'सामाजिक बंटवारे के खिलाफ लड़ाई छेड़े लखनऊ’
विदेश राज्यमंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह ने कहा कि 1857 के आंदोलन में बेगम हजरत महल ने जैसी भूमिका अदा की थी, बंटे हुए समाज के खिलाफ वैसी ही लड़ाई एक बार फिर लखनऊ से ही छेड़नी होगी।
उन्होंने अंग्रेज इतिहासकारों के हवाले से कहा कि 1850 तक लखनऊ दुनिया के श्रेष्ठ शहरों में शुमार था, लेकिन जब अंग्रेजों ने इसे अपने आधिपत्य में लिया, उन्हें अहसास हो गया था कि भारतीयों की एकता उनके लिए सबसे बड़ा खतरा है।
इसे तोड़ने के लिए उन्होंने धार्मिक दरार पैदा की, जिससे समाज बंट गया और अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक आवाज नहीं उठा सका।
वीके सिंह शनिवार को यहां सिटी मॉण्टेसरी स्कूल में आयोजित 16वें न्यायाधीश सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। कार्यक्रम में 60 से अधिक देशों के मौजूदा व पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, चीफ जस्टिस, जस्टिस, कानूनविद आदि उपस्थित थे।
एकता के कारण ही सफल होती है सेना
मुख्य अतिथि जनरल सिंह ने कहा कि आज दुनिया के सामने आतंकवाद एक बड़ा खतरा है। यह धर्म के नाम पर बहुत से समाजों के संकुचित होने की वजह से पनप रहा है। इन हालात में जरूरी है कि हम जिन दायरों में बंधे हैं, उनसे आगे निकलें। भारतीय संस्कृति ही भारतीय धर्म है, जिसमें ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की बात कही गई है। इसे दुनिया के हर नागरिक को अपने दिल में जगह देनी होगी।
भावी विश्व का निर्माण संकीर्णता के बीच तो नहीं हो सकता। उन्होंने सेना का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें एकता के साथ आगे बढ़ने की बात है, इसलिए वह किसी भी दुर्घटना, त्रासदी में जब मदद को आती है तो सफल होती है।
ऐसे ही समाज को धर्म और जाति को भूलकर देश को सर्वोपरि समझना होगा। विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि संपूर्ण विश्व को एक सरकार और एक संसद का विचार डॉ. राममनोहर लोहिया ने ही दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एपी मिश्रा ने शांति के लिए दुनिया भर में काम कर रहे संगठनों से एक साथ आने की अपील की। वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर और केके उपाध्याय ने भी विचार रखे। सीएमएस के संस्थापक जगदीश गांधी ने अतिथियों का आभार जताया।