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भाषाओं का समन्वय है ‘धरती पकड़ निर्दलीय’
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 30 Oct 2013 08:48 AM IST
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कथाकार रवींद्र प्रभात के उपन्यास ‘धरती पकड़ निर्दलीय’ का लोकार्पण
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मंगलवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में हुआ।
इस मौके पर साहित्यिक परिचर्चा भी हुई, जिसमें उपन्यास की भाषा, विषयवस्तु और लेखन पर साहित्यकारों ने विचार दिए।
अध्यक्षीय वक्तव्य में साहित्यकार डॉ. सुभाष राय ने कहा कि उपन्यास की भाषा अवधी व भोजपुरी में समन्वय स्थापित करते हुए खड़ी बोली के माध्यम से संवाद करती है।
कथाकार शिव मूर्ति ने कहा कि उपन्यास के पात्र ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण करते नजर आते हैं। समीक्षक डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित ने रवींद्र प्रभात लेखन में व्यंग्य छिपे हुए हैं।
डॉ. अलका पाण्डेय ने कहा कि व्यंग्य धारदार और संभावनाओं से भरा हुआ है। डॉ. राम बहादुर मिश्र ने लेखक के भाषायी कौशल की चर्चा की।
इस मौके पर साहित्यिक परिचर्चा भी हुई, जिसमें उपन्यास की भाषा, विषयवस्तु और लेखन पर साहित्यकारों ने विचार दिए।
अध्यक्षीय वक्तव्य में साहित्यकार डॉ. सुभाष राय ने कहा कि उपन्यास की भाषा अवधी व भोजपुरी में समन्वय स्थापित करते हुए खड़ी बोली के माध्यम से संवाद करती है।
कथाकार शिव मूर्ति ने कहा कि उपन्यास के पात्र ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण करते नजर आते हैं। समीक्षक डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित ने रवींद्र प्रभात लेखन में व्यंग्य छिपे हुए हैं।
डॉ. अलका पाण्डेय ने कहा कि व्यंग्य धारदार और संभावनाओं से भरा हुआ है। डॉ. राम बहादुर मिश्र ने लेखक के भाषायी कौशल की चर्चा की।