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अफसरों ने दिया गुलदस्ता तो बिफरे कैबिनेट मंत्री, जांच के दौरान लगाई क्लास

Wed, 12 Apr 2017 12:48 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 12 Apr 2017 12:48 PM IST
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cabinet minister ashutosh tandon and state minister suresh pasi is in lda office
कैब‌िनेट मंत्री आशुतोष टंडन - फोटो : amar ujala
एलडीए के अफसर मंगलवार को जेपीएनआईसी और हुसैनाबाद सौंदर्यीकरण की जांच करने पहुंचे कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन और आवास राज्य मंत्री सुरेश पासी के रैपिड  सवालों के आगे ढेर हो गए। अफसर एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए।
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टंडन ने छत पर बने हेलीपैड को लेकर पूछा- इसकी क्या जरूरत है। एलडीए के मुख्य अभियंता ओपी मिश्र बोले, सर आग लगने पर लोगों को बाहर निकालने के लिए बनाया है।मंत्री ने भी सवाल दाग दिया कि जब आग लगी होगी तो हेलीकॉप्टर उतरेगाकैसे?
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एलडीए वीसी सत्येंद्र सिंह और मिश्र इस सवाल पर चकरा गए। थोड़ा रुककर मिश्र बोले- नहीं सर, हेलीपैड से लिफ्ट कराया जाएगा। मंत्री भी नहीं रुके और एक और सवाल दाग दिया- जब लिफ्ट ही कराना है तो हेलीपैड बनाने की जरूरत क्या थी? इसकेबाद सबने चुप्पी साध ली। 
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जांच के लिए पहुंचे मंत्रियों ने इस बार एलडीए की चापलूसी नहीं चलने दी। मंत्री टंडन तो जेपीएनआईसी के निरीक्षण के समय एलडीए वीसी और मुख्य अभियंता के स्वागत के लिए गुलदस्ता दिए जाने पर बिफर पड़े।हाथ झटक दिया, जिससे गुलदस्ता जमीन पर गिर गया। वे बोले जांच करने आए हैं स्वागत कराने नहीं आए...। सीधे एक-एक कर चौथे तल तक काम देखने गए। 

ये क्या पचास का पहाड़ा पढ़ा रहे हो...

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कैब‌िनेट मंत्री आशुतोष टंडन - फोटो : amar ujala
जेपीएनआईसी का म्यूजियम ब्लॉक देख मंत्री टंडन ने जब एलडीए वीसी सत्येंद्र सिंह और मुख्य अभियंता ओपी मिश्रा से सवाल किया है कितना स्टाफ यहां लगा है ..जबाब मिला पचास। कितनी लागत है? जवाब मिला पचास करोड़।  दर्शक कितने आते हैं...तो जवाब मिला पचास।  मंत्री भड़क गए बोले क्या पचास का पहाड़ा पढ़ा रहे हो। 

चौथे तल पर काम चलते देख मंत्रियों ने कहा अभी एंगल लगा रहे हो...और कह रहे हो काम 85 फीसदी हो गया। पूरा घोटाला है...। टंडन ने कहा, क्यों जयप्रकाश नारायण का नाम खराब कर रहे हो। वह तो गरीबों के हितैषी थे...क्या यहां कोई गरीब कदम भी रख सकता है? यह तो अमीरों के लिए है।

जयप्रकाश नारायण की जीवन को दर्शाने के लिए थाली बजाओ आंदोलन को दर्शाने के लिए बनाए गए सिस्टम और विंड चेन के बारे मे मंत्रियों ने पूछा यह क्या है, यह जब हमारी समझ में नहीं आ रहा तो गरीब क्या समझेंगे। उनके तो सिर के ऊपर से जाएगा।

जेपीएनआईसी सेंटर में लगाए गए कोबाल स्टोन को लेकर मंत्री सुरेश पासी ने सवाल उठाया बोले यहां इसकी क्या जरूरत है। पूछा तो पता चला तीन हजार रुपये वर्ग मीटर में लगाया जा रहा है।

बोले बर्बादी हो रही है जनता के पैसे की। दोपहर करीब 3.20 बजे पहुंचे मंत्रियों ने यहां पर 4 बजे तक  निरीक्षण किया और उसकेबाद उनका काफिला हुसैनाबाद की ओर चला गया।

