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श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्टः पांच लाख से कम का चेक बनता तो हो जाता भुगतान, 6 लाख हड़पने का मामला

Fri, 11 Sep 2020 04:29 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 11 Sep 2020 04:29 PM IST
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case of grabbing 6 lakh rupees from clone check of Shri Ram Janmabhoomi Trust
- फोटो : amar ujala
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के  खाते से क्लोन चेक का उपयोग कर ठगी की धनराशि अधिक भी हो सकती थी। तीसरे चेक से भुगतान इसलिए पकड़ में आ गया क्योंकि इसकी धनराशि पांच लाख रुपये से अधिक थी। पहले दो चेक की धनराशि के पांच लाख रुपए से कम होने पर भुगतान इसलिए हो भी गए। यह चेक 2.50 लाख रुपये और 3.50 लाख रुपये के थे। तीनों भुगतान की पूरी प्रक्रिया में क्लोन चेक के जाली होने को पकड़ा ही नहीं जा सका था।
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एसबीआई के अधिकारियों का कहना है कि पंजाब नेशनल बैंक की महाराष्ट्र स्थित ब्रांच में भुगतान के लिए चेक लगाया गया। चेक की मूल कॉपी उनके पास ही मौजूद रही। वहां से चेक की इमेज स्कैन कर केंद्रीय क्लियरेंस हाउस को भेजी गई। ऐसे में एसबीआई से भुगतान के समय ट्रस्ट के खाताधारकों के सिग्नेचर व चेक के बैंकखाता से जुड़े होने की जांच कर भुगतान को अनुमति दी गई।
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एक व्यवस्था के तहत एसबीआई पांच लाख रुपये से अधिक केचेक होने पर खाताधारक की सहमति फोन पर लेता है। हमने वही किया। ऐसे में 9.86 लाख रुपये के भुगतान को रोका जा सका। चेक जमा करने वाली बैंक को भी इसकी सूचना दी गई है जिससे भुगतान होने वाले खाते से वापस धनराशि की वसूली की जा सके।
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सवाल यह कि क्लोन चेक क्यों नहीं पकड़ा?

बैंक अधिकारियों का कहना है कि भुगतान लेने वाली बैंक जोकि चेक को प्रजेंट करती है। उसको चेक की जैसे इंक टेस्ट व अन्य सुरक्षा जांच की जांच करनी होती है। ऐसे में क्लोन चेक को पकड़ा जा सकता है। अगर क्लोन या जाली चेक को नहीं पकड़ा गया और भुगतान हो गया।

ऐसे में जिम्मेदारी चेक को प्रजेंट करने वाली बैंक की होती है। इस केस में जिस खाता में भुगतान हुआ उसको फ्रीज करा दिया गया है। खाताधारक की केवाईसी उचित तरीके से हुई कि नहीं? इसकी भी जांच जरूरी है। केवाईसी करना भी भुगतान लेने वाली बैंक की जिम्मेदारी है।

बैंक कर रहा आगे की कार्रवाई
एसबीआई के उपमहाप्रबंधक (बी एंड ओ) लखनऊ प्रशांत कुमार दास का कहना है कि पांच लाख रुपये से अधिक का चेक भुगतान के लिए आने पर ट्रस्ट के प्रतिनिधि को फोन किया गया था। उनकी तरफ से आपत्ति मिलते ही तुरंत कार्रवाई कर भुगतान रोका गया। भुगतान केलिए चेक प्रजेंट करने वाली बैंक को भी इसकी सूचना दी गई। हमारी सतर्कता से 9.86 लाख रुपये का भुगतान होने से रोका गया। अब आगे की जरूरी कार्रवाई हम कर रहे हैं।

राममंदिर के नाम पर पहले भी हो चुकी है धोखाधड़ी

राममंदिर के नाम पर इससे पहले भी धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है। ट्रस्ट ने इस मामले में भी 12 अप्रैल को अयोध्या कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। राममंदिर के नाम पर दिल्ली निवासी एक युवक ट्रस्ट का लोगो लगाकर मंदिर निर्माण करने के लिए रामलला के नाम से ट्विटर अकाउंट व राममंदिर के नाम से वेबसाइट बनाकर दान एकत्र कर रहा था। ट्रस्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राममंदिर के नाम पर बनाए गए फर्जी वेबसाइट व अकाउंट को तुरंत बंद कराते हुए अयोध्या कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया था।

महाराष्ट्र से जुड़े हैं राममंदिर ट्रस्ट खाते से जालसाजी के तार
राममंदिर ट्रस्ट से जालसाजी के तार महाराष्ट्र से जुड़े हैं, पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खाते से जालसाजी के मामले में डीआईजी/एसएसपी दीपक कुमार का कहना है कि ट्रस्ट के खाते से छह लाख रुपये क्लोनिंग चेक के जरिए निकाले गए हैं।

आरोपी ने खाते से चार लाख रुपये निकाल लिए। दो लाख अभी भी आरोपी के खाते में मौजूद हैं, उसका खाता सीज किया जा चुका है। जालसाजी करने वाले युवक की पहचान कर ली गई है। युवक महाराष्ट्र का रहने वाला है। जांच के लिए दो टीमें अयोध्या से भेजी गई हैं, एक टीम लखनऊ व दूसरी टीम महाराष्ट्र भेजी जा रही है। 

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