बसपा सुप्रीमो के लिए क्या बोले राज्यसभा प्रत्याशी?
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बसपा दस में से दो सीटें ही जीत सकती है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने राजाराम को दूसरी बार तो वीर सिंह को तीसरी बार राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है।
दोनों प्रत्याशी शनिवार को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, बसपा विधानमंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय व अनंत कुमार मिश्र उर्फ अंटू मिश्र समेत बड़ी संख्या में पार्टी विधायकों के साथ नामांकन करने के लिए विधान भवन के सेंट्रल हॉल पहुंचे।
यहां दोनों प्रत्याशियों ने प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप कुमार दुबे के समक्ष नामांकन किया। बसपा कोटे की दोनों ही सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने से सवर्ण मतदाताओं में पार्टी के प्रति गलत संदेश जाने के सवाल पर राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि बसपा सर्व समाज की पार्टी है।
पार्टी का शुक्रिया अदा करते हुए राज्यसभा प्रत्याशी वीर सिंह बोले कि बसपा अध्यक्ष ने लगातार तीसरी बार राज्यसभा में भेजने का फैसला किया। पूरी जिंदगी इस एहसान को नहीं भुला सकता। पार्टी नेता के निर्देश पर मैं पूरी ईमानदारी, निष्ठा व वफादारी के साथ काम करता रहूंगा।
राज्यसभा प्रत्याशी राजाराम बोले कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुझ मजदूर के बेटे को पहले एमएलसी बनाया। इसके बाद लगातार दूसरी बार राज्यसभा में भेजने का फैसला किया। वह बसपा को आगे बढ़ाने के लिए पहले की तरह पूरी ताकत से काम करते रहेंगे।
करोड़पति हैं राजाराम और वीर सिंह
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद अखिलेश दास के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा था कि वह दलित वर्ग से जिन राजाराम व वीर सिंह एडवोकेट को फिर से प्रत्याशी बना रही हैं।
उनके पास नामांकनपत्र भरने के लिए पैसा नहीं होता। इनके नामांकन के लिए पैसा केंद्रीय यूनिट को देना पड़ता है लेकिन इन सांसदों ने राज्यसभा नामांकन के वक्त जो शपथपत्र दाखिल किया है, उसमें हकीकत कुछ और ही है।
पहले, राज्यसभा प्रत्याशी वीर सिंह की माली हालत का सच देखिए। एक राज्यसभा चुनाव से दूसरे के बीच उनकी न सिर्फ नकदी बढ़ी बल्कि जीप से स्कार्पियो पर आ गए। 1.70 करोड़ की अचल संपत्ति का विस्तार होते-होते 9.62 करोड़ से ज्यादा की हो गई।
दूसरे प्रत्याशी राजाराम भी छह सालों में खूब मालामाल हुए हैं। 15 हजार की नकदी 45 हजार तक पहुंची है तो बैंक में जमा रकम 5.5 लाख से बढ़कर 63 लाख रुपये तक पहुंच गया। यही नहीं 55 ग्राम जेवरात अब 100 ग्राम तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं अचल संपत्ति बनाने में भी राजाराम पीछे नहीं रहे।