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विश्व कैंसर दिवस पर विशेष : भ्रांतियां छोड़ें, इलाज करा जीएं खुशहाल जिंदगी
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शीला
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चंद्रभान यादव
लखनऊ। बायोप्सी या किसी तरह का चीरा लगने से कैंसर बढ़ता नहीं है। इससे कैंसर की स्थिति की जानकारी मिल जाती है। बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक इलाज शुरू करते हैं। इसलिए किसी भी भ्रांति में न पड़कर बेझिझक इसका इलाज कराने की जरूरत है। इलाज कराने के बाद तमाम लोग खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।
केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधीर सिंह बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले मरीज अक्सर सवाल करते हैं कि बार-बार रेडियोथेरेपी करा रहे हैं, जिंदगी बचेगी या नहीं। इसका जवाब है कि पहले, दूसरे और तीसरे स्टेज तक के कैंसर के मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है। अब ज्यादातर कैंसर की पहचान शुरुआती दौर में ही हो जाती है। खासतौर से ब्रेस्ट, सर्वाइकल, स्किन, मुंह आदि के कैंसर के लक्षण शुरू में ही पहचान में आ जाते हैं। केजीएमयू क्वीनमेरी अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी जैसवार कहती हैं कि 40 साल की उम्र पार करने वाली हर महिला को एक बार स्क्रीनिंग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में अब कैंसर की रजिस्ट्री शुरू हो गई है। इससे अगले साल तक कैंसर के आंकड़ों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
इलाज के बाद लौटी आंखों की रोशनी
बस्ती की शीला पांडेय बताती हैं, मेरी आंखों की रोशनी कम हो रही थी। कई जगह इलाज कराने के बाद लोहिया संस्थान पहुंची। यहां न्यूरो सर्र्जन डॉ. कुलदीप यादव ने जांच की तो पता चला कि ब्रेन ट्यूमर है, जो आंख की विजन वाली नस पर दबाव बना रहा है। इसे डाक्टर ने मेनिंगोमा ट्यूमर बताया। कई लोगों ने सलाह दी कि ट्यूमर के कैंसरग्रस्त होने से जिंदगी नहीं बचेगी। इसलिए सर्जरी न कराएं, लेकिन डॉक्टर की सलाह मानी और अब पूरी तरह से ठीक हूं। मेरी आंखों से दिखाई भी देने लगा है।
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मर्ज को छिपाएं नहीं, इलाज कराएं
लखनऊ की पुष्पा त्रिपाठी गृहिणी हैं। वह बताती हैं, मुझे 2017 में स्तन में गांठ जैसा महसूस हुआ। कुछ समय तक शर्म बस छिपाती रही, लेकिन बाद में दर्द होने लगा। 2018 में केजीएमयू पहुंची तो जांच में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी हुई। अब पूरी तरह से ठीक हूं। मैं राजधानी सहित देशभर की महिलाओं से कहना चाहती हूं कि बीमारी को छिपाएं नहीं। तत्काल बताएं और इलाज क राएं। सर्जरी से भी डरें नहीं।
हमने सिर्फ डॉक्टर की सुनी
नीतू रस्तोगी भी गृहिणी हैं। वह कहती हैं, मुझे मार्च 2016 में स्तन कैंसर होने की पुष्टि हुई। पूरा परिवार सदमे की स्थिति में था। रिश्तेदारों मेंकुछ ने कहा कि सर्जरी कराओ और कुछ इस पक्ष में नहीं थे। मैं केजीएमयू में डा. आनंद मिश्रा से मिली। उन्होंने समझाया और बताया कि सर्जरी के बार भी सामान्य जिंदगी जीया जा सकता है। सर्जरी से कैंसर बढ़ना भ्रम है। इस भ्रम को तोड़ने की जरूरत है।
100 से अधिक किस्म के कैंसर
कैंसर के 100 से अधिक प्रकार माने जा रहे हैं। त्वचा से लेकर दिमाग, मुंह, गले, ग्रंथियों, अस्थियों, शिराओं, रक्त, स्तन, प्रजनन अंगों, फेफड़ा सहित हर अंग को यह प्रभावित कर सकता है। इनके नाम अक्सर उस सेल से जुड़े होते हैं जहां से ये शुरू होते हैं। इसमें कोशिकाओं से जुड़े कैंसर को कार्सिनोमा, टिश्यू व मांसपेशियों से संबंधित को सरकोमा, लिम्प नोड्स और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े टिश्यूज में होने वाला कैंसर लिम्पोमा श्रेणी में गिना जाता है। शिराओं में फैलने वाले और बच्चों में होने वाले को ल्यूकेमिया, ग्रंथियों की कोशिकाओं में होने वाले को एडेनोमास कहते हैं।
