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दंगा: 'जैसा कहा जाए वैसा करें वर्ना रास्ते से हटें'

Thu, 26 Sep 2013 11:59 PM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
विष्णु मोहन/लखनऊ Updated Thu, 26 Sep 2013 11:59 PM IST
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cbi enquiry of muzaffarnagar riots

हिंसा के बाद तनाव की स्थिति से जूझ रहे मुजफ्फरनगर के एसएसपी प्रवीण कुमार ने तो राज्य सरकार से पहले ही कवाल गांव की घटना की सीबीआई या सीबीसीआईडी से सिफारिश कराने की सिफारिश की थी।

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उच्च अधिकारियों ने एसएसपी के इस आग्रह पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की।

एसएसपी की परेशानियों को नजरअंदाज करते हुए उच्च अधिकारियों ने उन पर लगातार मुकदमे में दर्ज कई आरोपियों पर तेजी के साथ रासुका के तहत कार्रवाई करवाने का दबाव बनाया हुआ था।
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एसएसपी पर दबाव था कि वह निर्देशों के मुताबिक काम करें या फिर रास्ते से हटें।

ऊपरी दबाव की वजह से ही एसएसपी को उच्च रक्तचाप की शिकायत करते हुए आंख की परेशानी बताकर चिकित्सीय अवकाश पर जाना पड़ गया।

सूत्रों के मानें तो प्रवीण कुमार को ‘फोर्स लीव’ पर जाना पड़ा है। वह वैसे दिल्ली एम्स में आंख की समस्या के इलाज के लिए भर्ती हो गए हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्रवीण कुमार द्वारा कवाल गांव की घटना की सीबीआई से जांच कराने की मांग व बसपा विधायक नूर सलीम राणा की आसनी से जमानत हो जाने पर आला अफसर उनसे खासे नाराज थे।
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पिछले दिनों हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में अफसरों ने प्रवीण कुमार को काफी फटकारा था। सूत्र बताते हैं कि प्रवीण कुमार ने कुछ ही देर में एडीजी कानून-व्यवस्था को फोन कर इस बात की शिकायत की थी।

सूत्र बताते हैं कि जब प्रवीण कुमार का फोन एडीजी के पास पहुंचा तो एडीजी आला अफसरों के पास ही मौजूद थे। बहरहाल, उसी दिन उच्च अधिकारियों ने प्रवीण कुमार को यह स्पष्ट कर दिया था कि या तो वह बताए अनुसार काम करें या अपना रास्ता तलाश लें।

प्रवीण कुमार द्वारा कवाल घटना के लिए सीबीआई या सीबीसीआईडी जांच का आग्रह किए जाने के पीछे इस मामले में हुई फर्जी नामजदगियों को इंगित किया गया था।

गौरतलब है कि कवाल मामले में कुछ लोगों के खिलाफ गलत रिपोर्ट दर्ज किए जाने की बात उच्च अधिकारियों ने कही थी। इसके बाद कई लोगों के नाम रिपोर्ट से हटा लिए गए थे।

इसके अलावा पिछले दिनों जब एक चैनल ने स्टिंग आपरेशन किया था तब मुजफ्फरनगर के कई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को यह बयान देते हुए देखा गया था जिसमें ऊपर से आदेश आने पर दोषियों को छोड़ने की बात कही गई थी।

प्रवीण कुमार द्वारा कवाल गांव की घटना की सीबीआई या सीबीसीआईडी जांच की सिफारिश करे जाने के लिए किसी तरह के आग्रह पत्र को भेजे जाने के बारे में प्रमुख सचिव गृह ने साफ कहा कि ऐसा उनकी जानकारी में नहीं है। अगर प्रवीण कुमार ने कोई पत्र भेजा है तो शायद डीजीपी कार्यालय भेजा होगा।


इस बाबत डीजीपी देवराज नागर ने कहा कि प्रवीण कुमार ने जो पत्र भेजा है उसमें सिर्फ कवाल की घटना की सीबीआई अथवा सीबीसीआईडी से जांच कराने की बात कही गई है।

डीजीपी ने कहा कि प्रवीण कुमार ने यह पत्र मुजफ्फरनगर में हिंसा भड़कने से पहले ही लिखा था और उन्होंने दंगे की जांच कराने के लिए नहीं कहा है।

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