अब इस गंभीर बीमारी के मरीजों की लखनऊ में बचाई जा सकेगी जान
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ब्रेन स्ट्रोक के कारण लकवा (पैरालिसिस) से पीड़ित मरीजों की भी जान बचाई जा सकेगी। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में न्यूरोलॉजी विभाग ने ऐसे मरीजों के लिए थ्रम्बोटिक ट्रीटमेंट शुरू किया है।
इससे स्ट्रोक पड़ने के तीन घंटे के अंदर ट्रॉमा सेंटर पहुंचने वाले मरीज को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सकेगा। लेकिन इस इलाज के लिए मरीज को 60 हजार रुपये खर्च करने होंगे।
केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. आरके गर्ग ने बताया कि मरीजों को शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवा मार जाना, चेहरे पर लकवा, बोलने में दिक्कत, अचानक एक आंख से कम दिखाई देना जैसी दिक्कतें हो जाती हैं।
यदि ऐसे लक्षणों वाले मरीजों को तीन घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसे और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है। ब्रेन स्ट्रोक के इन शुरुआती लक्षणों को टीआईए (ट्रांजेंट इस्किमिक अटैक) कहा जाता है ये लक्षण अस्थायी या कम समय के लिए होते हैं लेकिन लापरवाही से स्थिति गंभीर हो सकती है।
ऐसे मरीजों को खून के थक्के गलाने वाला एक इंजेक्शन दिया जाता है। इससे मरीज के खून में थक्का बनने की प्रक्रिया रुक जाती है और मरीज के मस्तिष्क को अधिक नुकसान नहीं पहुंचता है।
स्ट्रोक के मरीज को जो इंजेक्शन लगाया जाता है उसकी कीमत 60 हजार रुपये है। ट्रॉमा सेंटर में न्यूरोलॉजी विभाग का एक रेजीडेंट 24 घंटे तैनात रहता है।
यहां जानें ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण और बचाव
ये रेजीडेंट मेडिसिन विभाग में आने वाले स्ट्रोक के मरीजों को इलाज मुहैया कराता है। यदि स्ट्रोक का कोई मरीज तीन घंटे के अंदर इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंचता है तो उसके परिवारीजनों को इस इंजेक्शन के बारे में जानकारी दी जाती है और इलाज शुरू कर दिया जाता है। अभी ये इंजेक्शन सीधे कंपनी मुहैया करा रही है।
बचाव
•ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें
•रक्त में शुगर की जांच नियमित कराएं
•वसायुक्त भोजन न करें
•रोज व्यायाम करें
स्ट्रोक का कारण
उच्च रक्तचाप,धूम्रपान,मोटापा,
मधुमेह,शारीरिक क्रियाकलापों में कमी लक्षण
लक्षण
असहनीय सिरदर्द और बेहोशी,चेहरे में अचानक टेढ़ापन,खाना खाने में परेशानी,बोलने में कठिनाई या आवाज बंद हो जाना,एक की जगह दो चीजें दिखाई देने लगना,लड़खड़ाना,अचानक हाथ-पैर काम करना बंद कर देना
क्या है ब्रेन स्ट्रोक
केजीएमूय के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. आरके गर्ग के अनुसार मस्तिष्क को खून पहुंचाने वाली नसों में थक्का जम जाता है। इससे मस्तिष्क को खून नहीं पहुंचता और उसे ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है। मस्तिष्क के जिस हिस्से को खून नहीं मिलता वहां की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। इससे उस हिस्से से चलने वाले अंग काम करना बंद कर देते हैं।