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महिला वैज्ञानिक: कौन थीं कमला सोहोनी? महिला के कारण आईआईएससी में नहीं मिला प्रवेश, फिर कैम्ब्रिज से की पीएचडी
Sun, 04 Oct 2026 03:37 PM IST
शिवम तिवारी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sun, 04 Oct 2026 03:37 PM IST
सार
कमला सोहोनी भारत की पहली महिला वैज्ञानिकों में शामिल थीं, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में पीएचडी हासिल की। महिला होने के कारण उन्हें भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रवेश के लिए संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट पूरी की और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के लिए नई राह बनाई।
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विज्ञान की दुनिया में कमला सोहोनी का नाम क्यों खास है?
- फोटो : AI Generated
विस्तार
भारत में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ना आज की तुलना में काफी मुश्किल था। ऐसे समय में कमला सोहोनी ने अपनी पढ़ाई और शोध के जरिए एक नई मिसाल कायम की। उन्हें व्यापक रूप से विज्ञान के किसी क्षेत्र में पीएचडी हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 1939 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि पूरी की। उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा केवल एक डिग्री हासिल करने की कहानी नहीं थी, बल्कि उस दौर में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और शोध के रास्ते खोलने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि भी थी।
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कमला सोहोनी की पढ़ाई कहां से शुरू हुई?
कमला सोहोनी का जन्म 1911 में हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि विज्ञान और पढ़ाई में थी। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसमें प्रथम श्रेणी के अंक हासिल किए। स्नातक के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने और शोध के क्षेत्र में जाने का फैसला किया। इसके लिए उनका अगला पड़ाव बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी आईआईएससी बना। उस समय भारत में महिलाओं के लिए उच्च स्तर की वैज्ञानिक शिक्षा और शोध के अवसर काफी सीमित थे।
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आईआईएससी में उन्हें मुश्किल क्यों हुई?
कमला सोहोनी ने 1933 में आईआईएससी में जैव रसायन के शोध छात्र के रूप में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। हालांकि शुरुआत में उन्हें केवल महिला होने के कारण प्रवेश नहीं दिया गया। उस समय वैज्ञानिक शोध और उच्च शिक्षा के संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम थी। इसके बावजूद कमला सोहोनी ने हार नहीं मानी और संस्थान में पढ़ाई का अवसर पाने के लिए प्रयास जारी रखा। बाद में उन्हें कुछ शर्तों के साथ आईआईएससी में प्रवेश मिला और उन्होंने वहां अपना शोध शुरू किया। उनका प्रवेश भारतीय विज्ञान और उच्च शिक्षा के इतिहास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
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