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बसपा को खोना कुछ नहीं, सीटें झटककर ताकत दिखाने पर जोर
Mon, 19 Oct 2020 12:02 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 19 Oct 2020 12:02 AM IST
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बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में सात सीटों पर हो रहे विधानसभा उपचुनाव में बसपा कुछ सीटें झटककर 2022 के विधानसभा आम चुनाव से पहले खुद को मुख्य लड़ाई में साबित करके मनोवैज्ञानिक बढ़त लेना चाहती है। इसके लिए पार्टी की दूसरी कतार के सभी प्रमुख नेताओं की सीटवार जिम्मेदारी तय कर दी गई है।
2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पर पहुंचकर 19 सीटों पर सिमट गई थी। इससे मनोवैज्ञानिक रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं को तगड़ा झटका लगा था। मौजूदा विधानसभा उपचुनाव को पार्टी एक अवसर के रूप में लेकर चल रही है। बसपा के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि उपचुनाव की एक भी सीट बसपा के कब्जे वाली नहीं है। ऐसे में पार्टी को कुछ भी खोना नहीं है। पर, सात में पांच सीटों मल्हनी (पूर्व में रारी), बांगरमऊ, बुलंदशहर, घाटमपुर व टूंडला पर पार्टी पहले एक या एक से अधिक बार जीत दर्ज कर चुकी है। 2019 में पार्टी अमरोहा लोकसभा का चुनाव जीत चुकी है और इस संसदीय क्षेत्र की नौगांवा सीट पर भी बढ़त हासिल कर चुकी है। देवरिया विधानसभा सीट पर भी बेहतर प्रदर्शन करती रही है।
बसपा के एक मंडलीय मुख्य प्रभारी कहते हैं कि पार्टी अध्यक्ष मायावती के निर्देशन में सभी सीटों की अलग-अलग रणनीति तैयार की गई है। राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, पश्चिमी यूपी के प्रभारी शमशुद्दीन राइन, प्रदेश अध्यक्ष मुनकाद अली, पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों व विधान परिषद सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। पूरी चुनाव योजना मंडलीय मुख्य प्रभारियों के निर्देशन में चल रही है। चुनाव क्षेत्रों के लिहाज से विभिन्न समाज व वर्गों के प्रभावशाली नेताओं ने डेरा डाल दिया है। वरिष्ठ नेता भी जल्द ही प्रचार करते नजर आएंगे। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती के उपचुनाव में प्रचार के लिए आने की संभावना बेहद कम है। वह दावा करते हैं कि पार्टी काडर व सर्व समाज में जैसा उत्साह है, उससे चार सीटें जीतने की उम्मीद है। रणनीति सफल रही तो यह 2022 के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
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2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पर पहुंचकर 19 सीटों पर सिमट गई थी। इससे मनोवैज्ञानिक रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं को तगड़ा झटका लगा था। मौजूदा विधानसभा उपचुनाव को पार्टी एक अवसर के रूप में लेकर चल रही है। बसपा के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि उपचुनाव की एक भी सीट बसपा के कब्जे वाली नहीं है। ऐसे में पार्टी को कुछ भी खोना नहीं है। पर, सात में पांच सीटों मल्हनी (पूर्व में रारी), बांगरमऊ, बुलंदशहर, घाटमपुर व टूंडला पर पार्टी पहले एक या एक से अधिक बार जीत दर्ज कर चुकी है। 2019 में पार्टी अमरोहा लोकसभा का चुनाव जीत चुकी है और इस संसदीय क्षेत्र की नौगांवा सीट पर भी बढ़त हासिल कर चुकी है। देवरिया विधानसभा सीट पर भी बेहतर प्रदर्शन करती रही है।
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बसपा के एक मंडलीय मुख्य प्रभारी कहते हैं कि पार्टी अध्यक्ष मायावती के निर्देशन में सभी सीटों की अलग-अलग रणनीति तैयार की गई है। राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, पश्चिमी यूपी के प्रभारी शमशुद्दीन राइन, प्रदेश अध्यक्ष मुनकाद अली, पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों व विधान परिषद सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। पूरी चुनाव योजना मंडलीय मुख्य प्रभारियों के निर्देशन में चल रही है। चुनाव क्षेत्रों के लिहाज से विभिन्न समाज व वर्गों के प्रभावशाली नेताओं ने डेरा डाल दिया है। वरिष्ठ नेता भी जल्द ही प्रचार करते नजर आएंगे। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती के उपचुनाव में प्रचार के लिए आने की संभावना बेहद कम है। वह दावा करते हैं कि पार्टी काडर व सर्व समाज में जैसा उत्साह है, उससे चार सीटें जीतने की उम्मीद है। रणनीति सफल रही तो यह 2022 के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
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