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UP: 30 रुपये की टैबलेट से ठीक हुआ ब्लैक फंगस... केजीएमयू के अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल स्प्रिंगर ने दी मान्यता

Mon, 24 Jun 2024 02:37 PM IST
शाहरुख खान सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 24 Jun 2024 02:37 PM IST
सार

30 रुपये की टैबलेट से ब्लैक फंगस ठीक हो गया है। ब्लैक फंगस के मामलों में दी जानी वाली दवाओं की कीमत 450 रुपये से लेकर 5800 रुपये प्रति गोली तक है। कोविड-19 महामारी के समय दवाओं की किल्लत होने पर केजीएमयू में सस्ती दवा का उपयोग किया गया। केजीएमयू के अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल स्प्रिंगर ने मान्यता दे दी है।

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Black fungus cured with a tablet of 30 rupees
Black fungus - फोटो : FreePik

विस्तार

केजीएमयू के डॉक्टरों ने कोविड-19 महामारी के समय लोगों में डर का पर्याय बने म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) के संक्रमण को महज 30 रुपये की गोली इट्राकोनोजोल से ठीक करने में सफलता हासिल की है। केजीएमयू के इस सफल परीक्षण को बेहद प्रतिष्ठित जर्नल स्प्रिंगर ने प्रकाशित करके मान्यता दी है।
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केजीएमयू के संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि कोरोना महामारी के समय संक्रमण को मात देने वाले काफी मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले देखे गए। यह बीमारी नई तो नहीं थी, पर साल में इसके इक्का-दुक्का केस ही आते थे। 
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इस बीमारी के लिए एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन सामान्य रूप से उपयोग किया जाता है। इस इंजेक्शन की कीमत 1,900 रुपये है। इसके अलावा इस बीमारी की दो नई दवाएं- पोसाकोनाजोल और इसावुकोनाजोल भी आई हैं। पोसाकोनाजोल की एक टैबलेट करीब 450 रुपये की आती है। वहीं इसावुकोनाजोल की एक टैबलेट के लिए करीब 5,800 रुपये चुकाने पड़ते हैं।
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शोध में सामान्य फंगल के मामलों में दी जाने वाली इट्राकोनोजोल का इस्तेमाल किया गया। करीब छह महीने इसकी रोजाना दो-दो गोली दी गई। इससे न सिर्फ मरीज की जान बची, बल्कि उनकी बीमारी भी ठीक हो पाई।
 

85 फीसदी रही असरदार
इस अध्ययन के लिए 14 मरीजों की लिखित सहमति ली गई थी। इसमें से एक मरीज की डायरिया के चलते मौत हो गई। एक मरीज फॉलोअप के लिए नहीं आया। एक मरीज को दूसरी दवाई पर शिफ्ट कर दिया गया और चार ने दोबारा एमआरआई नहीं कराई। बचे हुए सात मरीजों की एमआरआई जांच कराई गई। इसमें पाया गया कि यह दवा 85 फीसदी तक कारगर रही।
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