आयुष्मान योजना: कैंसर के 612 मरीजों में केजीएमयू ने किया 226 का इलाज
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आयुष्मान योजना के कार्ड धारकों को इलाज देने के मामले में केजीएमयू पहले पायदान पर बना हुआ है। आयुष्मान लाभार्थी के इलाज में निजी अस्पताल हीमो डायलिसिस पर जोर दे रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में कैंसर, स्टंट लगाने और प्रसव के लाभार्थी सर्वाधिक आए हैं। घुटना बदलने के मामले में निजी अस्पतालों ने बाजी मार ली है।
राजधानी में 30 सरकारी और 129 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत हैं। योजना में अब तक 13,805 मरीजों का इलाज किया गया है। इनमें निजी अस्पताल में 7,172 और सरकारी अस्पताल में 6633 मरीजों का इलाज किया गया। राजधानी में योजना के तहत 2,79,930 परिवार पंजीकृत हैं। लेकिन यहां बड़ी संख्या में आसपास के जिलों के मरीज आते हैं।
15 सितंबर तक मरीजों के इलाज के आंकड़े देखें तो सरकारी अस्पताल कैंसर के इलाज में नंबर एक पर हैं। आयुष्मान के तहत कैंसर के कुल 647 मरीजों का इलाज किया गया है। इसमें अकेले केजीएमयू ने 226 मरीजों को राहत दी है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 416 कैंसर मरीजों का इलाज किया गया है। सरकारी अस्पताल में दूसरे नंबर पर स्टंट लगाए गए हैं।
इनकी संख्या 290 है। तीसरे नंबर पर 214 केस प्रसव के हुए हैं। निजी अस्पतालों में सर्वाधिक मरीजों की हीमोडायलिसिस की गई है। इनकी संख्या 1343 है। सरकारी में 132 मरीजों की डायलिसिस की गई है। कोलेस्टॉमी के केस प्राइवेट में 207 और निजी में 103 किए गए हैं।
घुटना बदलने में निजी अस्पताल आगे
आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के हिप रिप्लेसमेंट के मामले में 42-42 मरीजों को राहत देकर प्राइवेट और सरकारी बराबरी पर हैं। इसी तरह नी रिप्लेंसमेंट में निजी अस्पतालों ने 11 मरीजों को राहत देकर बाजी मार ली है, जबकि सरकारी अस्पताल सिर्फ सात मरीजों का नी रिप्लेसमेंट कर पाए हैं।
यहां करें शिकायत और दें अपने सुझाव
आयुष्मान योजना के तहत अब भी लाभार्थियों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अमर उजाला ने एक अभियान की शुरूआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई शिकायत या सुझाव हो तो हमें बताएं।
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