लंग कैंसर में मृत्युदर ज्यादा
विभिन्न शोध में स्पष्ट हुआ है कि स्तन कैंसर से पीड़ित 20 प्रतिशत महिला और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित 25 प्रतिशत पुरुष रोग का पता लगने के बाद कम से कम सात वर्ष तक जीवित रहते हैं, लेकिन फेफड़े के कैंसर से पीड़ित 73 फीसदी मरीज सालभर में दम तोड़ देते हैं। फेफड़े के कैंसर से पीड़ित अधिकतम पांच साल तक ही जीवित रह पाता है। कैंसर से मौत के मामले में सबसे ज्यादा मृत्युदर लंग कैंसर के मरीजों की है।
कैंसर से बचाव का तरीका
- मुंह में घाव या छाला, पेशाब में खून आना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है।
- महिलाएं वजन नियंत्रित रखें, 30 से 35 साल तक पहला बच्चा प्लान कर लें, छह माह तक स्तनपान कराएं।
- स्तन कैंसर पांच फीसदी मरीज आनुवंशिक होते हैं। परिवार में किसी को है तो अलर्र्ट रहें।
- स्तन में गांठ, निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे गांठ होने पर मैमोग्राफी कराएं।
- हरी सब्जियां व फाइबर युक्त पौष्टिक आहार लें, विटामिन सी और ए की कमी न हो।
- सिगरेट बीड़ी और शराब से दूर रहें, नियमित व्यायाम के साथ वजन जरूरी जांचें।
(कैंसर विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित)
कैंसर से संबंधित फैक्ट फाइल
- स्तन कैंसर के दो नए मरीजों में एक मरीज की मौत
- तंबाकू से हर दिन 2500 कैंसर पीड़ितों की मौत
- धूम्रपान से पांच में से एक मरीज की मौत
- धूम्रपान से 20 में से एक महिला की मौत
- समय पर इलाज व जांच न होने से 10 फीसदी की मौत
भारत में मुख कैंसर के आंकड़े
- 75 हजार ओरल कैंसर के मरीज हर साल
- 45 हजार मरीजों की हर साल होती है मौत
- कुल कैंसर में 40 फीसदी ओरल कैंसर
- तंबाकू सेवन से 75 से 90 फीसदी को मुख कैंसर
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लखनऊ। बायोप्सी या किसी तरह का चीरा लगने से कैंसर बढ़ता नहीं है। इससे कैंसर की स्थिति की जानकारी मिल जाती है। बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक इलाज शुरू करते हैं। इसलिए किसी भी भ्रांति में न पड़कर बेझिझक इसका इलाज कराने की जरूरत है। इलाज कराने के बाद तमाम लोग खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।
केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधीर सिंह बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले मरीज अक्सर सवाल करते हैं कि बार-बार रेडियोथेरेपी करा रहे हैं, जिंदगी बचेगी या नहीं। इसका जवाब है कि पहले, दूसरे और तीसरे स्टेज तक के कैंसर के मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है। अब ज्यादातर कैंसर की पहचान शुरुआती दौर में ही हो जाती है। खासतौर से ब्रेस्ट, सर्वाइकल, स्किन, मुंह आदि के कैंसर के लक्षण शुरू में ही पहचान में आ जाते हैं। केजीएमयू क्वीनमेरी अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी जैसवार कहती हैं कि 40 साल की उम्र पार करने वाली हर महिला को एक बार स्क्रीनिंग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में अब कैंसर की रजिस्ट्री शुरू हो गई है। इससे अगले साल तक कैंसर के आंकड़ों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
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इलाज के बाद लौटी आंखों की रोशनी
बस्ती की शीला पांडेय बताती हैं, मेरी आंखों की रोशनी कम हो रही थी। कई जगह इलाज कराने के बाद लोहिया संस्थान पहुंची। यहां न्यूरो सर्र्जन डॉ. कुलदीप यादव ने जांच की तो पता चला कि ब्रेन ट्यूमर है, जो आंख की विजन वाली नस पर दबाव बना रहा है। इसे डाक्टर ने मेनिंगोमा ट्यूमर बताया। कई लोगों ने सलाह दी कि ट्यूमर के कैंसरग्रस्त होने से जिंदगी नहीं बचेगी। इसलिए सर्जरी न कराएं, लेकिन डॉक्टर की सलाह मानी और अब पूरी तरह से ठीक हूं। मेरी आंखों से दिखाई भी देने लगा है।
