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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Cabinet expansion of Uttar Pradesh.

UP: चार साल में मंत्रिमंडल का सातवां विस्तार, बलराम के साथ नारद की एंट्री

Tue, 28 Jun 2016 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 28 Jun 2016 02:08 AM IST
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Cabinet expansion of Uttar Pradesh.
- फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल के चार साल में सातवें विस्तार में बर्खास्त किए गए बलराम यादव और नारद राय के साथ तीन नए चेहरे जुड़े।

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बलराम ओर बलिया की सदर सीट के विधायक नारद राय व सिकंदरपुर के विधायक जियाउद्दीन रिजवी कैबिनेट मंत्री बने तो लखनऊ के दो विधायक रविदास मेहरोत्रा व शारदा प्रताप शुक्ल स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री बने।
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राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को रिजवी को छोड़ सभी को शपथ दिलाई। उमरा पर जाने की वजह से जियाउद्दीन रिजवी आज शपथ नहीं ले सके। विभागों का बंटवारा अभी नहीं हुआ है।
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विस्तार से पहले सीएम अखिलेश ने सोमवार सुबह ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मनोज कुमार पांडेय को बर्खास्‍त कर दिया। नारद को उन्हीं की जगह कैबिनेट में शामिल किया गया। चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का यह आखिरी विस्तार माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद की संख्या अब साठ हो गई है। मंत्रिमंडल में अब कोई जगह नहीं बची है।

जिनको मुलायम ने कहा, वही विधायक बने मंत्री

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शपथ ग्रहण के दौरान मुलायम सिंह व अमर सिंह - फोटो : amar ujala

अखिलेश मंत्रिमंडल के विस्तार में मुलायम सिंह यादव की पसंद को ही तरजीह मिली है। उन्होंने जिन विधायकों को चाहा, वे ही मंत्री बने। सरकार के कामकाज पर तीखी टिप्पणियां कर चुके रविदास मेहरोत्रा और शारदा प्रताप शुक्ला को उन्हीं के कहने पर मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। नारद राय भी सपा मुखिया की पसंद हैं। जियाउद्दीन रिजवी हालांकि शपथ लेने नहीं आए, लेकिन वे भी सपा मुखिया के कोटे में शुमार हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार में जिन चार मंत्रियों ने शपथ ली है, वे मुलायम के नजदीकी माने जाते हैं। बलराम यादव से उनका पार्टी की स्थापना से पहले का रिश्ता है। राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के दौरान कौमी एकता दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी से मिलने के लिए मुलायम ने ही बलराम को भेजा था।

उन्होंने 11 जून को अफजाल और उनके विधायक भाई सिगबतुल्ला अंसारी ने मुलायम से उनके निवास पर मुलाकात की थी। इसी में सपा मुखिया ने कौमी एकता दल के सपा में विलय का सुझाव रखा था।

21 जून को कौमी एकता दल का सपा में विलय हो जाने के बाद मुख्यमंत्री ने बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया था। चूंकि सपा मुखिया के कहने पर ही बलराम ने कौएद से बातचीत की थी, इसलिए उनकी बर्खास्तगी से वह नाखुश थे। फिर सपा मुखिया के कहने पर ही सपा संसदीय बोर्ड ने बलराम की मंत्रिमंडल में बहाली का निर्णय किया।

ये रहे मुलायम की पसंद, पहले करना पड़ा खंडन

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रामगोपाल यादव व मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

राजधानी के विधायक शारदा प्रताप और रविदास मेहरोत्रा भी सपा मुखिया की पसंद हैं। राज्यसभा चुनाव में जब चर्चा उड़ी थी कि शारदा प्रताप सपा से बगावत करने वाले हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खंडन करना पड़ा था।

उन्होंने सपा और मुलायम सिंह से अपने संबंधों को अटूट बताया था। शारदा प्रताप, चौधरी चरण सिंह के जमाने में लंबे समय तक लोकदल के लखनऊ के जिला अध्यक्ष रहे। रविदास छात्र जीवन में विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। वह 1989 से मुलायम के साथ हैं। उनकी छवि संघर्षशील नेता की है।

उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ आंदोलन से भी परहेज नहीं किया। कई बार पार्टी लाइन से हटकर बोले। मुलायम के कहने पर ही उन्हें मंत्री बनाया गया है। नारद राय और जियाउद्दीन रिजवी बलिया जिले के रहने वाले हैं।

नारद राय मुलायम सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। अखिलेश सरकार में वे पहले मंत्री बने, फिर बर्खास्त हुए। जियाउद्दीन भी मुलायम के नजदीकी हैं।

छोटे विस्तार में भी सियासी, सामाजिक संतुलन का ख्याल

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शप‌थ ग्रहण के दौरान विधायक - फोटो : amar ujala

अखिलेश यादव सरकार के मंत्रिमंडल के संक्षिप्त विस्तार में भी सियासी और सामाजिक संतुलन का ख्याल रखा गया है। राजधानी से असंतोष के स्वर न उठें, इसलिए यहां के दो विधायकों को मंत्री बनाया गया है। वहीं बलराम यादव, नारद राय और जियाउद्दीन को मंत्री पद देकर पूर्वांचल का समीकरण साधने की कोशिश की गई है।

राजधानी के दो विधायकों, रविदास मेहरोत्रा और शारदा प्रताप शुक्ल को स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाया गया है। यह कदम थोड़ा चौंकाने वाला है लेकिन इसके पीछे वजह हैं।

मेहरोत्रा और शारदा प्रताप पिछले कुछ समय से पार्टी में उपेक्षित माने जा रहे थे। रविदास को तो असंतुष्ट कहा जाने लगा था। उन्होंने विधानसभा तक में अपनी सरकार के खिलाफ सवाल पूछे। कुछ मुद्दों को लेकर धरने पर भी बैठे।

शारदा प्रताप को लेकर भी कई बार इस तरह की बातें सामने आईं जिनसे उनके असंतुष्ट होने की अटकलें लगने लगीं। यह स्थिति तब थी जब दोनों विधायक मुलायम सिंह के नजदीकी माने जाते हैं। वे मुलायम को अपनी पीड़ा बता चुके थे।

न उठे असंतोष ...इसलिए बनाया मंत्री

Cabinet expansion of Uttar Pradesh.

सपा मुखिया ने इसलिए उन्हें मंत्री बनवाया ताकि सपा विधायकों में राजधानी से कोई असंतोष न उठे। मुख्यमंत्री ने मनोज पांडेय को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है। ब्राह्मणों में इसका गलत संदेश न जाए, इसलिए भी शारदा प्रताप शुक्ला को मंत्री बनाया गया है।

नारद राय और जियाउद्दीन रिजवी को पूर्वांचल से मंत्री बनाया गया है। दोनों बलिया जिले से हैं। मऊ, गाजीपुर और बलिया में कौमी एकता दल का असर माना जाता है।

उनके दल का सपा में विलय खारिज हो जाने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए जियाउद्दीन और नारद को मंत्री पद दिया गया है।

बलराम यादव छह दिन पहले तक कैबिनेट मंत्री थे। वे सपा मुखिया के करीबी माने जाते हैं। उन्हें हटाए जाने से गलत संदेश जा रहा था, इसलिए हफ्ते भर के भीतर ही उनकी वापसी हो गई।

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