकिन देश के बड़े औद्योगिक घराने अंबानी, अडानी, टाटा, बिड़ला, महेंद्रा व गोदरेज से अभी तक कोई चंदा नहीं मिला है। 

वहीं, अभी तक सबसे बड़ा दान महावीर मंदिर ट्रस्ट का 2 करोड़ रुपये है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय कहते हैं कि हमने सबसे अपील की थी, आम जनता लगातार सहयोग कर रही है। पर, बड़े उद्योगपति राममंदिर के क्या सहयोग करेंगे, वे खुद ही जानें।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दो साल पहले एक करोड़ रुपये राममंदिर के लिए देने का संकल्प लिया था, जो शिवसेना लिखी पर्ची से गुप्त दान के जरिए दिया गया है। उन्होंने जो सार्वजनिक घोषणा की थी, उसे पूरा किया। जबकि संत मोरारी बापू के कहने पर उनके भक्तों से एकत्रित 18 करोड़ रुपये का दान अभी नहीं जमा हो पाया है। इसी तरह एमआईटी पुणे के छात्रों की ओर 21 करोड़ दान के दावे भी बैंक खाते से दूर है।
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