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जरूरी खबर: संबद्धता बदलते ही 955 से 6000 रुपये हो गई छात्रों की फीस, कानपुर विवि से लविवि आए छात्रों पर पड़ेगा भार
Thu, 29 Jul 2021 12:40 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 29 Jul 2021 12:40 PM IST
सार
फीस की विसंगतियों को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित जागृति कॉलेज एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल से गुहार लगाई है। उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन भी राज्यपाल को सौंपा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध रहे चार जिलों के कॉलेजों की लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध होते ही फीस लगभग छह गुना बढ़ गई है। कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के प्रति छात्र को जहां 955 रुपये शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब 6000 रुपये शुल्क देना होगा।
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फीस की इन्हीं विसंगतियों को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित जागृति कॉलेज एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल से गुहार लगाई है। उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन भी राज्यपाल को सौंपा है।
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एसोसिएशन का कहना है कि कानपुर विवि व लखनऊ विश्वविद्यालय की फीस में छह गुना का अंतर है। एसोसिएशन ने राज्यपाल से छात्र हित में इस विसंगति को दूर करने की पुरजोर अपील की है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अध्यक्ष एडवोकेट आदर्श दीपक मिश्रा ने किया, जबकि प्रदेश मुख्य महासचिव धीरज सिंह चौहान, संरक्षक सुनील कुमार मिश्र, विधिक सलाहकार डॉ. आयुष्मान शुक्ला, रणन्जय सिंह, विनोद पांडे मौजूद रहे। दरअसल, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, रायबरेली जिले के कॉलेज कानपुर विवि से लविवि से संबद्ध हुए हैं।
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एसोसिएशन का आरोप है कि कानपुर विवि प्रति छात्र 955 रुपये शुल्क लेता था, लेकिन लविवि में आने के बाद छात्रों को 6000 रुपये तक देना होगा। एसोसिएशन ने दलील दी कि इन जिलों में कमजोर आर्थिक वर्ग के छात्र पढ़ते हैं। वे इतना ज्यादा शुल्क नहीं दे पाएंगे। उन्हें मजबूरन दूसरे जिलों में कानपुर विवि के महाविद्यालयों में दाखिला लेना पड़ सकता है। उन्होंने शुल्क के इस विसंगति को दूर करने की अपील की है।
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