भीख मांग रहा पूरा परिवार, पर एक-दूसरे का नाम तक नहीं जानते, मां के बताए दो-दो नाम
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लखनऊ शहर को बाल भिक्षावृत्ति मुक्त करने के अभियान की शुरुआत हजरतगंज से हुई। अटल चौक चौराहे व सिकंदरबाग चौराहे से सात बच्चों को रेस्क्यू किया गया। बाल कल्याण समिति की मानें तो भीख मांग रहे बच्चों के साथ महिलाएं भी थीं, जो इनकी मां होने का दावा कर रही थीं। हालांकि, पूछताछ में कोई एक दूसरे का नाम तक नहीं बता सका। मामला संदिग्ध लग रहा है। समिति ने बाल भिक्षावृत्ति गिरोह सक्रिय होने की भी आशंका जताई है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था की अध्यक्षता में चाइल्डलाइन, श्रम विभाग, महिला कल्याण, एएचटीयू की संयुक्त टीम ने अभियान शुरू किया है। रेस्क्यू किए गए बच्चे बाल कल्याण समिति लखनऊ के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
समिति के आदेशानुसार बच्चों का कोविड टेस्ट कराकर राजकीय बाल गृह शिशु हजरतगंज व राजकीय बालगृह बालक मोहान रोड भेजा गया। अभियान में निरीक्षक अभय प्रकाश मिश्र, श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजेश कुमार सिंह, सूर्यकांत चौरसिया व चाइल्ड लाइन से काउंसलर कृष्ण प्रताप शर्मा, विजय शंकर पाठक, बृजेंद्र प्रताप शर्मा थे।
सत्यापन के बाद ही जाने देंगे बच्चों को
सीडब्ल्यूसी की मेंबर मजिस्ट्रेट डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि मामला संदिग्ध लग रहा है। स्थानीय पार्षद या सभासद के सत्यापित करने के बाद ही बच्चों को सौंपा जाएगा। तब तक वे राजकीय शिशु गृह में रहेंगे। अभियान के पहले चरण में हजरतगंज, इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा, अवध हॉस्पिटल चौराहा, टेढ़ी पुलिया, पालीटेक्निक और इंदिरागांधी प्रतिष्ठान चौराहा चुना गया है।
मां के दो-दो नाम बताए
सीडब्ल्यूसी सदस्य ने जब एक महिला ने पूछा, यह तुम्हारा बच्चा है तो इसका नाम बताओ तो उसने कहा- नहीं मालूम। वहीं, जब बच्चे से मां का नाम पूछा गया कि पहले उसने पार्वती फिर मालती कहा। पूछताछ का यह सिलसिला प्राग नारायण रोड स्थित चाइल्ड लाइन के ऑफिस में काफी देर तक चला।