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यादव सिंह को बचाने का सरकारी दांव उल्टा पड़ा

Fri, 14 Aug 2015 02:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 14 Aug 2015 02:47 AM IST
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CBI rejects to investigate third case against Yadav Singh.

यादव सिंह को बचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा नोएडा में मुकदमा दर्ज कराने का दांव उल्टा पड़ गया। सीबीआई ने इस मामले की जांच से पल्ला झाड़ लिया है। सीबीआई के अधिकारियों का साफ मत है कि एजेंसी उन्हीं मामलों की जांच करेगी, जिनके लिए अदालत ने निर्देश दिए हैं।

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यादव सिंह को सीबीआई जांच से बचाने के लिए यूपी सरकार ने कई दांव चले। पहले तो पुलिस की जांच से बचाने की कोशिश की फिर सीबीसीआईडी को जांच सौंपकर क्लीन चिट दिला दी।
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सरकार ने यादव सिंह को उसके पद पर फिर स्थापित कर जांच के नाम पर जस्टिस अमरनाथ आयोग गठित कर दिया था। इस बीच आयकर विभाग ने यादव सिंह के आवास व अन्य ठिकानों पर छापामारी कर दी। इसमें यादव सिंह व परिवारीजनों से जुड़ी 40 कंपनियों के नाम सामने आए।
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इसे देखते हुए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग का अंदेशा था। बचाव में सरकार कोई कदम उठाती, इससे पहले ही उसकी उम्मीद से हटकर अदालत ने सीबीआई जांच के निर्देश दे दिए। सीबीआई ने भी दिल्ली से यूपी तक यादव सिंह के कई ठिकानों पर छापामारी की।

अदालत ने सरकार की मंशा पर पानी फेरा

CBI rejects to investigate third case against Yadav Singh.

इसकी काट में सरकार ने सर्वोच्च अदालत में एसएलपी दाखिल करते हुए नोएडा अथॉरिटी से यादव सिंह के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज कराकर जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टीगेशन सेल (एसआईसी) गठित कर दी।

मंशा यह थी कि सर्वोच्च अदालत के सामने ऐसी तस्वीर रखी जाए कि राज्य सरकार यादव सिंह प्रकरण को गंभीरता से ले रही है और इसमें बाकायदा कार्यवाही हो रही है। लिहाजा सीबीआई जांच की जरूरत नहीं।

पर अदालत ने सरकार की इस मंशा पर भी पानी फेर दिया और सीबीआई जांच जारी रखने को कहा, लेकिन अदालत ने सरकार द्वारा दर्ज कराए गए तीसरे मुकदमे की जांच को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए। इसके बाद एसपी मानवाधिकार राम किशोर की अध्यक्षता में गठित एसआईसी भी ठंडी पड़ी है। हाल यह है कि न सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है न ही एसआईसी।

सीबीआई ने मामले से साफ-साफ पल्ला झाड़ लिया है। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसी उन्हीं दो मुकदमों पर जांच कर रही है, जो पूर्व में दर्ज हुए थे। इसके अलावा उसकी जांच के दायरे में आयकर विभाग की कार्यवाही में सामने आए तथ्य शामिल हैं। ऐसे में सरकार अब यह फैसला नहीं कर पा रही है कि वह क्या कदम उठाए।

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