डामर सड़क पर पत्थर ‌‌क‌िसके आदेश पर लगवाए

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कैब‌िनेट मंत्री आशुतोष टंडन और राज्य मंत्री सुरेश पासी - फोटो : amar ujala

वहीं शाम करीब 4.25 बजे हुसैनाबाद में सौंदर्यीकरण का काम देखने पहुचे। मंत्री सुरेश पासी ने मुख्य अभियंता ओपी मिश्रा से स्ट्रीट लाइट पोल की ओर इशारा करके पूछा, कितने में पोल लगाया गया? तो मुख्य अभियंता बोले, तीन लाख में।

इस पर मंत्री ने क हा कि क्या इम्पोर्टेड है। मुख्य अभियंता ने कहा- हां, सर विदेश से आया है। फिर मंत्री ने कहा अच्छा, यहां का नहीं लगा सकते थे। यहां का तो पचास हजार में लग जाता.. पैसे की बर्बादी है।

किसने आदेश दिया था?  इस पर मुख्य अभियंता ने कहा- शासन ने। यह सुनकर मंत्री ने कहा, पचास हजार का पोल तीन लाख में क्यों लगा दिया? इसी बीच टंडन ने कहा, अरे नहीं, पहले यहां दूसरे पोल लगे थे अब तो दूसरे लग रहे हैं। बार-बार पोल बदलने पर पैसा बर्बाद कर रहे हो। इस पर किसी अधिकारी का जवाब नहीं आया।

मंत्री गोपाल टंडन ने जमीन की तरफ देखकर कहा, ये पत्थर किसने लगवाए... किसका आदेश था। अधिकारी जवाब देते हुए उससे पहले एक और सवाल किया, यह डामर सड़क पर पत्थर किसके आदेश पर लगाया गया? 

मुख्य अभियंता हड़बड़ाते हुए बोले-सर शासन के आदेश पर । मंत्री- आदेश दिखाइये, यह आपके पास.. नहीं है। किसके आदेश पर पेड़ काट दिए, चंदन के पेड़ भी थे... क्या वन विभाग से अनुमति ली गई? अफसरों ने चुप्पी साध ली।


 

हम क्या यहां दर्शक बनकर आए हैं, डिटेल लाइए 

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कैब‌िनेट मंत्री आशुतोष टंडन और राज्य मंत्री सुरेश पासी - फोटो : amar ujala

पूरा स्वरूप ही चेंज कर दिया इस ऐतिहासिक स्थल का.. क्या एएसआई से अनुमति ली। अफसर चुप...। मंत्री- तो आपके पास कोई इंफार्मेशन नहीं ...हम क्या खाली यहां पर दर्शक बनकर आए हैं, टूरिस्ट बनकर आए हैं... कोई डिटेल आपके पास नहीं है।

जो पूछा जा रहा उस पर कह रहे हो कि उसका हुसैनाबाद ट्रस्ट मालिक है, इसके बारे में डीएम बताएंगे... शासन के आदेश पर हुआ... तो फिर एलडीए क्या है? किसी सवाल का जवाब न मिलने से झल्लाए मंत्री आशुतोष टंडन का पारा चढ़ गया।

उन्होंने साथी मंत्री सुरेश पासी से कहा-चलो कोई मतलब नहीं है। जब इनके पास कोई जानकारी ही नहीं तो फिर बाद में आएंगे। एलडीए वीसी और मुख्य अभियंता ने समझाने की कोशिश की मगर वह नहीं रुके और बोले ...ये पत्थर किसने लगाए आपके पास इंफार्मेशन नहीं है?

मूल स्वरूप इसका चेंज कर दिया और पुरातत्व विभाग की सहमति आपके पास नहीं है... पेड़ किसने काटे आपको पता नही..  पहले आप सारी डिटेल लेके आइए। एक-दो दिन बाद फिर देखने आएंगे।

आवास राज्यमंत्री सुरेश पासी ने हुसैनाबाद का निरीक्षण करने के बाद कहा, ‘इसमें इन्होंने 154 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हम लोग आए थे एक-एक चीज की जानकारी करने, जांच करने। इनको बताया भी था कि पूरी तैयारी से आना, सब कागज लेकर आना।

कहां कितना काम और कितना खर्च किया? कुछ लेकर ही नहीं आए। ब एक-दो दिन में फिर जांच करने आएंगे। अधिकारी अभी सुधरे नहीं हैं...। इन पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है...। जब इन पर कार्रवाई होगी तब इनकी समझ में आएगा।

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