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सीएजी रिपोर्ट में खुलासा : बिना अनुमति के कॉरिडोर से हटाया गया था महानगर मेट्रो स्टेशन

Sat, 21 Feb 2026 02:20 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:20 AM IST
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CAG report reveals Mahanagar Metro station was removed from corridor without permission
 मेट्रो ट्रेन।
लखनऊ। लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना फेज-1 ए (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर) में स्वीकृत 22 मेट्रो स्टेशन के सापेक्ष 21 का ही निर्माण किया गया था। 22वां महानगर मेट्रो स्टेशन कॉरिडोर से हटा दिया गया था। इसके लिए संबंधित अथॉरिटी से अनुमति तक नहीं ली गई थी, जबकि जहां पर ये स्टेशन बनना था, वहां दैनिक यात्री क्षमता दूसरे स्थान पर है।
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ये खुलासा शुक्रवार को दोनों सदनों के पटल पर रखी गई लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण एवं संचालन की सीएजी रिपोर्ट में हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के तहत 22.88 किमी में 22 स्टेशन बनने थे। डीपीआर से लेकर अन्य सभी दस्तावेजों में 22 स्टेशन बनाए जाने का ही तथ्य था। स्वीकृति भी थी। परियोजना रिपोर्ट में महानगर मेट्रो स्टेशन को वर्ष 2015 में दैनिक यात्री क्षमता के मद्देनजर तीसरा व वर्ष 2020 में दूसरे स्थान पर होना था।
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सीएजी रिपोर्ट में पाया गया कि महानगर स्टेशन नहीं बनाया गया। ये स्टेशन परियोजना से बाहर किए जाने संबंधी कोई भी प्रस्ताव केंद्र, राज्य सरकार या संबंधित अथॉरिटी से स्वीकृति लेने संबंधी नहीं मिला। स्पष्ट हुआ कि बिना किसी स्वीकृति के महानगर स्टेशन परियोजना से बाहर कर दिया गया। इससे वहां के यात्रियों को इसकी सुविधा नहीं मिल सकी।
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शर्तों का किया गया उल्लंघन
भारत सरकार की सैद्धांतिक स्वीकृति के तहत कई शर्तों का भी पालन नहीं किया गया। शर्तों के मुताबिक जिला शहरी परिवहन निधि की स्थापना, विज्ञापन व पार्किंग नीति तैयार करना और समय-समय पर किराया संशोधन करना था। सीएजी रिपोर्ट में सामने आया कि इन शर्तों का पालन नहीं किया गया।

विवादित जमीन पर डिपो का निर्माण

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए 25.80 हे भूमि खरीदी गई थी। इसमें से 1.98 हे. जमीन विवादित थी। जिसका मामला कोर्ट में विचाराधीन था। विवादित जमीन पर भी डिपो का निर्माण कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक ये निर्माण वित्तीय नियमों विरुद्ध था।

यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़...

मेट्रो के संचालन के लिए अंतरिम गति प्रमाण लिया जाता है। इसकी अवधि पांच वर्ष के लिए होती है। जिससे पता चलता है कि मेट्रो का सफर कितना सुरक्षित है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक पांच वर्ष बाद प्रमाणपत्र का नवीनीकरण ही नहीं कराया गया। इससे पहिये की घिसावट व एडजस्टमेंट की आवश्यकता पता नहीं की जा सकती है।

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