सिविल सर्विसेस में शहर के मेधावियों ने लहराया परचम, बताये सफलता के मंत्र
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सिविल सर्विसेस 2017 में राजधानी के कई मेधावियों ने सफलता का परचम लहराते हुए शहर का मान बढ़ाया है। यहां तक पहुंचने के लिए मेधावियों ने कड़ी मेहनत और लगन का परिचय दिया है।
किसी ने दूसरे तो किसी ने चौथे अटेंप्ट में सफलता हासिल की। किसी ने यहां तक पहुंचने के लिए लाखों रुपये के पैकेज वाली अच्छी नौकरी छोड़ दी। सफला का स्वाद चखने वाले और दूसरों को राह दिखाने वाले शहर के मेधावियों ने अमर उजाला के साथ साझा किए अपने सफलता के मंत्र।
असफलता से घबराए नहीं-सुमित कुमार
छोटी-छोटी असफलताओं से कभी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी कमियों को पहचान कर उनको दूर करने का पहले से ज्यादा प्रयास करना चाहिए। यह कहना है कि गाजिपुर निवासी सुमित कुमार जिन्होंने सिविल सिर्विसेज में 940 रैंक प्राप्त की है।
स्कूलिंग करने के बाद सुमित ने आईटी लखनऊ से 2015 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया। उसके बाद वे सिविल सर्विसेस की तैयार में लग गए। उन्होंने तीसरी अटेंप्ट में यह सफलता प्राप्त की है।
अपनी सफलता का श्रेय पिता चौथी राम और माता गिरीजा देवी को समर्पित किया है। तैयारी के दौरान उन्होंने वैकल्पिक विषय सोशियोलॉजी और जीएस में भारतीय संविधान व भारतीय राजनीति पर ज्यादा फोकस किया। सुमित आईएएस के लिए एक और अटेंप्ट करना चाहते हैं।
सक्सेस मंत्रा- बाजार में किताबें तो बहुत हैं लेकिन सभी पढ़ने की आवश्यकता नहीं। अपने लक्ष्य पर फोकस रहा और सिलेक्टेड पढ़ाई कर अभ्यास किया।
टिप्स- अपने लक्ष्य व पढ़ाई के प्रति फोकस रहें। असफलताओं से मायूस न हों और अपने माता-पिता को खुश रखें।
बडे़ भाई से मिली प्रेरणा-पलाश बंसल
गोमती नगर स्थित विपुखंड निवासी पलाश बंसल शुरू से ही सिविल सर्विसेस में जाना चाहते थे। बड़े भाई रजत बंसल पहले से ही आईएएस की तैयारी कर रहे थे और वर्तमान में वे छत्तिसगढ़ में म्यूनिसपल कमिश्नर हैं।
बड़े भाई पलाश के प्रेरणाश्रोत बने और उसने और लगन से तैयारी शुरू कर दी। समय-समय पर बड़े भाई का साथ मिला और दूसरे अटेंप्ट में पलाश ने 112 रैंक अर्जित किया। घर में भी पलाश को तैयारी में खूब साथ मिला। पिता देशराज बंसल आईएफएस से सेवानिवृत्त हैं।
पलाश ने लामार्ट से हाईस्कूल व दिल्ली स्थित डीपीएस से इंटर की पढ़ाई की। वर्ष 2016 में आईआईटी कानपुर से एमएससी इकोनॉमिक्स की पढ़ाई खत्म करने के बाद वे पूरी तरह से सिविल सर्विसेस की तैयारी में जुट गए। पलाश ने बताया कि उसने हमेशा फोकस रहकर पढ़ाई की।
कोचिंग के साथ अन्य किताबों के जरिए खुद के नोट्स तैयार किए। समय-समय पर अभ्यास के साथ रीविजन भी करते रहे।
सक्सेस मंत्रा- कोचिंग और बाजार में उपलब्ध अन्य किताबों से खुद के नोट्स तैयार किया। फोकस रहकर तैयारी की। जरूरी टॉपिक्स पर खास ध्यान दिया।
टिप्स- लगन के साथ लगे रहें सफलता जरूर मिलेगी। असफलता के बाद अपनी कमियों को दूर कर फिर से तैयारी करें।
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
अपने तीसरे प्रयास में सफलता पाने वाले विशाल सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारना और सही लोगों को इसका लाभ दिलाना चाहते हैं। कल्याणपुर निवासी विशाल ने कहा कि योजनाएं तो बहुत हैं लेकिन उसे प्रभावी नहीं बनाया जा रहा है। इसे सही लोगों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है, खासकर महिलाओं व एससी-एसटी से जुड़ी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। पिता हरि प्रसाद मिश्रा, कन्नौज इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त शिक्षक व मां सुधा मिश्रा गृहणी हैं। बहन रंजना मिश्रा शिक्षिका व भाई विवेक मिश्रा डिफेंस में ऑडिटर हैं। परिवार खासकर भाई ने लक्ष्य पाने में बहुत सहयोग किया। विशाल शुरूआत से पढ़ाई में सामान्य थे। उन्होंने जय नारायण विद्या मंदिर कानपुर से हाईस्कूल और बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से इंटर किया। एचबीटीयू से बीटेक और आईआईटी कानपुर से एमटेक करने के बाद भी विशाल ने इस सेवा को चुना।
अभी रैंक से संतुष्ट नहीं
तीसरे प्रयास में सफलता पाने वाली गोमती नगर निवासी अंकिता मिश्रा अभी अपनी रैंक से संतुष्ट नहीं हैं। अंकिता एक बार और प्रयास करेंगी। क्योंकि वो बेहतर पोजीशन लाकर सामाजिक समस्याओं और महिला सशक्तीकरण के लिए काम करना चाहती हैं। हाल की लड़कियों के साथ हुई घटना से आहत अंकिता इसके लिए सख्त कदम उठाएंगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं अंदर तक झकझोर देती हैं। इन्हें रोकने के लिए कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने का काम करूंगी। अंकिता के पिता बीके मिश्रा बिजनेसमैन हैं। मां नीलम मिश्रा गृहणी हैं। भाई सिद्धांत 12वीं में है और बहन सौम्या एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। एचपी चिल्ड्रेन एकेडमी गोरखपुर से हाईस्कूल व डीपीएस नोएडा से इंटर के बाद स्नातक कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।
आईपीएस के बाद आईएएस में सेलेक्शन
एलडीए के इंजीनियर के बेटे का हुआ चयन
एलडीए में अधिशाषी अभियंता अवधेश तिवारी के बेटे अंकुर तिवारी का चयन यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा में हुआ है। गोमतीनगर के विनीतखंड में रहने वाले अंकुर की रैंक 543 है। उनका कहना है कि रेलवे सेवा में इससे चयन होना पक्का है। बिट्स पिलानी से कैमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक अंकुर अभी नेशनल मिनरल डवलपमेंट कॉरपोरेशन में सहायक प्रबंधक के पद पर कर्नाटक में तैनात हैं। केंद्रीय सेवा के साथ ही वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे। अंकुर की मां मीना तिवारी गृहिणी हैं जिन्होंने समय-समय पर प्रेरित कर उनकी सफलता में पूरी मदद की।