CDRI ने चीन-रूस में इस्तेमाल हो रही एंटीवायरल दवा तैयार की, कोरोना के मरीजों पर होगा ट्रायल
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सीएसआईआर की लैब सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) ने चीन और रूस में फ्लू के इलाज में इस्तेमाल हो रही दवा उमीफेनोविर के कंपाउंड के उत्पादन के लिए जरूरी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी विकसित कर ली है। कोरोना के मामलों में इसके क्लीनिकल ट्रायल को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से हरी झंडी मिल गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में केजीएमयू सहित लखनऊ के तीन अस्पतालों में इसका कोरोना मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो जाएगा।
सीडीआरआई के निदेशक डॉ. तापस कुंडू बताते हैं कि यह दवा प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती है। इससे वायरस का कोशिकाओं में प्रवेश रुक जाता है। क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा तो यह इलाज के लिए सस्ता विकल्प हो सकता है।
सीडीआरआई के प्रवक्ता डॉ. संजीव यादव कहते हैं कि क्लीनिकल ट्रायल सरकारी संस्थानों में केजीएमयू, लोहिया इंस्टीट्यूट और प्राइवेट संस्थान में एरा मेडिकल कॉलेज में 130 मरीजों पर होगा। खुद पर ट्रायल के लिए रजामंदी देने वाले मरीजों का अगले 15 दिनों में चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। ट्रायल दो महीने चलेगा।
उमीफेनोविर एक एंटी वायरल दवा है
उमीफेनोविर एक एंटी वायरल दवा है। अभी तक रूस और चीन के पास ही इसे बनाने के लिए जरूरी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी है। उनके पेटेंट का हम उपयोग नहीं कर सकते हैं और अन्य किसी देश में यह उपलब्ध नहीं है। हाल ही में कोविड-19 के रोगियों के लिए इसके संभावित उपयोग को चिह्नित किया गया है। ऐसे में सीडीआरआई ने तीन महीने में इस दवा के देसी वर्जन के लिए अपनी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी विकसित कर ली।
120 में चुने गए 30 कंपाउंड में से पहला: सीडीआरआई ने कुल 120 कंपाउंड कोरोना की संभावित दवा के लिए चुने थे। उसमें से 30 को प्रभावी पाया गया। यह पहला कंपाउंड है जिसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो रहा है। खास बात है कि इसके उत्पादन के लिए किसी भी एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इंग्रीडिएंट को आयात करने की जरूरत नहीं होगी।
गोवा की फार्मा कंपनी बनाएगी देसी दवा
गोवा की निजी फार्मा कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सीडीआरआई ने की है। फार्मा कंपनी भी अलग से डीजीसीआई से क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति ले चुकी है।
दवा के निर्माण और बिक्री का लाइसेंस उनके पास है जिससे क्लीनिकल ट्रायल सफल रहने पर न्यूनतम समय में उत्पादन करने में आसानी होगी।