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बीबीएयू के कुलसचिव ने मैनपावर आपूर्ति की कंपनी के खिलाफ दर्ज कराया केस
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लखनऊ। आशियाना थाने में बीबीएयू में मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज किया गया। कंपनी के मालिक पर आरोप है कि कूटरचित बैंक ट्रांजेक्शन शीट लगाकर विश्वविद्यालय से रकम वसूली गई है। जानकारी होने पर बीबीएयू प्रशासन ने बैंक से शिकायत की। बैंक की जांच में शीट फर्जी पाई गई तो बीबीएयू के कुलसचिव ने केस दर्ज कराया है।
प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र यादव के मुताबिक, बीबीएयू के कुलसचिव प्रो. विक्टर बाबू ने तहरीर देकर बताया कि श्री साईं नाथ एसोसिएट्स के मालिक उपेंद्र सिंह है। यह कंपनी कई सालों से संस्थान में मैन पावर की आपूर्ति व सेनिटेशन का काम करती है। हाल ही में बीबीएयू के कुलसचिव प्रो. विक्टर बाबू को कंपनी द्वारा प्रतिपूर्ति के लिए दिए गए बिल में लगी कर्मचारियों के भुगतान की बैंक ट्रांजेक्शन शीट फर्जी होने की शिकायतें मिलीं। इस पर उन्होंने परिसर स्थित केनरा बैंक को जानकारी दी। केनरा बैंक ने जांच की तो सभी फर्जी पाई गईं। उन शीट पर बैंक कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी नकली थे। कागज भी कूटरचित बनाए गए थे।
कुलसचिव प्रो. विक्टर बाबू ने इसकी शिकायत श्रम विभाग और पुलिस उपायुक्त कानून एवं व्यवस्था से की। आलाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सोमवार रात आशियाना थाने में कंपनी के मालिक उपेंद्र सिंह के खिलाफ कूटरचित ट्रांजेक्शन शीट लगाकर भुगतान करने के लिए धोखाधड़ी समेत तमाम धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जानकारी में ये सामने आया है कि यह कंपनी पिछले 10 सालों से संस्थान में मैनपावर का काम कर रही है। ऐसे में अगर शुरुआत से ही कंपनी ने फर्जीवाड़ा किया होगा तो अब तक लाखों का चूना लगा चुकी होगी। पुलिस और बैंक ने जांच शुरू कर दी है।
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प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र यादव के मुताबिक, बीबीएयू के कुलसचिव प्रो. विक्टर बाबू ने तहरीर देकर बताया कि श्री साईं नाथ एसोसिएट्स के मालिक उपेंद्र सिंह है। यह कंपनी कई सालों से संस्थान में मैन पावर की आपूर्ति व सेनिटेशन का काम करती है। हाल ही में बीबीएयू के कुलसचिव प्रो. विक्टर बाबू को कंपनी द्वारा प्रतिपूर्ति के लिए दिए गए बिल में लगी कर्मचारियों के भुगतान की बैंक ट्रांजेक्शन शीट फर्जी होने की शिकायतें मिलीं। इस पर उन्होंने परिसर स्थित केनरा बैंक को जानकारी दी। केनरा बैंक ने जांच की तो सभी फर्जी पाई गईं। उन शीट पर बैंक कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी नकली थे। कागज भी कूटरचित बनाए गए थे।
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कुलसचिव प्रो. विक्टर बाबू ने इसकी शिकायत श्रम विभाग और पुलिस उपायुक्त कानून एवं व्यवस्था से की। आलाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सोमवार रात आशियाना थाने में कंपनी के मालिक उपेंद्र सिंह के खिलाफ कूटरचित ट्रांजेक्शन शीट लगाकर भुगतान करने के लिए धोखाधड़ी समेत तमाम धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जानकारी में ये सामने आया है कि यह कंपनी पिछले 10 सालों से संस्थान में मैनपावर का काम कर रही है। ऐसे में अगर शुरुआत से ही कंपनी ने फर्जीवाड़ा किया होगा तो अब तक लाखों का चूना लगा चुकी होगी। पुलिस और बैंक ने जांच शुरू कर दी है।
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