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तीन दिन में मुंह का घाव ठीक न हो तो कराएं जांच

Fri, 12 Feb 2016 03:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 12 Feb 2016 03:51 PM IST
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cancer workshop in kgmu

मुंह के अंदर सफेद चक्कते या खुरदरापन, मुंह से खून आना, लाल दानेदार चक्कते, छोटे-छोटे घाव, मुंह कम खुलना जैसी समस्याएं हैं तो सावधान हो जाएं। तंबाकू सेवन के कारण ये दिक्कतें पैदा होती हैं।

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समय पर जांच करा ली जाए तो इसका इलाज संभव है। केजीएमयू के ओरल पैथोलॉजी विभाग की इंटरनेशनल ओरल प्री कैंसर एंड कैंसर कांग्रेस: ट्रांसलेशनल आंकोलॉजी एंड जीनोमिक्स (आईओपीसीसीसी)-2016 में यह जानकारी डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने दी।
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ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की डॉ. दिव्या मेहरात्रा ने बताया कि छाले निकलना, घाव, गांठ का लंबे समय तक ठीक न होना, बोलने, निगलने में परेशानी, अधिक लार बनना, मुंह के किसी भाग में लगातार दर्द, जीभ, होठों और गालों में जलन, गले में दर्द रहित गांठ, कभी-कभी कान में दर्द कैंसर के लक्षण हैं।
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उद्घाटन व्याख्यान में रॉयल मार्सडन इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर लंदन के डॉ. साइरस केरावाला ने यूरोप में मुंह के कैंसर मरीजों के इलाज के नए प्रोटोकॉल नाइस-नेशनल इ गाइड लाइन की जानकारी दी।

बिना बॉयोप्सी के भी कैंसर की जानकारी

cancer workshop in kgmu

उन्होंने बताया कि यदि मरीज में कैंसर की जल्दी पहचान हो जाती है तो इलेक्टिव ट्रीटमेंट से मरीज को बचाने के 72 फीसदी चांस होते हैं।

जबकि एडवांस स्टेज में थेरेपटिक ट्रीटमेंट में 50 फीसदी ही बचने की उम्मीद होती है। 1 से 2 सेंटीमीटर तक का घाव होने पर कैंसर के ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है।

केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत ने कहा कि मुंह के कैंसर पर नियंत्रण के लिए तंबाकू नियंत्रण जरूरी है। तंबाकू से मिलने वाले टैक्स और मरीजों की संख्या, उनके इलाज की तुलना की जाए पता चलता कि कमाई से ज्यादा नुकसान हो रहा है।

तंबाकू बिक्री को नियंत्रित कर और जागरूकता से मुंह के कैंसर से बचा जा सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. एलके माहेश्वरी ने कहा कि इलाज के लिए डॉक्टर के साथ-साथ मरीज को सपोर्टिंग स्टाफ की जरूरत है।

इसमें पैरामेडिकल से लेकर काउंसलर तक शामिल है। इसके अलावा कॉम्बिनेशन थेरेपी को भी इलाज में शामिल किए जाने पर विचार करना होगा। उन्होंने भविष्य में पर्सनल मेडिसिन की भी वकालत की।

ओरल पैथोलॉजी विभाग के हेड प्रो. शालीन चंद्रा ने बताया कि अब ऐसी सुविधाएं आ गई हैं जिनसे बिना बॉयोप्सी के भी कैंसर का पता लग सकता है।

इन्हें वर्चुअल बॉयोप्सी कहा जाता है। इंडोस्कोपिक और फ्लोरेंसेंट रोशनी से कैंसर की पहचान करना संभव हो गया है। इससे कैंसर कोशिकाओं की पहचान हो जाती है।


केजीएमयू में मुंह के कैंसर पर हुयी वर्कशाप

cancer workshop in kgmu

डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने बताया कि प्री कैंसर स्टेज ल्यूकोपीकिया के बाद जरूरी नहीं है कि सभी लोगों को कैंसर हो। 14 से 17 फीसदी लोगों को ही इसकी संभावना होती है।

मुंह के कैंसर के लक्षण काफी पहले ही दिखने लगते हैं। हफ्ते में एक बार सुबह दांत साफ करने के बाद आइने के सामने मुंह का मुआयना करें। खासतौर पर वे,जो किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करते हों।

केजीएमयू में मुंह के कैंसर पर वर्कशॉप हुयी। जिसमें यह बताया गया कि मरीजों को नीचे दिये गये लक्षण हो सकते है।
•मुंह बंद रखकर उंगलियों के सिरा से पकड़कर दोनों होठों को बारी-बारी से उठाएं और देखें।

•दोनों होठों को हटाकर दांतों को साथ रखकर मसूढ़े को सावधानी से देखें।
•मुंह को पूरा खोलकर तालू, गले के पास और जीभ के नीचे मुआयना करें।
•गालों के भीतरी हिस्से को भी ठीक से देखें। यहां कहीं छाले, सफेद दाग या लाल चकता, गांठ या सूजन तो नहीं।
•मसूढ़ों से खून तो नहीं निकल रहा?
•मुंह में काफी लंबे समय तक छाले का रहना
•मस्सा का लगातार बढ़ना, ब्लीडिंग या मवाद होना
•ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो


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