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एक बार फिर डॉक्टर की लापरवाही ने ली मासूम की जान, मरने के बाद किया ईसीजी
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 21 Nov 2016 01:02 PM IST
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बेटे की मौत से टूट गए पिता जयकरन
- फोटो : amar ujala
लोहिया अस्पताल में पीलिया से पीड़ित बाराबंकी के पांच साल के बच्चे को 23 घंटे तक इलाज नहीं मिला। परिवार वाले डॉक्टर-नर्स के आगे गिड़गिड़ाते रहे। पर किसी का दिल नहीं पसीजा।
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सीएमएस से शिकायत के बाद डॉक्टर आए। पर कुछ ही मिनटों में बच्चे ने दम तोड़ दिया। मौत से टूटे परिवार ने हंगामा शुरू कर दिया तो डॉक्टर तसल्ली देने के लिए ईसीजी करने लगे।
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पीड़ित परिवार ने सीएम अखिलेश यादव, बाल संरक्षण आयोग, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, डीएम और सीएमओ और सीएमएस को इसकी लिखित शिकायत भेजी है।
बाराबंकी के कैलाशपुरी गांव के जयकरन के बेटे कृष्णा को पीलिया था। उसका इलाज बाराबंकी के ही एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर ने लोहिया अस्पताल जाने की सलाह दी।
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परिवारीजन 19 नवंबर को दोपहर करीब 12 बजे मासूम को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे तो उसे इमरजेंसी में भर्ती कर लिया गया। जयकरन का आरोप है कि भर्ती के बाद कोई इलाज नहीं किया गया। कई बार नर्सों व डॉक्टर से कहा लेकिन किसी ने नहीं सुना।
रविवार सुबह हालत ज्यादा खराब होने लगी तो नर्स से शिकायत की। इस पर नर्स ने उन्हें यह कह कर भगा दिया कि यहां किसने बुलाया था, क्यों नहीं प्राइवेट अस्पताल में ले गए।
करीब 11 बजे तक भी इलाज नहीं मिल पाने पर दूसरे मरीज के तीमारदार ऋषि मिश्रा ने अस्पताल के सीएमएस एमएल डॉ. भार्गव को फोन कर इलाज न मिलने की शिकायत की। सुबह करीब 11:15 बजे जब डॉक्टर आए तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
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सीएमएस से शिकायत के बाद पहुंचे डॉक्टर
बेटे की मौत से दुखी पिता जयकरन
- फोटो : amar ujala
जयकरन का कहना है कि सीएमएस से शिकायत के बाद जब डॉक्टर इलाज के लिए आए तब तक बच्चे की हालत काफी गंभीर हो गई थी। डॉक्टर ने खून का बंदोबस्त करने को कहा।
इसके 10 मिनट बाद ही बच्चे की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि अगर बच्चे का सही समय पर इलाज शुरू किया जाता और खून की कमी बताई जाती तो वह जिंदा होता।
जब परिवारीजनों ने समय से इलाज न मिलने पर अस्पताल के सीएमएस व सीएमओ को लिखित शिकायत करने की बात कही तो सुपरवाइजर ने पिता जयकरन को डरा-धमका कर चुप रहने को कहा। परिवारीजनों ने बताया कि सुपरवाइजर ने कहा, मुंह बंद रखो और चुपचाप शव को लेकर चले जाओ नहीं तो शव को जब्त कर लिया जाएगा।
इससे पहले भी इमरजेंसी में तैनात नर्सों पर लापरवाही का आरोप लग चुका है। करीब महीने भर पहले गोरखपुर की शिवानी (12) की बुखार होने पर इलाज के दौरान मौत के बाद परिवारीजनों ने नर्सों पर बात न सुनने, बदसलूकी और लापरवाही का आरोप लगा कर हंगामा किया था।
उनका आरोप था कि रात भर बच्ची तड़पती रही थी कई बार कहने के बाद भी नर्सों ने नहीं सुना था, साथ ही तीमारदार से बदसलूकी कर भगा दिया था। इसके बाद सुबह बच्ची की मौत हो गई थी।
‘अस्पताल में कभी ब्लड की कमी नहीं होती है। जहां तक बात नर्सों के व्यवहार की है तो इस मामले में पूछताछ करेंगे।’ -ओंकार यादव, सीएमएस, लोहिया अस्पताल
इसके 10 मिनट बाद ही बच्चे की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि अगर बच्चे का सही समय पर इलाज शुरू किया जाता और खून की कमी बताई जाती तो वह जिंदा होता।
जब परिवारीजनों ने समय से इलाज न मिलने पर अस्पताल के सीएमएस व सीएमओ को लिखित शिकायत करने की बात कही तो सुपरवाइजर ने पिता जयकरन को डरा-धमका कर चुप रहने को कहा। परिवारीजनों ने बताया कि सुपरवाइजर ने कहा, मुंह बंद रखो और चुपचाप शव को लेकर चले जाओ नहीं तो शव को जब्त कर लिया जाएगा।
इससे पहले भी इमरजेंसी में तैनात नर्सों पर लापरवाही का आरोप लग चुका है। करीब महीने भर पहले गोरखपुर की शिवानी (12) की बुखार होने पर इलाज के दौरान मौत के बाद परिवारीजनों ने नर्सों पर बात न सुनने, बदसलूकी और लापरवाही का आरोप लगा कर हंगामा किया था।
उनका आरोप था कि रात भर बच्ची तड़पती रही थी कई बार कहने के बाद भी नर्सों ने नहीं सुना था, साथ ही तीमारदार से बदसलूकी कर भगा दिया था। इसके बाद सुबह बच्ची की मौत हो गई थी।
‘अस्पताल में कभी ब्लड की कमी नहीं होती है। जहां तक बात नर्सों के व्यवहार की है तो इस मामले में पूछताछ करेंगे।’ -ओंकार यादव, सीएमएस, लोहिया अस्पताल