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इलेक्ट्रॉनिक्स और बायो-एनर्जी में पाठ्यक्रम शुरू करेगा लविवि
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एलयू से कर सकेंगे इलेक्ट्रॉनिक्स और बायो एनर्जी में बीवोक कोर्स
शासन के निर्देश पर यूजीसी को भेजा गया प्रस्ताव, अगले सत्र से होगी शुरुआत
लखनऊ विश्वविद्यालय अपने यहां इलेक्ट्रॉनिक्स और बायो एनर्जी में बैचलर ऑफ वोकेशनल एजुकेशन (बीवोक) पाठ्यक्रम शुरू करेगा। खासियत यह होगी कि छात्र किसी भी लेवल पर कोर्स की पढ़ाई छोड़कर प्रमाणपत्र ले सकेगा। छह महीने की परीक्षा पास करने पर सर्टिफिकेट, एक साल पर डिप्लोमा, दो साल पर एडवांस डिप्लोमा और तीन साल की पढ़ाई पूरी करने पर डिग्री दी जाएगी। यह प्रस्ताव शासन के निर्देश के बाद यूजीसी को भेजा गया है।
लविवि प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि शासन ने यूजीसी के पत्र के बाद दो बीवोक पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव देने को कहा था। इलेक्ट्रॉनिक्स और बायो-एनर्जी ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए लविवि ने इन दोनों विषयों के पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। इनमें पढ़ाए जाने वाले पेपर भी प्रस्ताव के साथ भेजे गए हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के 30 दिन के भीतर इनका सिलेबस तैयार कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद अगले शैक्षिक सत्र ये दोनों पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे।
रेग्युलर प्रणाली पर होंगे संचालित
यूजीसी अगर कोर्स को मंजूरी देगा तो इनके संचालन के लिए आर्थिक सहायता भी मिलेगी। इसकी वजह से कोर्स की फीस बेहद कम होगी और अन्य स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की तरह कम दाखिले होने पर बंद होने का खतरा भी नहीं होगा।
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सेल्फ फाइनेंस प्रणाली पर चल रहा बीवोक रिन्यूएबल एनर्जी कोर्स
लविवि के न्यू कैंपस में इस समय बीवोक रिन्यूएबल एनर्जी पाठ्क्रम संचालित है। फिलहाल यह स्ववित्तपोषित प्रणाली पर है। विवि में रत्न विज्ञान पर आधारित बीवोक पाठ्यक्रम का संचालन भी प्रस्तावित था। इसके लिए बजट में सहायता भी मिली थी, लेकिन एक साल बाद ही इसका संचालन ठप हो गया।
मंजूरी का इंतजार
शासन के निर्देश पर यूजीसी को दो बीवोक पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव भेजा गया है। यूजीसी से मंजूरी मिलते ही इसका सिलेबस तैयार करके पाठ्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा।
- प्रो. एनके पांडेय,
प्रवक्ता, लविवि
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शासन के निर्देश पर यूजीसी को भेजा गया प्रस्ताव, अगले सत्र से होगी शुरुआत
लखनऊ विश्वविद्यालय अपने यहां इलेक्ट्रॉनिक्स और बायो एनर्जी में बैचलर ऑफ वोकेशनल एजुकेशन (बीवोक) पाठ्यक्रम शुरू करेगा। खासियत यह होगी कि छात्र किसी भी लेवल पर कोर्स की पढ़ाई छोड़कर प्रमाणपत्र ले सकेगा। छह महीने की परीक्षा पास करने पर सर्टिफिकेट, एक साल पर डिप्लोमा, दो साल पर एडवांस डिप्लोमा और तीन साल की पढ़ाई पूरी करने पर डिग्री दी जाएगी। यह प्रस्ताव शासन के निर्देश के बाद यूजीसी को भेजा गया है।
लविवि प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि शासन ने यूजीसी के पत्र के बाद दो बीवोक पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव देने को कहा था। इलेक्ट्रॉनिक्स और बायो-एनर्जी ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए लविवि ने इन दोनों विषयों के पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। इनमें पढ़ाए जाने वाले पेपर भी प्रस्ताव के साथ भेजे गए हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के 30 दिन के भीतर इनका सिलेबस तैयार कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद अगले शैक्षिक सत्र ये दोनों पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे।
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रेग्युलर प्रणाली पर होंगे संचालित
यूजीसी अगर कोर्स को मंजूरी देगा तो इनके संचालन के लिए आर्थिक सहायता भी मिलेगी। इसकी वजह से कोर्स की फीस बेहद कम होगी और अन्य स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की तरह कम दाखिले होने पर बंद होने का खतरा भी नहीं होगा।
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सेल्फ फाइनेंस प्रणाली पर चल रहा बीवोक रिन्यूएबल एनर्जी कोर्स
लविवि के न्यू कैंपस में इस समय बीवोक रिन्यूएबल एनर्जी पाठ्क्रम संचालित है। फिलहाल यह स्ववित्तपोषित प्रणाली पर है। विवि में रत्न विज्ञान पर आधारित बीवोक पाठ्यक्रम का संचालन भी प्रस्तावित था। इसके लिए बजट में सहायता भी मिली थी, लेकिन एक साल बाद ही इसका संचालन ठप हो गया।
मंजूरी का इंतजार
शासन के निर्देश पर यूजीसी को दो बीवोक पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव भेजा गया है। यूजीसी से मंजूरी मिलते ही इसका सिलेबस तैयार करके पाठ्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा।
- प्रो. एनके पांडेय,
प्रवक्ता, लविवि