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मर्ज को छिपाएं नहीं, इलाज कराएं
लखनऊ की पुष्पा त्रिपाठी गृहिणी हैं। वह बताती हैं, मुझे 2017 में स्तन में गांठ जैसा महसूस हुआ। कुछ समय तक शर्म बस छिपाती रही, लेकिन बाद में दर्द होने लगा। 2018 में केजीएमयू पहुंची तो जांच में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी हुई। अब पूरी तरह से ठीक हूं। मैं राजधानी सहित देशभर की महिलाओं से कहना चाहती हूं कि बीमारी को छिपाएं नहीं। तत्काल बताएं और इलाज क राएं। सर्जरी से भी डरें नहीं।
हमने सिर्फ डॉक्टर की सुनी
नीतू रस्तोगी भी गृहिणी हैं। वह कहती हैं, मुझे मार्च 2016 में स्तन कैंसर होने की पुष्टि हुई। पूरा परिवार सदमे की स्थिति में था। रिश्तेदारों मेंकुछ ने कहा कि सर्जरी कराओ और कुछ इस पक्ष में नहीं थे। मैं केजीएमयू में डा. आनंद मिश्रा से मिली। उन्होंने समझाया और बताया कि सर्जरी के बार भी सामान्य जिंदगी जीया जा सकता है। सर्जरी से कैंसर बढ़ना भ्रम है। इस भ्रम को तोड़ने की जरूरत है।
100 से अधिक किस्म के कैंसर
कैंसर के 100 से अधिक प्रकार माने जा रहे हैं। त्वचा से लेकर दिमाग, मुंह, गले, ग्रंथियों, अस्थियों, शिराओं, रक्त, स्तन, प्रजनन अंगों, फेफड़ा सहित हर अंग को यह प्रभावित कर सकता है। इनके नाम अक्सर उस सेल से जुड़े होते हैं जहां से ये शुरू होते हैं। इसमें कोशिकाओं से जुड़े कैंसर को कार्सिनोमा, टिश्यू व मांसपेशियों से संबंधित को सरकोमा, लिम्प नोड्स और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े टिश्यूज में होने वाला कैंसर लिम्पोमा श्रेणी में गिना जाता है। शिराओं में फैलने वाले और बच्चों में होने वाले को ल्यूकेमिया, ग्रंथियों की कोशिकाओं में होने वाले को एडेनोमास कहते हैं।
लंग कैंसर में मृत्युदर ज्यादा
विभिन्न शोध में स्पष्ट हुआ है कि स्तन कैंसर से पीड़ित 20 प्रतिशत महिला और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित 25 प्रतिशत पुरुष रोग का पता लगने के बाद कम से कम सात वर्ष तक जीवित रहते हैं, लेकिन फेफड़े के कैंसर से पीड़ित 73 फीसदी मरीज सालभर में दम तोड़ देते हैं। फेफड़े के कैंसर से पीड़ित अधिकतम पांच साल तक ही जीवित रह पाता है। कैंसर से मौत के मामले में सबसे ज्यादा मृत्युदर लंग कैंसर के मरीजों की है।
कैंसर से बचाव का तरीका
- मुंह में घाव या छाला, पेशाब में खून आना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है।
- महिलाएं वजन नियंत्रित रखें, 30 से 35 साल तक पहला बच्चा प्लान कर लें, छह माह तक स्तनपान कराएं।
- स्तन कैंसर पांच फीसदी मरीज आनुवंशिक होते हैं। परिवार में किसी को है तो अलर्र्ट रहें।
- स्तन में गांठ, निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे गांठ होने पर मैमोग्राफी कराएं।
- हरी सब्जियां व फाइबर युक्त पौष्टिक आहार लें, विटामिन सी और ए की कमी न हो।
- सिगरेट बीड़ी और शराब से दूर रहें, नियमित व्यायाम के साथ वजन जरूरी जांचें।
(कैंसर विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित)
कैंसर से संबंधित फैक्ट फाइल
- स्तन कैंसर के दो नए मरीजों में एक मरीज की मौत
- तंबाकू से हर दिन 2500 कैंसर पीड़ितों की मौत
- धूम्रपान से पांच में से एक मरीज की मौत
- धूम्रपान से 20 में से एक महिला की मौत
- समय पर इलाज व जांच न होने से 10 फीसदी की मौत
भारत में मुख कैंसर के आंकड़े
- 75 हजार ओरल कैंसर के मरीज हर साल
- 45 हजार मरीजों की हर साल होती है मौत
- कुल कैंसर में 40 फीसदी ओरल कैंसर
- तंबाकू सेवन से 75 से 90 फीसदी को मुख कैंसर

नीतू- फोटो : ??? ?????

पुष्पा- फोटो : ??? ?????