सीबीआई करेगी प्रतापगढ़ के इंस्पेक्टर अनिल कुमार हत्याकांड की जांच, हाईकोर्ट ने दिए आदेश
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बुधवार को यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर अनिल कुमार की प्रतापगढ़ में नवंबर 2015 में हुई हत्या की जांच सीबीआई से कराने के निर्देश दिए हैं। मृत इंस्पेक्टर की पत्नी आरती गुर्जर ने हत्याकांड में प्रतापगढ़ के तत्कालीन एसपी सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सीबीआई से जांच करवाने के लिए याचिका दायर की थी।
याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत मामले का ट्रायल तुरंत रोके और सीबीआई की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसे आगे बढ़ाए। गौरतलब है कि यूपी पुलिस इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर पहले ही चार्जशीट दायर कर चुकी थी।
याचिका में आरती गुर्जर ने प्रदेश सरकार की सहमति के बावजूद सीबीआई जांच की मांग केंद्र सरकार द्वारा नकारे जाने के 9 जून 2016 के निर्णय को चुनौती दी थी। केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच नकारने के पीछे दो वजहें दी थीं। पहली कि यह एक ‘चांस किलिंग’ (तात्कालिक हालात में हुई हत्या) थी, लेकिन जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि याचिका में अनिल कुमार के निलंबन, उनकी एसपी से हुई बातचीत, निलंबन वापसी, अनिल कुमार द्वारा की जा रही दो हत्याओं की जांच के परिणामों व अन्य हालात से संबंधित जो तथ्य सामने रखे हैं, उनके आधार पर यह संभावना खारिज नहीं की जा सकती कि यह एक ‘चांस किलिंग’ के बजाय ‘सोचा समझा हत्याकांड’ था।
केंद्र सरकार ने दूसरी वजह दी थी कि यह हत्याकांड अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय मामला नहीं है। लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क भी खारिज करते हुए कहा कि सीबीआई को ऐसे अपराधों की जांच भी दी जा सकती है जो भले ही अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय न हों। सीबीआई जांच का निर्णय मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर लिया जा सकता है। साथ ही जांच में किसी तरह के पक्षपात या प्रभाव को रोकने के लिए भी ऐसा किया जा सकता है।
सीबीआई निचली अदालत को सौंपेगी जांच रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने सीबीआई से कहा कि इस हत्याकांड की जांच करे और निचली अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपे। साथ ही निचली अदालत को कहा कि वह जब तक सीबीआई रिपोर्ट नहीं सौंप देती है, ट्रायल को आगे न बढ़ाए। हाईकोर्ट ने कहा कि वह मानती है कि सीबीआई के पास सीमित मानव संसाधन हैं, लेकिन मौजूदा मामले में सामने आए तथ्य और परिस्थितियों की जांच याची के विश्वास को कायम रखने व जांच की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।