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...इसलिए भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए अग्निपरीक्षा साबित होगा यूपी

Sun, 10 Apr 2016 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 10 Apr 2016 02:30 AM IST
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 Challenges against new BJP chief in Uttar Pradesh.
केशव प्रसाद मौर्य - फोटो : amar ujala

भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते ही परीक्षाओं के दौर से गुजरना होगा। 2017 के विधानसभा चुनाव और सांगठनिक ढांचे की दुरुस्तगी के साथ उन्हें कार्यक्रमों की कसौटी पर अपनी कार्यकुशलता और सांगठनिक क्षमता दिखानी होगी।

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जातीय समीकरणों पर फिट बैठने तथा पार्टी के लिए एजेंडा सेट करने की काबिलियत पर खरा उतरना होगा तो यह भी साबित करना होगा कि वह संगठन के लिए नए नहीं हैं।

इसी के साथ उन्हें पार्टी के नए व पुराने, युवा और वरिष्ठ हर तरह के चेहरों के बीच संतुलन साधने की भी महारत दिखानी होगी। उन्हें यह भी प्रमाणित करना होगा कि केंद्रीय नेतृत्व ने उनका चयन यूं ही नहीं कर लिया है।

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'ग्रामोदय से भारत उदय' को सफल बनाना मकसद

 Challenges against new BJP chief in Uttar Pradesh.

केशव मौर्य 11 अप्रैल को औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पद का जिम्मा संभालेंगे। इसके तीन दिन बाद ही 14 अप्रैल से उनका इम्तिहान शुरू हो जाएगा।

पहली परीक्षा होगी भाजपा का राष्ट्रीय अभियान ‘ग्रामोदय से भारत उदय’। दस दिन के इस अभियान के तहत भाजपा ने न सिर्फ मोदी सरकार के कामकाज को गांव-गांव पहुंचाने की योजना बनाई है बल्कि इन कार्यक्रमों के सहारे पार्टी के आगे के एजेंडे को भी सेट करने का भी खाका खींचा है।

अभियान की पृष्ठभूमि में यूपी के जातीय समीकरणों को भाजपा के लिहाज से संतुलित बनाकर 2017 के चुनावी संग्राम में सफलता का मकसद भी छिपा हुआ है। केशव को इन सब कसौटियों पर खरा उतरकर अपनी क्षमताएं साबित करनी होंगी।

पार्टी नेताओं को एकजुट करना है मुख्य कसौटी

 Challenges against new BJP chief in Uttar Pradesh.

इन कार्यक्रमों में पार्टी की एकजुटता मुख्य कसौटी होगी। दरअसल, पिछले कई वर्षों से भाजपा की मुख्य समस्या पार्टी के बड़े नेताओं की अलग-अलग राहें रही हैं। खास तौर से पिछले चार वर्षों के दौरान अलग-अलग कारणों से पार्टी के ज्यादातर पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की ही नहीं, जिलों व क्षेत्रों के भी कई प्रमुख चेहरों की पार्टी के कामकाज में बहुत सक्रियता नहीं दिखाई दी है।

इस वजह से कई बार कार्यक्रमों का वह स्वरूप भी नहीं बन पाया जैसा कि भाजपा चाहती थी। प्रदेश प्रभारी ओम माथुर भी कई बार घुमा-फिराकर यह संदेश देते आए हैं कि सबको साथ लिए बगैर यूपी में भाजपा का कल्याण नहीं हो सकता।

पिछले दिनों यहां भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में उन्होंने ज्यादातर पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को बुलाकर यही संदेश देने की कोशिश की। इसलिए देखने वाली बात यह भी होगी कि केशव मौर्य वरिष्ठों से लेकर कनिष्ठों तक को पार्टी के लिए एक प्लेटफॉर्म पर साथ रखकर आगे बढ़ते हैं या अकेले ही चलने का फैसला करते हैं।

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दलितों को बताएंगे क्या किया प्रधानमंत्री मोदी ने

 Challenges against new BJP chief in Uttar Pradesh.

अभियान के तहत भाजपा ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर 14 से 16 अप्रैल तक सामाजिक समरसता अभियान चलाना तय किया है। इसके तहत पार्टी को गांव-गांव में डॉ. अंबेडकर पर केंद्रित कार्यक्रम करने हैं।

पार्टी हाईकमान चाहता है कि इसमें गांव वालों को, खास तौर से दलित वर्ग से जुड़े लोगों को बताया जाए कि केंद्र की मोदी सरकार ने उनकी भलाई के लिए कौन-कौन से काम और योजनाएं शुरू की हैं। इन कार्यक्रमों में गांव के प्रतिभावान बच्चों का सम्मान भी होना है।

इसके अलावा सहभोज या अन्य ऐसे कार्यक्रम भी करने हैं जिनके जरिये दलितों को यह संदेश दिया जा सके कि भाजपा से जुड़े लोग उनके साथ किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं चाहते हैं।

किसानी के एजेंडे पर काम
17 से 20 अप्रैल तक किसानों पर फोकस रखते हुए ‘ग्राम किसान सभा’ तो 21 से 24 अप्रैल के बीच ‘गांव-गांव भाजपा’ कार्यक्रम होने हैं। इन कार्यक्रमों के पीछे भाजपा की मंशा खेती और किसानी के साथ गांव के विकास के लिए केंद्र सरकार के कामकाज की लोगों को जानकारी देना है।

अभियान के अंतिम दिन 24 अप्रैल को हर जिले में ग्राम सभा स्तर तक भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करनी है।

इन नेताओं को इस दिन लोगों को केंद्र सरकार के गांव व किसान एजेंडे के बारे में जानकारी देनी है। जाहिर है इन कार्यक्रमों से निकलने वाला संदेश ही केशव के आगे की मंजिल का आधार तय करेगा।

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